IPL 2026 में अगर किसी टीम की कहानी सबसे ज्यादा हैरान करने वाली रही, तो वह पंजाब किंग्स (PBKS) की है. एक वक्त ऐसा था जब टीम लगातार 7 मैचों तक अजेय रही थी. अंक तालिका में दबदबा था, खिलाड़ी फॉर्म में थे और प्लेऑफ का टिकट लगभग पक्का माना जा रहा था... लेकिन सीजन खत्म होते-होते वही पंजाब किंग्स प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो गई.
क्रिकेट में उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन 7 मैच तक नहीं हारने वाली टीम का प्लेऑफ तक नहीं पहुंचना असाधारण है. सवाल यही है कि आखिर पंजाब किंग्स के साथ ऐसा क्या हुआ?
सबसे बड़ी वजह रही टीम संयोजन के साथ लगातार छेड़छाड़. शुरुआती 6-7 मुकाबलों में पंजाब ने लगभग एक जैसी प्लेइंग इलेवन के साथ खेला. खिलाड़ियों को स्पष्ट भूमिकाएं मिली हुई थीं और टीम का संतुलन शानदार दिख रहा था. लेकिन जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ा, पंजाब ने लगातार बदलाव करने शुरू कर दिए. शुरुआती स्थिरता की जगह अगले 7 मैचों में 15 बदलाव देखने को मिले. नतीजा यह हुआ कि टीम अपनी लय खो बैठी.
दूसरा बड़ा कारण कप्तान श्रेयस अय्यर की फॉर्म रही शुरुआती 7 मुकाबलों में श्रेयस पंजाब की सफलता के सबसे बड़े नायक थे. उनका स्ट्राइक रेट 186 के करीब था और उन्होंने 279 रन बनाए थे. लेकिन इसके बाद उनका बल्ला खामोश हो गया. अगले 6 मैचों में वह सिर्फ 118 रन ही बना सके और स्ट्राइक रेट भी गिरकर 126 के आसपास पहुंच गया. जब कप्तान ही टीम को आगे से राह नहीं दिखा पाया, तो उसका असर पूरे बल्लेबाजी क्रम पर दिखाई दिया.
पंजाब की धमाकेदार शुरुआतों का एक बड़ा कारण उसकी ओपनिंग जोड़ी थी. प्रियांश आर्य और प्रभसिमरन सिंह ने शुरुआती मुकाबलों में विपक्षी गेंदबाजों की जमकर धुनाई की. पहले सात मैचों में ओपनिंग जोड़ी ने 323 रन जोड़े, औसत 54 से ज्यादा रहा और रन बनाने की रफ्तार भी बेहद तेज थी. लेकिन बाद के 6 मैचों में यही जोड़ी सिर्फ 172 रन जोड़ सकी. औसत 23 तक गिर गया और आक्रामकता भी कम हो गई. पावरप्ले में मिलने वाली बढ़त अचानक गायब हो गई.
गेंदबाजी में भी पंजाब ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी. युजवेंद्र चहल जैसे अनुभवी स्पिनर का उपयोग उम्मीद के मुताबिक नहीं किया गया. पहली बार किसी IPL सीजन में ऐसा देखने को मिला जब चहल ने औसतन तीन ओवर प्रति मैच भी पूरे नहीं किए. कई मैचों में उन्हें चार ओवर का कोटा नहीं दिया गया, जबकि एक मुकाबले में तो उन्होंने एक भी गेंद नहीं फेंकी. यह फैसला आज भी सवालों के घेरे में है.
दूसरी ओर अर्शदीप सिंह का प्रदर्शन भी पंजाब के लिए चिंता का विषय रहा. डेथ ओवरों में वह महंगे साबित हुए और कई मौकों पर मैच का रुख विपक्ष के पक्ष में चला गया. जिस गेंदबाजी आक्रमण को पंजाब की ताकत माना जा रहा था, वही सीजन के निर्णायक चरण में कमजोर कड़ी बन गया.
किस्मत ने भी पूरा साथ नहीं निभाया...
पंजाब किंग्स की किस्मत ने भी उनका पूरा साथ नहीं दिया. 6 अप्रैल को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में KKR के खिलाफ मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया था. मैच में सिर्फ 3.4 ओवर का खेल हो पाया और दोनों टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ा. उस वक्त यह एक सामान्य नतीजा लगा, लेकिन सीजन के अंत में यही अतिरिक्त अंक पंजाब के लिए भारी पड़ गया. अगर उस दिन पूरा मुकाबला होता और पंजाब अपनी शुरुआती फॉर्म के दम पर जीत हासिल कर लेती, तो उसके खाते में दो अंक और होते और प्लेऑफ का गणित पूरी तरह बदल सकता था. बारिश ने सिर्फ एक मैच नहीं धोया, बल्कि पंजाब के प्लेऑफ सपनों पर भी पानी फेर दिया.
पंजाब किंग्स की कहानी इस सीजन में एक बड़ी सीख भी छोड़ती है. लगातार जीत के दौरान टीम ने जो पहचान बनाई थी, वह स्थिरता, स्पष्ट रणनीति और खिलाड़ियों पर भरोसे की वजह से बनी थी. लेकिन जैसे ही यह संतुलन बिगड़ा, नतीजे भी बदल गए.
एक समय ऐसा लग रहा था कि पंजाब की पतंग सबसे ऊंची उड़ रही है. लेकिन डोर पर बार-बार किए गए प्रयोगों ने आखिरकार उसे काट दिया. अब फ्रेंचाइजी के पास पूरे सीजन का आत्ममंथन करने का मौका है, क्योंकि IPL 2026 में पंजाब किंग्स सिर्फ प्लेऑफ की दौड़ नहीं हारी, बल्कि उसने एक सुनहरा मौका भी गंवा दिया.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क