15 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही 7 देशों में शतक...आखिर वैभव सूर्यवंशी में ऐसा क्या खास है?

15 साल की उम्र पूरी होने से पहले ही वैभव सूर्यवंशी भारत, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कतर, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे में शतक जड़ चुके हैं. आखिर उनकी बल्लेबाजी में ऐसा क्या खास है, जो उन्हें बाकी युवा खिलाड़ियों से अलग बनाता है?

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वैभव सूर्यवंशी की सफलता का सबसे बड़ा राज क्या है? (Photo, Getty) वैभव सूर्यवंशी की सफलता का सबसे बड़ा राज क्या है? (Photo, Getty)

विश्व मोहन मिश्र

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  • 24 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

अरे वाह! वैभव सूर्यवंशी 15 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही 7 देशों में शतक बना चुके हैं. पहली प्रतिक्रिया यही होती है. लेकिन हैरानी का यह एहसास ज्यादा देर नहीं टिकता. कुछ ही पल में उसकी जगह एक बड़ा सवाल ले लेता है- आखिर ऐसा कैसे?

क्रिकेट में शतक लगाना मुश्किल है. विदेश में शतक लगाना उससे भी मुश्किल... और भारत के अलावा इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कतर, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे जैसे 7 अलग-अलग देशों में जाकर शतक लगाना सिर्फ प्रतिभा की कहानी नहीं हो सकती.

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क्योंकि यहां सिर्फ गेंदबाज नहीं बदलते, हालात भी बदलते हैं. पिचें बदलती हैं, मौसम बदलता है, चुनौतियां बदलती हैं. लेकिन इन सबके बीच अगर एक किशोर बल्लेबाज लगातार रन बनाता रहे, तो यह सिर्फ तकनीक का नहीं, मानसिकता का भी सबूत होता है.

शायद यही वजह है कि आज वैभव सूर्यवंशी की चर्चा सिर्फ उनकी उम्र या रिकॉर्ड की नहीं हो रही. चर्चा उस नजरिए की हो रही है, जिसने उन्हें इतनी कम उम्र में दुनिया के अलग-अलग कोनों में जाकर सफल बनाया है.

भारत, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कतर, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे... ये सिर्फ 7 देशों के नाम नहीं हैं. ये 7 अलग-अलग क्रिकेट संस्कृतियां हैं. सात तरह की पिचें हैं. सात तरह की चुनौतियां हैं. कहीं गेंद हवा में नाचती है, कहीं सिर के ऊपर से गुजरती है, कहीं स्पिनरों का जाल होता है और कहीं गति बल्लेबाजों का इम्तिहान लेती है.

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लेकिन इन सबके बीच एक चीज नहीं बदली- वैभव सूर्यवंशी का रन बनाने का तरीका.

यही वजह है कि 15 साल की उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट के दरवाजे पर खड़े इस लड़के की चर्चा सिर्फ उसकी उम्र की नहीं हो रही. चर्चा उस मानसिकता की हो रही है, जिसने उसे अपने हमउम्र खिलाड़ियों से अलग खड़ा कर दिया है.

देश बदलते रहे, पिचें बदलती रहीं, लेकिन रन बनाने की आदत नहीं बदली

15 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही 7 देशों में शतक

देश तारीख रन विरोधी टीम फॉर्मेट संदर्भ
भारत*
30-09-2024
104 ऑस्ट्रेलिया U-19 यूथ टेस्ट चेन्नई में 58 गेंदों में शतक, भारत का सबसे तेज यूथ टेस्ट शतक
इंग्लैंड 05-07-2025 143 इंग्लैंड U-19 यूथ ODI वॉर्सेस्टर में 52 गेंदों में शतक, युवा वनडे का सबसे तेज शतक
ऑस्ट्रेलिया
30-09-2025
113 ऑस्ट्रेलिया U-19 यूथ Test ब्रिस्बेन में शतक
कतर 14-11-2025 144 UAE T20 दोहा में 42 गेंदों पर शतक (Rising Stars Asia Cup/India A)
यूएई 12-12-2025 171 UAE U-19 यूथ ODI एशिया कप) दुबई में 56 गेंदों में शतक
द. अफ्रीका 07-01-2026 127
द. अफ्रीका U-19
यूथ ODI बेनोनी में 63 गेंदों में शतक
जिम्बाब्वे 06-02-2026 175 इंग्लैंड U-19 यूथ ODI
हरारे में U-19 विश्व कप फाइनल में 80 गेंदों में 175 रन

* भारत में वैभव ने इसके अलावा और भी शतक जमाए हैं. 

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क्रिकेट में युवा बल्लेबाजों की सबसे बड़ी परीक्षा तकनीक नहीं होती. सबसे बड़ी परीक्षा होती है परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाने की.

कई खिलाड़ी घरेलू मैदानों पर रन बनाते हैं. कुछ विदेश में भी सफल हो जाते हैं. लेकिन बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो हर नई परिस्थिति को लगभग उसी आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करते हैं, जैसे वह अपने घर के मैदान पर खेल रहे हों.

इंग्लैंड में शतक बनाते समय गेंद स्विंग कर रही थी. ऑस्ट्रेलिया में उछाल ज्यादा थी. दक्षिण अफ्रीका में रफ्तार और बाउंस दोनों थे. यूएई और कतर में परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं. लेकिन स्कोरबोर्ड पर एक चीज बार-बार दोहराई गई-वैभव सूर्यवंशी का नाम.

यही वह पैटर्न है जो उन्हें खास बनाता है. दरअसल, क्रिकेट में अधिकांश युवा बल्लेबाज परिस्थितियों के हिसाब से अपने इरादे बदलते हैं. पिच मुश्किल हो तो बचाव बढ़ा देते हैं. सामने बड़ा गेंदबाज हो तो जोखिम कम कर देते हैं. मैच बड़ा हो तो गलती न करने पर ज्यादा ध्यान देते हैं.

वैभव की कहानी अब तक उल्टी रही है

- वह परिस्थितियों के हिसाब से अपने इरादे नहीं बदलते... बल्कि अपने इरादों से परिस्थितियों को चुनौती देते हैं. शायद इसी वजह से उनकी सबसे यादगार पारियां भी अक्सर सबसे बड़े मौकों पर आई हैं.

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- बड़े मैचों में दबाव अधिकांश खिलाड़ियों की बल्लेबाजी को छोटा कर देता है. लेकिन वैभव के मामले में दबाव अक्सर उनके खेल को बड़ा करता दिखाई देता है. वह दबाव को खतरे की तरह नहीं, अवसर की तरह देखते हैं.

यही अंतर उन्हें अपने समकालीन खिलाड़ियों से अलग खड़ा करता है.

- जहां दूसरे बल्लेबाज गलती से बचने की कोशिश करते हैं, वहां वैभव मैच पर असर डालने की कोशिश करते हैं. जहां दूसरे बल्लेबाज परिस्थिति के अनुसार अपने इरादे सीमित करते हैं, वहां वैभव परिस्थिति को अपने इरादों के मुताबिक ढालने का प्रयास करते हैं.

शायद यही कारण है कि उनकी पारियां अक्सर सिर्फ शतक नहीं लगतीं. वे मैच की दिशा बदल देने वाली पारियां लगती हैं.

अब आयरलैंड के खिलाफ संभावित इंटरनेशनल डेब्यू की चर्चा है. रिकॉर्ड बनेंगे. सुर्खियां भी बनेंगी. शायद कई पुराने रिकॉर्ड टूटेंगे भी. लेकिन वैभव की कहानी फिलहाल रिकॉर्ड से बड़ी दिखाई देती है. क्योंकि क्रिकेट में सबसे बड़ी पहचान सिर्फ रन बनाने से नहीं बनती. वह उस मानसिकता से बनती है, जो बाकी खिलाड़ियों से आपको अलग करती है.

वैभव भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मंच की दहलीज पर खड़े हैं. 26 जून को बेलफास्ट में आयरलैंड के खिलाफ पहला टी20 इंटरनेशनल मुकाबला उनके करियर का सबसे खास दिन बन सकता है. उस दिन उनकी उम्र होगी सिर्फ 15 साल 91 दिन. वह भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे.

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