लखनऊ अग्निकांड: बायोमेट्रिक लॉक या स्मार्ट लॉक, आग लगने की स्थिति में क्यों बन जाते हैं जानलेवा?

लखनऊ अग्निकांड: देश भर में इन दिनों लगातार आग की घटनाएं देखने को मिल रही हैं. पिछले दो महीनों के अंदर अलग अलग जगहों पर आग लगने से कई लोगों की मौत हो गई है.

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लखनऊ और मालवीय नगर अग्निकांड में एक जैसी लापरवाही. (photo: ITG) लखनऊ और मालवीय नगर अग्निकांड में एक जैसी लापरवाही. (photo: ITG)

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:27 PM IST

लखनऊ एक कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई. शुरुआती जांच में जो बात सामने आई, उसने सबको चौंका दिया. रिपोर्ट के मुताबिक कॉम्पलेक्स बिना फायर NOC के बना था. इतना ही नहीं, बायोमेट्रिक लॉक सिस्टम की भी बात सामने आई है.

बताया जा रहा है कि बिल्डिंग में लगा बायोमेट्रिक ऑटो-लॉक सिस्टम आग के दौरान जाम हो गया, जिससे अंदर फंसे लोगों के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग लगने के बाद धुआं तेजी से पूरे ऑफिस में फैल गया. ऐसे हालात में सबसे जरूरी होता है तुरंत बाहर निकलना, लेकिन यहां एंट्री-एग्जिट पर लगा बायोमेट्रिक गेट ऑटोमैटिक तरीके से लॉक हो गया. बिजली और सिस्टम फेल होने के बाद दरवाजा खुल ही नहीं पाया. अंदर मौजूद लोग धुएं और आग के बीच फंस गए.

बायोमेट्रिक लॉकिंग सिस्टम कितना सेफ?

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले दिल्ली में भी एक आग की घटना में ‘स्मार्ट लॉक’ बड़ी वजह बनकर सामने आया था. बताया गया कि दिल्ली आग मामले में भी आग लगने के बाद इलेक्ट्रॉनिक लॉक सिस्टम काम करना बंद कर गया था और लोग बाहर नहीं निकल पाए थे. नतीजा यह हुआ कि कई लोग धुएं में घुटकर या आग में फंसकर झुलस गए.

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि बायोमेट्रिक या ऑटो-लॉक सिस्टम सामान्य हालात में तो सुरक्षित लगते हैं, लेकिन आग जैसी अगर क्वॉलिटी अच्छी नहीं हो तो इमरजेंसी स्थिति में ये फेल हो सकते हैं. 

लखनऊ की घटना में भी शायद यही हुआ. अंदर मौजूद लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन गेट नहीं खुला. कुछ लोगों ने तो खिड़कियों से निकलने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. दम घुटने और आग की वजह से जान बचाना मुश्किल हो गया. हालांकि अभी जांच जारी है.

यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बिल्डिंग में इमरजेंसी एग्जिट मौजूद था या नहीं. अगर था, तो क्या वह काम कर रहा था? और अगर नहीं था, तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई? नियमों के मुताबिक, किसी भी कमर्शियल बिल्डिंग में इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म और मैन्युअल लॉक सिस्टम होना जरूरी होता है.

टेक्नोलॉजी और सेफ्टी

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल गलत नहीं है, लेकिन बिना सही सेफ्टी बैकअप के इसका इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है. खासकर ऐसे सिस्टम, जो बिजली या सॉफ्टवेयर पर निर्भर हों, उन्हें इमरजेंसी के समय मैन्युअली ओपन करने का विकल्प जरूर होना चाहिए.

स्मार्ट बनने की दौड़ में हम बेसिक सेफ्टी को नजरअंदाज कर रहे हैं. बायोमेट्रिक लॉक, ऑटोमेटेड गेट और डिजिटल सिस्टम तभी तक सुरक्षित हैं, जब तक सब कुछ ठीक चल रहा है. जैसे ही कोई गड़बड़ी होती है, ये सिस्टम सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं.

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सेफ स्मार्ट लॉक?

आम तौर पर जितने भी मार्केट में सस्ते स्मार्ट डोर लॉक्स मिलते हैं उनमे बेसिक सेफ्टी भी नहीं होती है. कभी भी बिना फिजिकल की वाला स्मार्ट लॉक ना खरीदें. लॉक ओपन करने के लिए चाभी जरूर होना चाहिए. इतना ही नहीं, मेक श्योर करें की उस स्मार्ट लॉक में फायर सेफ्टी से जुड़़े स्टैंडर्ड हों. क्योंकि आग लगने की स्थिति में लॉक जाम होना आम बात है. स्मार्ट लॉक के अलावा कई बार नॉर्मल डोर लैच भी आग लगने की स्थिति में फंस जाते हैं और गेट ओपन नहीं होता. 

 

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