बिहार से निकला 15 साल 71 दिन का एक किशोर आज भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी चर्चा बन चुका है. IPL 2026 में अपने विस्फोटक बल्लेबाजी अंदाज से तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टी20 टीम के स्क्वॉड में शामिल किया गया है.
776 रन और 237.30 के हैरतअंगेज स्ट्राइक रेट के साथ वैभव ने IPL में गेंदबाजों की नींद उड़ा दी थी. लेकिन टीम इंडिया तक पहुंचने की यह कहानी सिर्फ चौकों-छक्कों की नहीं है. इसके पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार का त्याग और एक पिता की सख्ती छिपी है. बेटे के भारतीय टीम के स्क्वॉड में शामिल होने के बाद पिता संजीव सूर्यवंशी ने उस सफर के कई अनसुने किस्से साझा किए, जिसमें सपने थे, संघर्ष था और खूब डांट भी थी.
'बचपन से यही सपना था'
पिता संजीव सूर्यवंशी के मुताबिक वैभव ने बहुत छोटी उम्र में ही क्रिकेट को अपना लक्ष्य बना लिया था. उन्होंने कहा, 'बच्चा बचपन से ही बहुत मेहनत करता आया है. आज उसे उसी मेहनत का फल मिला है. क्रिकेट ही उसका लक्ष्य था और वह उसी दिशा में लगातार आगे बढ़ता रहा. हम लोग भी उसके साथ खड़े रहे. आज हमारा परिवार खुश है, बिहार खुश है और पूरा देश उसके लिए खुश है.'
वैभव को मिल रहे समर्थन से भी उनका परिवार अभिभूत है. संजीव कहते हैं कि बेटे को देशभर से जो प्यार और आशीर्वाद मिल रहा है, वही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है.
बल्ला पकड़ते ही दिख गई थी प्रतिभा
पिता बताते हैं कि वैभव की प्रतिभा की झलक उन्हें बचपन में ही दिख गई थी. उन्होंने कहा, 'जब बचपन में उसके हाथ में बल्ला दिया तो उसके खेलने के तरीके से लगा कि यह बच्चा कुछ अलग है. फिर धीरे-धीरे उसे अभ्यास की सुविधाएं मिलीं और उसका खेल लगातार निखरता गया.'
संजीव के मुताबिक वैभव के खेल को देखकर उन्हें भरोसा होने लगा था कि अगर सही दिशा और मेहनत मिलती रही तो वह एक दिन बड़ा खिलाड़ी जरूर बनेगा.
'बहुत डांट खाई है उसने'
बातचीत के दौरान जब वैभव की सफलता का राज पूछा गया तो संजीव सूर्यवंशी का जवाब चर्चा का विषय बन गया.
उन्होंने कहा, 'बहुत डांट खाई है उसने.'
संजीव बताते हैं कि वैभव ने सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि अनुशासन के मामले में भी खुद को लगातार तराशा है. 'सुबह-शाम मेहनत करता था. कभी-कभी गलती होती थी तो डांट भी पड़ती थी. लेकिन वह सब उसके भले के लिए था.'
जब उनसे पूछा गया कि क्या आज की सफलता में उनकी डांट का भी योगदान है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'जबरदस्त योगदान है.'
'उस समय मैं सिर्फ पिता नहीं था'
संजीव सूर्यवंशी ने बताया कि क्रिकेट के मामले में उन्होंने बेटे के साथ कभी ढील नहीं बरती. उन्होंने कहा, 'पहले हम उसके लिए सिर्फ पापा नहीं थे. अगर कोई गलती करता था तो डांटते थे, समझाते थे और सुधारने की कोशिश करते थे. हमारा मकसद उसे बेहतर खिलाड़ी बनाना था.'
यही सख्ती आज उनके लिए गर्व की वजह बन गई है. जिस बेटे को कभी अनुशासन सिखाने के लिए डांटना पड़ता था, वही अब टीम इंडिया की जर्सी पहनने की दहलीज पर खड़ा है.
संजीव सूर्यवंशी ने बताया कि वह वैभव का हौसला बढ़ाने के लिए आगे भी स्टेडियम में मौजूद रहेंगे. उन्होंने कहा कि वह 9 जून का मैच देखने श्रीलंका जाएंगे और आने वाले दिनों में भी उनका कार्यक्रम टीम के मुकाबलों को करीब से देखने का है.
इतनी भीड़ उमड़ पड़ी कि...
संजीव सूर्यवंशी ने बताया कि वैभव की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि जब आईपीएल खेलकर दो दिन के लिए घर आया था, तब उसे देखने और मिलने वालों की इतनी भीड़ उमड़ पड़ी कि पूरा परिवार व्यस्त हो गया. संजीव के मुताबिक, लोगों की भारी संख्या के कारण व्यवस्थाएं संभालना भी मुश्किल हो गया था, लेकिन यह देखकर खुशी होती है कि वैभव को इतना प्यार और समर्थन मिल रहा है.
'जो बेटा नहीं कर पाया, वह पोते ने कर दिखाया'
वैभव सूर्यवंशी की दादी ने बेटे संजीव सूर्यवंशी के संघर्ष और समर्पण को याद करते हुए कहा कि आज परिवार की खुशी का सबसे बड़ा कारण वही हैं. उन्होंने भावुक होकर कहा कि संजीव खुद क्रिकेट में बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने अपने सपने को बेटे वैभव के जरिए पूरा किया. दादी ने कहा, 'जो मेरा बेटा नहीं कर पाया, वह मेरे पोते ने कर दिखाया.' उनके मुताबिक, संजीव ने वैभव को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया और उसी मेहनत का नतीजा है कि आज पूरा परिवार इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है.
अब इतिहास रचने की बारी
वैभव सूर्यवंशी 9 से 21 जून तक श्रीलंका में इंडिया-ए की ओर से त्रिकोणीय सीरीज खेलेंगे. इसके बाद भारत को आयरलैंड और इंग्लैंड का दौरा करना है. अगर उन्हें इन दौरों में पदार्पण का मौका मिलता है तो वह 16 साल की उम्र से पहले भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन सकते हैं.
फिलहाल पूरा बिहार और भारतीय क्रिकेट जगत इस युवा बल्लेबाज के अगले कदम का इंतजार कर रहा है. वहीं पिता संजीव सूर्यवंशी को भरोसा है कि बेटे की मेहनत अभी और रंग लाएगी.
उनके शब्दों में, 'भगवान का आशीर्वाद रहा तो वह और अच्छा खेलेगा, देश को बहुत सारी जीत दिलाएगा.'
जहांगीर आलम