लद्दाख के सबसे ऊंचे गांव चुशुल में शुरू हुआ ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट, होगा ये फायदा

लद्दाख के चुशुल में दुनिया की सबसे ऊंची ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है. NTPC के सहयोग से बना यह प्रोजेक्ट सैनिकों को 24 घंटे स्वच्छ बिजली देगा. डीजल पर निर्भरता कम करेगा. सालाना 1500 टन कार्बन उत्सर्जन घटाएगा. भारतीय सेना की सस्टेनेबिलिटी, मजबूती और आत्मनिर्भरता की प्रतिबद्धता का प्रतीक है.

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चुशुल में बने ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट. (Photo:X/ADGPI) चुशुल में बने ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट. (Photo:X/ADGPI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:52 PM IST

भारतीय सेना ने पर्यावरण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान रचा है. लद्दाख के चुशुल में दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है. यह प्रोजेक्ट भारत के पहले गांवों (सीमावर्ती क्षेत्रों) को स्वच्छ ऊर्जा देने की दिशा में सेना का महत्वपूर्ण कदम है. यह प्रोजेक्ट NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) के सहयोग से बनाया गया है.

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चुशुल ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट क्या है?

चुशुल लद्दाख में समुद्र तल से 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है – यह दुनिया का सबसे ऊंचा ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट है. इसकी मुख्य विशेषताएं...

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  • ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन: सोलर पैनल्स से बिजली बनाकर पानी से हाइड्रोजन गैस निकाली जाएगी.
  • माइक्रोग्रिड: यह छोटा पावर ग्रिड है जो 24 घंटे सैनिकों को स्वच्छ बिजली देगा.
  • फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम: पहले डीजल जनरेटर चलते थे, अब हाइड्रोजन से बिजली बनेगी.
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी: हर साल 1500 टन CO₂ उत्सर्जन कम होगा.
  • कठिन परिस्थितियों में काम: -40 डिग्री ठंड, तेज हवाएं और ऑक्सीजन की कमी में भी यह सिस्टम काम करेगा.

यह प्रोजेक्ट सेना की सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊ विकास), रेजिलिएंस (मजबूती) और सेल्फ-रिलायंस (आत्मनिर्भरता) की प्रतिबद्धता को दिखाता है.

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क्यों बनाया गया यह प्रोजेक्ट?

लद्दाख में सीमा पर तैनात सैनिकों को बिजली की जरूरत लगातार रहती है. पहले डीजल से चलने वाले जनरेटर इस्तेमाल होते थे, जो... महंगे ईंधन पर निर्भर थे. प्रदूषण फैलाते थे. लॉजिस्टिक्स में मुश्किलें पैदा करते थे (ईंधन ट्रकों से लाना).

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अब ग्रीन हाइड्रोजन से...

बिजली साफ होगी. ईंधन की जरूरत कम होगी. पर्यावरण संरक्षण होगा. सेना का खर्च भी घटेगा.

प्रोजेक्ट का महत्व

  • सैनिकों के लिए: 24 घंटे बिजली से जीवन आसान होगा.
  • राष्ट्रीय स्तर पर: ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा, जो भारत का बड़ा लक्ष्य है (2030 तक 5 मिलियन टन हाइड्रोजन उत्पादन).
  • सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए: यह भारत के पहले गांवों (सीमावर्ती गांवों) को स्वच्छ ऊर्जा देने का मॉडल बनेगा.
  • वैश्विक संदेश: दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट – यह भारत की तकनीकी ताकत दिखाता.
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