हिमालय और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच है एक खास रिश्ता, दोनों के बनने की एक जैसी कहानी

हिमालय और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच एक रिश्ता है. वो ये कि दोनों एक ही घटना से बने. पश्चिम में संकरा समुद्री रास्ता और पूर्व में हिमालय. लाखों साल पहले गायब हुए टीथिस सागर से दोनों का जन्म हुआ. टेक्टोनिक प्लेटों की टक्कर से सागर गायब हुआ. उसी समय एक जगह तेल मार्ग और दूसरी जगह दुनिया की सबसे ऊंचे पहाड़ बनाए.

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हिमालय और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच जन्म का संबंध है. इन्हें जन्म देने वाला एक ही सागर था. (Photo: ITG) हिमालय और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बीच जन्म का संबंध है. इन्हें जन्म देने वाला एक ही सागर था. (Photo: ITG)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:02 PM IST

दुनिया के सबसे व्यस्त तेल रूट पर स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इन दिनों खूब चर्चा में है. यहां तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है. पूरी दुनिया के तेल के दामों पर असर पड़ रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह संकरे समुद्री मार्ग अपने आप नहीं बनी है. 

यह लाखों साल पहले गायब हो चुके एक विशाल सागर का आखिरी निशान है. उसी सागर ने हिमालय पर्वत भी बनाया. दोनों जगहें हजारों किलोमीटर दूर हैं फिर भी उनका जन्म एक ही पुराने सागर से हुआ है. 

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लगभग 25 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर आज जैसी महाद्वीप नहीं थे. उत्तर में लौरेशिया और दक्षिण में गोंडवाना नामक दो बड़ी भूमियां थीं. इनके बीच फैला हुआ था टीथिस सागर. यह एक विशाल समुद्र था जो पूरी पृथ्वी को दो हिस्सों में बांटे हुए था. धीरे-धीरे पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स हिलने लगीं.

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अरेबियन प्लेट उत्तर की ओर बढ़ने लगी और यूरेशियन प्लेट से टकरा गई. इस टक्कर से टीथिस सागर का पानी दबने लगा. समुद्र का बड़ा हिस्सा धीरे-धीरे बंद हो गया. जहां पानी दबा वहां जमीन ऊपर उठी और पहाड़ बन गए.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज कैसे बना?

अरेबियन प्लेट के उत्तर की ओर धकेलने से टीथिस सागर का पश्चिमी हिस्सा सिकुड़ गया. इसकी वजह से आज का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया. यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ती है. इसी टक्कर ने ईरान में जाग्रोस पर्वत भी बनाए. 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज टीथिस सागर का आखिरी बचा हुआ हिस्सा है जो अब एक संकरी नाली की तरह दिखता है. लाखों साल की टेक्टोनिक गतिविधि ने पूरे समुद्र को इस छोटी जगह में समेट दिया. यही वजह है कि आज यहां से दुनिया का बहुत बड़ा तेल व्यापार गुजरता है.

हिमालय का जन्म भी उसी सागर से

अब हजारों किलोमीटर पूर्व की ओर चलें. हिमालय पर्वत भी उसी टीथिस सागर से बने हैं. करीब 5 से 4 करोड़ साल पहले भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराई. दोनों प्लेटें महाद्वीप थे इसलिए वे एक-दूसरे के नीचे नहीं धंसीं बल्कि आपस में सिकुड़ गईं. इस टक्कर में टीथिस सागर का समुद्री तल बीच में फंस गया.

समुद्र की मिट्टी, चूना पत्थर और समुद्री जीवों के अवशेष ऊपर उठते गए. परत दर परत दबने और मोड़ने से हिमालय पर्वत बन गए. आज भी एवरेस्ट की चोटी पर समुद्री जीवों के फॉसिल मिलते हैं. यानी एवरेस्ट की चोटी कभी समुद्र के तल पर थी.़

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दोनों जगहों का एक ही रहस्य

टीथिस सागर एक साथ नहीं गायब हुआ. यह धीरे-धीरे अलग-अलग इलाकों में बंद हुआ. पश्चिम में अरेबियन प्लेट की टक्कर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना. पूर्व में भारतीय प्लेट की टक्कर से हिमालय उठे. एक ही सागर के दो अलग परिणाम. एक जगह पर यह संकरी जलधारा बन गई जो आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है. दूसरी जगह पर यह दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखला बनी. दोनों जगहों पर टीथिस सागर की समुद्री मिट्टी आज भी मौजूद है.

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काहिरा से 100 किलोमीटर दक्षिण में वादी अल-हुतन में हवाओं से बनी मिट्टी की आकृतियां. यहां पर 400 से ज्यादा समुद्री जीवों के कंकाल और जीवाश्म पड़े हैं. ये जगह 25 करोड़ साल से 3.50 करोड़ साल के बीच टीथिस सागर के गायब होने से बनी. (Photo: AFP)

होर्मुज पर आज जो तनाव है वह भूगोल की उसी पुरानी कहानी का हिस्सा है. वहीं हिमालय रोज हमें याद दिलाते हैं कि समुद्र की गहराई से पहाड़ कैसे बन सकते हैं. वैज्ञानिक कहते हैं कि टीथिस सागर का पूरा बंद होना अब भी जारी है. भविष्य में भी पृथ्वी की प्लेट्स हिलती रहेंगी और नई भौगोलिक आकृतियां बनती रहेंगी.

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