FIFA का ये कैसा इंसाफ? एक खिलाड़ी पर 2 मैच का बैन, दूसरे को रेड कार्ड के बाद भी खेलने की छूट

जारेल क्वांसा अब नॉर्वे के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में नहीं खेल पाएंगे. वहीं, लगभग इसी तरह के फाउल के बावजूद बालोगुन को खेलने की अनुमति मिली थी. इन दो मामलों के चलते FIFA की पारदर्शिता सवालों के घेरे में आ गई है.

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इंग्लैंड के डिफेंडर जारेल क्वांसा पर दो मैचों का बैन लगा. (Photo: Reuters) इंग्लैंड के डिफेंडर जारेल क्वांसा पर दो मैचों का बैन लगा. (Photo: Reuters)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:59 PM IST

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के बीच FIFA के दो फैसलों ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. इंग्लैंड के डिफेंडर जारेल क्वांसा को मेक्सिको के खिलाफ रेड कार्ड मिलने के बाद दो मैचों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है. इसके चलते वह नॉर्वे के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में शिरकत नहीं कर पाएंगे. वहीं, कुछ दिन पहले इसी तरह के फाउल पर रेड कार्ड पाने वाले अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को अगले मुकाबले में खेलने की अनुमति मिल गई थी. दोनों मामलों में अलग-अलग सजा को लेकर FIFA की अनुशासनात्मक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.

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इंग्लैंड और मेक्सिको के बीच राउंड ऑफ 16 मुकाबले में जारेल क्वांसा ने स्टड्स-अप चैलेंज किया था. VAR की समीक्षा के बाद उनके फाउल को 'सीरियस फाउल प्ले' माना गया और उन्हें रेड कार्ड दिखाया गया. इसके बाद FIFA की अनुशासन समिति ने क्वांसा पर दो मैचों का प्रतिबंध लगा दिया. इंग्लैंड फुटबॉल एसोसिएशन के मुताबिक इस फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती.

इससे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और बोस्निया एंड हर्जेगोविना के बीच राउंड ऑफ 32 मुकाबले में फोलारिन बालोगुन को भी स्टड्स-अप टैकल के लिए रेड कार्ड मिला था. उनके फाउल को भी 'सीरियस फाउल प्ले' माना गया. FIFA ने शुरुआत में उन पर एक मैच का प्रतिबंध लगाया, लेकिन बाद में अनुशासन संहिता के आर्टिकल 27 के तहत सजा को एक साल के प्रोबेशन पर सस्पेंड कर दिया. इससे बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध हो गए.

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ट्रंप ने FIFA पर बनाया प्रेशर?
विवाद उस समय और बढ़ गया, जब रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने FIFA अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से बालोगुन के निलंबन की समीक्षा करने को कहा था. हालांकि, FIFA ने कहा कि इस बातचीत का अंतिम फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. इसके बावजूद बालोगुन को राहत देने और क्वांसा पर दो मैचों का प्रतिबंध लगाने के फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

पूर्व FIFA रेफरी कीथ हैकेट ने विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था की आलोचना करते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने गंभीर फाउल किए थे और उन्हें रेड कार्ड मिला था. उन्होंने बालोगुन की सजा टालने के फैसले पर FIFA को कटघरे में खड़ा किया. पूर्व FIFA रेफरी जोनास एरिक्सन ने भी दोनों घटनाओं को तीव्रता और आक्रामकता के लिहाज से काफी हद तक एक जैसा बताया.

एरिक्सन ने कहा, 'अगर बालोगुन को एक मैच का निलंबन मिला, तो क्वांसा को भी उतनी ही सजा मिलनी चाहिए थी. सही फैसलों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण निरंतरता है. खिलाड़ी A और खिलाड़ी B के साथ समान व्यवहार होना चाहिए.'

बेल्जियम ने संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ मुकाबले से पहले बालोगुन की पात्रता को चुनौती दी थी, लेकिन FIFA ने उसकी आपत्ति खारिज कर दी. FIFA ने अब तक यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया है कि बालोगुन के मामले में आर्टिकल 27 का इस्तेमाल क्यों किया गया.

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