भारत-बांग्लादेश सीमा का करीब 600 किलोमीटर हिस्सा सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है. भौगोलिक कठिनाइयों, अधूरी बाड़बंदी और सीमित संचार सुविधाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में निगरानी जटिल हो जाती है. सुरक्षा बल लगातार आधुनिक तकनीकों और गश्त के जरिए निगरानी मजबूत कर रहे हैं. सीमा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी संसाधनों और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है.