समंदर में बारूदी सुरंग हटाने का काम कैसे होता है? ईरान ने बिछाया, हटा पाएगा अमेरिका

समंदर और जमीन पर बारूदी सुरंग हटाने का प्रोसेस बेहद खतरनाक और टेक्निकल है. समंदर में सोनार, अंडरवाटर ड्रोन और स्वीपिंग केबल से माइन्स को काटा या फोड़ा जाता है. जमीन पर मेटल डिटेक्टर, रोबोट और मैनुअल तरीके से काम होता है. होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका LCS जहाजों, ड्रोनों और हेलिकॉप्टर से माइन क्लियरेंस चलाएगा. जापान से आने वाले एवेंजर क्लास माइन्सस्वीपर मदद कर सकते हैं.

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समुद्री बारूदी सुरंग को नष्ट करने की यह तस्वीर पुरानी है. एक माइन गोताखोर डमी समुद्री बारूदी सुंरग पर विस्फोटक लगाता हुआ. यह एक नौसैनिक अभ्यास का हिस्सा है. (Photo: Reuters) समुद्री बारूदी सुरंग को नष्ट करने की यह तस्वीर पुरानी है. एक माइन गोताखोर डमी समुद्री बारूदी सुंरग पर विस्फोटक लगाता हुआ. यह एक नौसैनिक अभ्यास का हिस्सा है. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का काम अमेरिकी नौसेना ने शुरू कर दिया है. दो अमेरिकी डेस्ट्रॉयर USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी ने 11 अप्रैल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया और खदानें साफ करने की तैयारी शुरू की. लेकिन बारूदी सुरंग हटाना आसान काम नहीं है. यह बहुत खतरनाक, धीमा और आधुनिक तकनीक वाला काम है. 

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समंदर में बारूदी सुरंग क्या होती है, माइन्स स्वीपिंग का पूरा प्रोसेस

समंदर में बारूदी सुरंग दो मुख्य प्रकार की होती हैं. एक मोर्ड माइन्स जो समुद्र तल से तार या केबल से बंधी रहती हैं और पानी की सतह के पास फंस जाती हैं. दूसरी बॉटम माइन्स जो तल पर पड़ी रहती हैं और जहाज के चुंबकीय क्षेत्र, आवाज या पानी के दबाव से फट जाती हैं. इनको हटाने के लिए माइन्स स्वीपिंग दो तरीकों से होती है.

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पहला मैकेनिकल स्वीपिंग यानी काटने वाला तरीका. इसमें माइन्सवीपर जहाज खास तार या केबल खींचते हैं जो माइन्स के बंधे तार को काट देते हैं. कटने के बाद माइन ऊपर तैरकर आ जाती है फिर उसे गोली मारकर या छोटे विस्फोटक से सुरक्षित तरीके से उड़ाया जाता है. 

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दूसरा तरीका इन्फ्लुएंस स्वीपिंग यानी धोखा देने वाला तरीका. इसमें जहाज या ड्रोन खास उपकरण खींचते हैं जो असली जहाज जैसी चुंबकीय, आवाज या दबाव की लहर पैदा करते हैं. इससे माइन को लगता है कि जहाज आ रहा है और वह खुद फट जाती है. यह तरीका ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि असली जहाज दूर रहता है.

पूरी प्रक्रिया में हाई-रेजोल्यूशन सोनार का इस्तेमाल होता है जो समुद्र तल की तस्वीर बनाता है. ऑपरेटर गोल या तार जैसी असामान्य चीज ढूंढते हैं. फिर रिमोट कंट्रोल वाले अंडरवाटर ड्रोन्स या रोबोट माइन की पुष्टि करते हैं और उसे नष्ट करते हैं.

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समंदर में माइन्स स्वीपिंग की आधुनिक तकनीक, यंत्र और साइंस

आज की माइन्स स्वीपिंग पूरी तरह विज्ञान पर आधारित है. माइन्सवीपर जहाज लकड़ी या फाइबरग्लास से बने होते हैं ताकि उनका चुंबकीय क्षेत्र बहुत कम हो और खुद माइन न फटे. अमेरिका के पास लिटोरल कॉम्बैट शिप्स यानी LCS होते हैं जो अनमैन्ड सर्फेस व्हीकल यानी बिना चालक वाले छोटे जहाज खींचते हैं. 

इनमें AN/AQS-20 सोनार लगा होता है जो साइड-स्कैन और वॉल्यूम सर्च करता है. हेलीकॉप्टर जैसे MH-60S सीहॉक लेजर सिस्टम से माइन ढूंढते हैं. आर्चरफिश नामक सिस्टम से उन्हें नष्ट करते हैं. अंडरवाटर ड्रोन्स जैसे नाइफफिश UUV तल पर दबी माइन्स को पहचानते और विस्फोटक लगाकर उड़ाते हैं. 

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साइंस के हिसाब से यह काम सोनार की ध्वनि तरंगों, चुंबकीय सिमुलेशन और रिमोट डेटोनेशन पर चलता है. पुराने समय में MH-53E सी ड्रैगन हेलीकॉप्टर इस्तेमाल होते थे लेकिन अब वे रिटायर हो चुके हैं. पूरी प्रक्रिया बहुत धीमी होती है क्योंकि हर माइन को ढूंढने, पहचानने और नष्ट करने में घंटों लग सकते हैं.

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जमीन पर बारूदी सुरंग कैसे हटाई जाती है?

जमीन पर माइन्स हटाना और भी मुश्किल और खतरनाक होता है क्योंकि माइन्स छोटी, छिपी और अलग-अलग प्रकार की होती हैं. सबसे आम तरीका मैनुअल डिमाइनिंग है. ट्रेंड डिमाइनर मेटल डिटेक्टर से माइन ढूंढते हैं फिर सावधानी से खोदकर निकालते हैं या कंट्रोल्ड ब्लास्ट से उड़ाते हैं.

मेटल डिटेक्टर धातु का पता लगाता है जबकि प्रोब यानी लंबी छड़ से जमीन चेक की जाती है. मैकेनिकल तरीके में खास मशीनें जैसे माइन फ्लेल, रोलर या एक्सकेवेटर इस्तेमाल होती हैं जो जमीन को पीटकर या दबाकर माइन्स फटवा देती हैं. कुछ जगहों पर कुत्ते या चूहे सूंघकर माइन ढूंढते हैं. 

आधुनिक समय में छोटे रोबोट और ड्रोन्स का भी इस्तेमाल बढ़ रहा है जो सुरक्षित दूरी से काम करते हैं. जमीन पर प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जाती है क्योंकि एक गलती से जान जा सकती है. पहले एरिया को सर्वे किया जाता है फिर स्ट्रिप बाई स्ट्रिप क्लियर किया जाता है.

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होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका माइन्स कैसे हटाएगा? 

अप्रैल 2026 में अमेरिका ने होर्मुज में माइन क्लियरेंस शुरू कर दिया है. पहले दो डेस्ट्रॉयर क्षेत्र को सुरक्षित बनाते हैं और सोनार से स्कैन करते हैं. असली काम अंडरवाटर ड्रोन्स, LCS जहाजों और हेलीकॉप्टरों से होगा. LCS जैसे USS कैनबेरा, सांता बारबरा और तुलसा में माइन काउंटरमेजर पैकेज लगा है. 

ये अनमैन्ड सिस्टम खींचते हैं जो सोनार से माइन ढूंढते और इन्फ्लुएंस स्वीप से फटाते हैं. पानी की गहराई, तेज धारा और गंदा पानी होर्मुज में बड़ी चुनौती है. अमेरिका ने पुराने एवेंजर क्लास माइन्सवीपर 2025 में बहरीन से हटा दिए थे इसलिए अब अनमैन्ड टेक्नोलॉजी पर ज्यादा भरोसा है. पूरी क्लियरेंस में कई हफ्ते लग सकते हैं क्योंकि हर माइन को एक-एक करके हैंडल करना पड़ता है.

जापान से आने वाले माइन्स स्वीपर जहाज क्या कर पाएंगे?

अमेरिका के पास अभी सिर्फ चार एवेंजर क्लास माइन्स स्वीपर बचे हैं जो जापान के सासेबो बेस में तैनात हैं. ये पुराने लेकिन स्पेशलाइज्ड जहाज हैं जो सोनार, ROV और स्वीपिंग गियर से अच्छा काम करते हैं. ये मोर्ड और बॉटम माइन्स दोनों को हैंडल कर सकते हैं. लेकिन इन्हें होर्मुज पहुंचने में कई दिन लगेंगे और पेंटागन ने अभी इन्हें भेजने का फैसला नहीं किया है. 

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फरवरी 2026 में अमेरिका और जापान ने संयुक्त माइन वारफेयर एक्सरसाइज की थी इसलिए सहयोग संभव है. ये जहाज मदद कर सकते हैं लेकिन अमेरिका मुख्य रूप से LCS और ड्रोन्स पर निर्भर है. अगर जापान के स्वीपर भेजे गए तो काम तेज हो सकता है लेकिन पूरी क्लियरेंस अब भी चुनौतीपूर्ण रहेगी.

होर्मुज में माइन्स साफ करना सिर्फ तकनीकी काम नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का मुद्दा है क्योंकि यहां से 20% तेल गुजरता है. अमेरिका की नई अनमैन्ड टेक्नोलॉजी अच्छी है लेकिन पुरानी क्षमता की कमी अभी भी दिख रही है.

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