अजीत वाडेकर की कप्तानी का कमाल... जब विदेशी धरती पर भारत को दिलाई ऐतिहासिक जीत

अजीत लक्ष्मण वाडेकर भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में से एक थे, जिन्होंने विदेशी धरती पर भारत को जीत के यादगार पल दिए. 1970-71 में वेस्टइंडीज में भारत की पहली टेस्ट जीत और 1-0 से सीरीज जीत, 1971 में इंग्लैंड दौरे पर पहली जीत और 1972-73 में इंग्लैंड में 2-1 से टेस्ट सीरीज जीत, वाडेकर की कप्तानी की ऐतिहासिक उपलब्धियां हैं.

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अजीत वाडेकर ने विदेशी धरती पर धाक जमाई. (File Photo- X/@ICC) अजीत वाडेकर ने विदेशी धरती पर धाक जमाई. (File Photo- X/@ICC)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:30 AM IST

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में जब भी सफलतम कप्तानों का जिक्र होता है तो विराट कोहली, सौरव गांगुली, महेंद्र सिंह धोनी, मोहम्मद अजहरुद्दीन, कपिल देव जैसे दिग्गजों का नाम सबसे पहले आता है. मगर एक ऐसा कप्तान भी हुआ, जिसने विदेशी मैदानों पर भारत के लिए यादगार लम्हे रचे.

जी हां! बात हो रही है अजीत लक्ष्मण वाडेकर की. आज (बुधवार) उनकी 85वी जयंती है. अजीत वाडेकर का जन्म 1 अप्रैल 1941 को मुंबई (तत्कालीन बंबई) में हुआ था. 2018 में 77 साल की उम्र में वाडेकर दुनिया को अलविदा कह गए. कप्तान के तौर पर वाडेकर का रिकॉर्ड उल्लेखनीय है.

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अजीत वाडेकर ऐसे पहले भारतीय कप्तान थे, जिनकी कप्तानी में भारत ने लगातार तीन टेस्ट सीरीज जीत हासिल की. उनकी कप्तानी में भारत ने 1971 में वेस्टइंडीज को 1-0 (5) और इंग्लैंड को 1-0 (3) से हराया. इसके बाद 1972-73 में वाडेकर की कप्तानी में भारत ने अपने घर पर भी इंग्लैंड को 2-1(5) से मात दी.

यानी वाडेकर की कप्तानी में भारत ने अंग्रेजों से 'दोहरा लगान' वसूला. देखा जाए तो वाडेकर ऐसे पहले कप्तान थे, जिनकी कप्तानी में भारत ने वेस्टइंडीज और इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीत हासिल की.

विंडीज की धरती पर पहली जीत

1971 के फरवरी और अप्रैल के दौरान भारत ने वेस्टइंडीज में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली. इस सीरीज में वाडेकर की कप्तानी में भारत ने पोर्ट ऑफ स्पेन टेस्ट (सीरीज का दूसरा टेस्ट 6-10 मार्च) 7 विकेट से जीता, जो विंडीज की धरती पर पहली टेस्ट जीत थी. भारत ने चार टेस्ट ड्रॉ करा सीरीज की समाप्ति 1-0 से जीत के साथ की. यह वेस्टइंडीज में भारत की पहली सीरीज जीत रही.

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- सुनील गावस्कर का स्वर्णिम आगाज

1970-71 में भारत ने वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीम को उसके घर में न केवल पहली बार हराया, बल्कि कैरेबियाई धरती पर पहली बार टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रच दिया. इस यादगार सीरीज में एक और नायक उभरा. वे रहे सुनील गावस्कर.

गावस्कर ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत धमाकेदार तरीके से की. उन्होंने इस पांच मैचों की सीरीज के चार टेस्ट मैचों में खेलकर कुल 774 रन बनाए, जिसमें दोहरा शतक, चार शतक और तीन अर्धशतक शामिल थे. यह प्रदर्शन आज भी डेब्यू करते हुए पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में सर्वाधिक रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड है.

इंग्लैंड को उसके घर में पहली बार हराया

1971 के जुलाई और अगस्त के दौरान भारत ने इंग्लैंड में तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेली. वाडेकर की कप्तानी में इस सीरीज का आखिरी स्ट (ओवल, 19-24 अगस्त) भारत ने 4 विकेट से जीता. यह इंग्लैंड की धरती पर भारत की पहली टेस्ट जीत थी. इसके साथ ही भारत ने सीरीज की समाप्ति 1-0 से जीत के साथ की. यह इंग्लैंड में भारत की पहली सीरीज जीत रही.

चंद्रा-राघवन-बेदी की फिरकी का जादू सीरीज में लॉ‌र्ड्स और ओल्ड ट्रेफर्ड में खेले गए शुरुआती दोनों टेस्ट ड्रॉ रहे, लेकिन ओवल टेस्ट में भारतीय टीम ने पहली पारी में 71 रनों से पिछड़ने के बावजूद मेजबान टीम को चार विकेट से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की.

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दूसरी पारी में भारत ने भगवत चंद्रशेखर के छह विकेटों की मदद से इंग्लैंड को महज 101 रनों पर ढेर कर दिया. सीरीज में भारत की ओर से कप्तान अजीत वाडेकर ने सबसे ज्यादा 204 रन बनाए, जबकि चंद्रशेखर, एस. वेंकटराघवन और बिशन सिंह बेदी की स्पिन तिकड़ी ने क्रमशः 13, 13 और 11 विकेट चटकाए.

वाडेकर FACTS -

- वाडेकर न्यूजीलैंड (1967/68), वेस्टइंडीज (1970/71) और इंग्लैंड (1971) की धरती पर पहली टेस्ट जीत में भारतीय टीम में रहे. वेस्टइंडीज और इंग्लैंड में तो वह भारत के कप्तान थे, जबकि न्यूजीलैंड में नवाब पटौदी ने कप्तानी की थी.

- वाडेकर 1992 से 1996 तक भारतीय टीम के मैनेजर (कोच) रहे. इस दौरान अजहरुद्दीन की कप्तानी में भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ 3-0 से सीरीज जीत के साथ लगातार 14 टेस्ट मैचों में अविजित रहने का उल्लेखनीय प्रदर्शन किया.

- वाडेकर ने 37 टेस्ट मैचो में 31.07 की औसत से 2,113 रन बनाए, जिसमें एक शतक के अलावा उनके 14 अर्धशतक भी शामिल हैं. वाडेकर ने दो वनडे इंटरनेशनल में 73 रन बनाए.

- उन्होंने 237 प्रथम श्रेणी मैचों में 47.03 की औसत से 15380 रन बनाए. उनके बल्ले से 36 शतक और 84 अर्धशतक निकले. उन्होंने 1966-67 के रणजी ट्रॉफी मैच में 323 का सर्वश्रेष्ठ स्कोर मैसूर के विरुद्ध बनाया था.

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- भारत सरकार ने 1967 से वाडेकर को अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया. इसके बाद 1972 में उन्हें पद्मश्री अलंकरण से भी विभूषित किया गया.
 

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