न पाक के आतंकी छिपेंगे, न चीन की चाल... आज ISRO लॉन्च करेगा 'दिव्य दृष्टि' वाला सैटेलाइट

PSLV C62 Mission Launch: कल 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे ISRO श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट लॉन्च करेगा. मुख्य पेलोड DRDO का EOS-N1 (अन्वेषा) हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जो सीमा निगरानी, छिपे लक्ष्यों की पहचान और पर्यावरण मॉनिटरिंग में क्रांति लाएगा. साथ में 18 सह-यात्री सैटेलाइट्स भी जाएंगे. यह 2025 की असफलता के बाद PSLV का महत्वपूर्ण कमबैक है.

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श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर पर लॉन्च के लिए तैयार खड़ा है PSLV रॉकेट. (Photo: ISRO) श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर पर लॉन्च के लिए तैयार खड़ा है PSLV रॉकेट. (Photo: ISRO)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:51 AM IST

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन- इसरो (ISRO) 2026 की अपनी पहली लॉन्चिंग के साथ एक नया इतिहास रचने जा रहा है. आज यानी 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे IST पर सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 रॉकेट लॉन्च किया जाएगा. 

इस मिशन का मुख्य पेलोड DRDO द्वारा विकसित EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट है, जिसे 'दिव्य दृष्टि' या हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट के रूप में जाना जाता है. यह सैटेलाइट न केवल पर्यावरण निगरानी में क्रांति लाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी भारत की क्षमताओं को मजबूत करेगा. इससे पाकिस्तान के आतंकवादियों की छिपने की कोशिशें और चीन की सीमा पर चालें बेनकाब हो सकेंगी.

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इस मिशन में EOS-N1 के अलावा 14 अन्य सह-यात्री सैटेलाइट्स भी शामिल हैं, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के सैटेलाइट्स हैं. ये न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के जरिए लॉन्च किए जा रहे हैं. आइए इस मिशन की पूरी डिटेल और उसके फायदे जानते हैं. 

क्या है ये मिशन?

PSLV-C62 PSLV रॉकेट की 64वीं लॉन्च है. PSLV-DL वैरिएंट की 5वीं उड़ान. यह मिशन सन सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में सैटेलाइट्स को तैनात करेगा, जहां EOS-N1 और अन्य 14 सैटेलाइट्स रखे जाएंगे. एक KID कैप्सूल को री-एंट्री ट्रैजेक्टरी में भेजा जाएगा.

लॉन्च का लाइव स्ट्रीम ISRO के यूट्यूब चैनल पर सुबह 9:48 बजे से शुरू होगा. ISRO चेयरमैन वी. नारायणन ने लॉन्च से पहले तिरुपति मंदिर में पूजा-अर्चना की, जो उनकी परंपरा का हिस्सा है. यह मिशन ISRO के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले साल मई में PSLV की असफलता के बाद यह कमबैक मिशन है. काउंटडाउन 11 जनवरी को दोपहर 12:18 बजे शुरू हो चुका है, जो 22.5 घंटे का है.

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PSLV रॉकेट की फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस

पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) ISRO का सबसे विश्वसनीय रॉकेट है, जो मल्टीपल सैटेलाइट्स को विभिन्न ऑर्बिट्स में लॉन्च करने में सक्षम है. यह चार स्टेज वाला रॉकेट है, जो सॉलिड और लिक्विड फ्यूल का कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करता है. PSLV-C62 PSLV-DL वैरिएंट है, जिसमें दो स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स हैं.

  • ऊंचाई: 44.4 मीटर
  • डायमीटर: 2.8 मीटर
  • लिफ्ट-ऑफ मास: 260 टन (इस वैरिएंट के लिए; सामान्य PSLV में 320 टन)
  • स्टेजेस: 4 (पहला स्टेज: S139 सॉलिड रॉकेट मोटर + 2 स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स; दूसरा स्टेज: लिक्विड फ्यूल वाला PS2; तीसरा स्टेज: सॉलिड फ्यूल वाला; चौथा स्टेज: लिक्विड फ्यूल वाला PS4)
  • थ्रस्ट: लिफ्ट-ऑफ थ्रस्ट 5867 किलोन्यूटन
  • पेलोड कैपेसिटी: SSO में 1750 किलोग्राम तक; मल्टीपल ऑर्बिट कैपेबिलिटी
  • फीचर्स: मल्टीपल सैटेलाइट लॉन्च क्षमता, हाई रिलायबिलिटी (95% सक्सेस रेट), कम लागत (प्रति किलो लॉन्च कॉस्ट करीब $5000-7000), स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स के साथ वैरिएंट्स (CA, DL, QL, XL).

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रॉकेट के फायदे

PSLV ने भारत को ग्लोबल स्पेस मार्केट में मजबूत बनाया है. यह कॉमर्शियल लॉन्चेस के लिए आदर्श है, जैसे इस मिशन में 15 सैटेलाइट्स. 

  • पर्यावरण-अनुकूल: लिक्विड फ्यूल स्टेजेस क्लीन बर्निंग सुनिश्चित करते हैं.
  • रक्षा और सिविलियन दोनों मिशन्स के लिए उपयोगी, जैसे रिमोट सेंसिंग और नेविगेशन.
  • ISRO की आत्मनिर्भरता का प्रतीक: 1993 से अब तक 60+ सफल लॉन्चेस.

मुख्य सैटेलाइट: EOS-N1 (अन्वेषा)

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EOS-N1, जिसे अन्वेषा के नाम से भी जाना जाता है. DRDO द्वारा विकसित हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है. यह 2020 में प्लान किया गया था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण देरी हुई.

  • ऑर्बिट: 600 किलोमीटर ऊंचाई पर सन सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO)
  • इमेजिंग टेक्नोलॉजी: हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग - सैकड़ों स्पेक्ट्रल बैंड्स (मानव आंख या सामान्य कैमरों से परे) में डेटा कैप्चर करता है.
  • वजन: करीब 150-200 किलोग्राम (माइक्रो-सैटेलाइट कैटेगरी).
  • पेलोड: एडवांस्ड हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर्स, जो नैरो स्पेक्ट्रल बैंड्स में डेटा कैप्चर करते हैं.
  • लाइफटाइम: 5-7 साल
  • अन्य फीचर्स: AI-इनेबल्ड डेटा प्रोसेसिंग, हाई-रेजोल्यूशन स्पेक्ट्रल एनालिसिस.

अन्वेषा के फायदे

रक्षा क्षेत्र: हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग से सामग्रियों की सटीक पहचान संभव, जैसे छिपे हुए टारगेट्स, वनस्पति के नीचे छिपे वाहन या हथियार. इससे पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और चीन की सीमा गतिविधियों की निगरानी आसान. कोई नहीं छिप सकेगा क्योंकि यह सामान्य इमेजिंग से ज्यादा डिटेल्ड तस्वीर है.

पर्यावरण निगरानी: फसल स्वास्थ्य, जल प्रदूषण, जंगल की आग, मिट्टी की गुणवत्ता का विश्लेषण. जलवायु परिवर्तन स्टडीज में उपयोगी.

क्षमता निर्माण: भारत की स्पेस डिफेंस को बूस्ट, DRDO-ISRO सहयोग का उदाहरण.

सिवलियन लाभ: कृषि, डिजास्टर मैनेजमेंट, रिसोर्स मैपिंग में क्रांति.

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साथ के सैटेलाइट्स

इस मिशन में 14 अन्य सैटेलाइट्स हैं, जिनमें भारतीय और अंतरराष्ट्रीय शामिल हैं. कुछ प्रमुख...

LACHIT-1 (Assam Don Bosco University)

  • फीचर्स: नॉर्थईस्ट का पहला सैटेलाइट, 3U क्यूबसैट, स्टोर-एंड-फॉरवर्ड कम्युनिकेशन सिस्टम.
  • वजन: 4.1 किलोग्राम, आकार: 34x10x10 सेमी.
  • स्पेसिफिकेशंस: Dhruva Space के Polar Access-1 प्रोग्राम के तहत विकसित, 50+ छात्रों और फैकल्टी का योगदान.
  • फायदे: नॉर्थईस्ट में स्पेस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा, कम्युनिकेशन इनोवेशन, विज्ञान शिक्षा. नाम लाचित बरफुकन के सम्मान में.

MOI-1 (MIRA ऑर्बिटल इमेजर-1)

इमेजिंग पेलोड Eon Space Labs द्वारा, AI स्मार्ट्स tm2space द्वारा. स्पेस टेलीस्कोप के साथ. अर्थ ऑब्जर्वेशन के लिए, हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग. पर्यावरण मॉनिटरिंग, AI-बेस्ड डेटा एनालिसिस से तेज निर्णय. स्पेस स्टार्टअप्स को बूस्ट.

Aayulsat

अर्थ ऑब्जर्वेशन पेलोड, संभवतः हेल्थ मॉनिटरिंग या एनवायरनमेंटल. छोटा सैटेलाइट, डिटेल्स सीमित हैं. कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में डेटा प्रदान.

Orbital Temple

कल्चरल या एजुकेशनल सैटेलाइट, स्पेस में 'टेम्पल' थीम. माइक्रो-सैटेलाइट. स्पेस एजुकेशन और कल्चरल प्रोमोशन.

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नेपाल का सैटेलाइट

अर्थ ऑब्जर्वेशन पेलोड. पर्यावरण मॉनिटरिंग के लिए. नेपाल की स्पेस क्षमता निर्माण, पर्यावरण स्टडीज में सहयोग.

अन्य 10 सैटेलाइट्स में घरेलू स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटीज और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के शामिल हैं, जैसे कम्युनिकेशन, टेस्टिंग और री-एंट्री कैप्सूल (KID). ये ऑन-ऑर्बिट रिफ्यूलिंग टेस्ट और स्मॉल सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के लिए हैं.

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सामूहिक फायदे: ये सैटेलाइट्स स्पेस इकोनॉमी को बढ़ावा देंगे, जॉब्स क्रिएट करेंगे और भारत को ग्लोबल स्पेस लीडर बनाएंगे.

PSLV-C62 मिशन भारत की स्पेस महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है. अन्वेषा सैटेलाइट से रक्षा मजबूत होगी, जबकि सह-यात्री सैटेलाइट्स इनोवेशन को बढ़ावा देंगे. ISRO की यह सफलता 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक कदम है. 

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