एलन मस्क, स्पेसएक्स कंपनी के मालिक आज अंतरिक्ष में संकट के समय मदद करने वाले हीरो बन चुके हैं. जब दूसरे स्पेसक्राफ्ट फेल हो गए तब उनकी कंपनी ने कई बार नासा की मदद की है. सुनीता विलियम्स जैसे एस्ट्रोनॉट्स को बचाने से लेकर पहली मेडिकल इमरजेंसी में रेस्क्यू तक, स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल ने जान बचाई है.
आइए समझते हैं कैसे मस्क अंतरिक्ष के 'संकटमोचक' बने और ऐसे मिशन जो लोगों की जान बचाने में कामयाब रहे.
स्पेसएक्स की शुरुआत और नासा की मदद
एलन मस्क ने 2002 में स्पेसएक्स शुरू की. उनका सपना था सस्ते और दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट बनाना. 2011 में अमेरिका का स्पेस शटल प्रोग्राम बंद हो गया, तो नासा को रूसी रॉकेट पर निर्भर होना पड़ा. मस्क ने ड्रैगन कैप्सूल बनाया, जो 2020 से एस्ट्रोनॉट्स को आईएसएस (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) ले जाने लगा. इससे अमेरिका फिर से अंतरिक्ष में मजबूत हुआ. जब नासा के मिशन फंस गए, स्पेसएक्स ने रेस्क्यू किया.
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सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर का रेस्क्यू (2024-2025)
2024 में भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से स्पेस स्टेशन गए. यह 8 दिन का मिशन था, लेकिन स्टारलाइनर में थ्रस्टर और हीलियम लीक की समस्या आई. वे 9 महीने फंस गए. नासा ने फैसला किया कि स्टारलाइनर खाली लौटेगा.
स्पेसएक्स ने क्रू-9 मिशन भेजा, जो सितंबर 2024 में लॉन्च हुआ. इसमें सिर्फ 2 एस्ट्रोनॉट्स थे, ताकि सुनीता और बुच को जगह मिले. मार्च 2025 में वे सुरक्षित लौटे. अगर स्पेसएक्स नहीं होता, तो उन्हें रूसी सोयुज से लौटना पड़ता, जो महंगा और देरी वाला होता. स्पेसएक्स ने उनकी जान बचाई, क्योंकि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहना सेहत के लिए खतरनाक है.
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क्रू-11 और पहली मेडिकल इवैक्यूएशन (2025-2026)
अगस्त 2025 में स्पेसएक्स का क्रू-11 मिशन लॉन्च हुआ. इसमें नासा के जेना कार्डमैन, माइक फिन्के, जापान के किमिया यूई और रूस के ओलेग प्लाटोनोव थे. यह 6 महीने का मिशन था लेकिन जनवरी 2026 में एक एस्ट्रोनॉट को मेडिकल समस्या हुई. नासा ने पहली बार स्पेस स्टेशन से मेडिकल इवैक्यूएशन का फैसला किया.
क्रू-11 को एक महीना पहले लौटाया गया. 14 जनवरी 2026 को ड्रैगन कैप्सूल स्पेस स्टेशन से अलग हुआ और 15 जनवरी को कैलिफोर्निया के पास स्प्लैशडाउन हुआ. यह स्पेस स्टेशन के 25 साल के इतिहास में पहला मेडिकल रेस्क्यू था. स्पेसएक्स की वजह से तेज और सुरक्षित रेस्क्यू संभव हुआ, जो एस्ट्रोनॉट की जान बचा सकता था.
अन्य मिशन जहां स्पेसएक्स ने जान बचाई
स्पेसएक्स ने अपोलो 13 जैसे पुराने रेस्क्यू से सीखा और ड्रैगन को इमरजेंसी के लिए तैयार रखा. कोई सीधा 'जान बचाने' वाला मिशन नहीं, लेकिन जब नासा फंस गया, स्पेसएक्स ने मदद की.
नासा इन मिशनों को क्यों नहीं कर पाया
नासा खुद ये मिशन क्यों नहीं कर पाया? बोइंग का स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट, जो नासा ने बनवाया था, बार-बार फेल हुआ. इसमें तकनीकी खामियां, देरी और कॉस्ट ओवररन था. साथ ही, नासा की प्रशासनिक और सरकारी समस्याएं भी बड़ी वजह हैं.
बोइंग स्टारलाइनर की असफलता: तकनीकी और फाइनेंशियल कारण
2014 में नासा ने स्पेस शटल बंद होने के बाद नए क्रू स्पेसक्राफ्ट के लिए बोइंग और स्पेसएक्स को चुना. बोइंग को 4.2 अरब डॉलर मिले, स्पेसएक्स को 2.6 अरब. लक्ष्य 2017 तक उड़ान था, लेकिन बोइंग फेल हो गया.
तकनीकी समस्याएं: 2019 के पहले अनक्रूड टेस्ट में सॉफ्टवेयर बग से थ्रस्टर गलत समय पर फायर हुए, ऑर्बिट में नहीं पहुंचा. 2022 का दूसरे टेस्ट ठीक रहा. 2024 के क्रू टेस्ट में थ्रस्टर फेल, हीलियम लीक और ओवरहीटिंग हुई. थ्रस्टर वॉल्व में टेफ्लॉन सील डिफॉर्म हो गईं, जिससे प्रोपेलेंट फ्लो रुक गया. पैराशूट और फ्लेमेबल टेप की भी दिक्कतें थीं.
देरी के कारण: बोइंग ने इंजीनियरिंग की बजाय अकाउंटेंट्स और शेयरहोल्डर्स पर फोकस किया. फिक्स्ड-प्राइस कॉन्ट्रैक्ट में कॉस्ट कटिंग की, जिससे क्वालिटी घटी. बोइंग ने 1.6 अरब डॉलर अतिरिक्त खर्च किए, लेकिन देरी जारी रही.
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नासा का रोल: नासा ने बैकअप के लिए दोनों कंपनियां चुनीं, लेकिन बोइंग की असफलता से स्पेसएक्स पर निर्भर हो गए. स्टारलाइनर में समस्या आने पर नासा ने स्पेसएक्स के क्रू ड्रैगन का इस्तेमाल किया.
नासा की सामान्य देरी: प्रशासनिक और सरकारी वजहें
नासा के बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे आर्टेमिस, SLS और ओरियन में भी देरी और कॉस्ट ओवररन आम हैं. GAO रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तकनीकी चैलेंजेस, वर्कमैनशिप इश्यूज और रिस्की मैनेजमेंट डिसीजन वजह हैं.
प्रशासनिक कारण: नासा में 'ओवर ऑप्टिमिज्म' की संस्कृति है (Hubble Syndrome), जहां मैनेजर्स सोचते हैं कि देरी पर भी फंडिंग मिलेगी. रिस्क अंडरएस्टिमेट करते हैं. कॉस्ट और शेड्यूल बेसलाइन ठीक से नहीं बनाते. चेंजिंग रिक्वायरमेंट्स से कॉस्ट बढ़ता है.
सरकारी कारण: कांग्रेस से फंडिंग होती है. हर नई सरकार (एडमिनिस्ट्रेशन) की प्राथमिकताएं बदलती है, जैसे बुश से ओबामा में कॉन्स्टेलेशन प्रोग्राम कैंसल हुआ. बजट कट्स और गवर्नमेंट शटडाउन से देरी होती है. 2018-2019 शटडाउन से कई प्रोजेक्ट रुके.
फंडिंग इश्यूज: नासा का बजट कांग्रेस तय करती है, जो राजनीतिक है. फंडिंग गैप्स से प्रोजेक्ट्स रुकते हैं. प्राइवेट कंपनियां जैसे स्पेसएक्स फास्ट काम करती हैं क्योंकि उनके पास फ्लेक्सिबल फंडिंग है.
मस्क की सफलता: क्यों स्पेसएक्स आगे?
मस्क की स्पेसएक्स इंजीनियरिंग पर फोकस करती है, रीयूजेबल टेक्नोलॉजी से कॉस्ट कम हो जाती है. 2020 से क्रू ड्रैगन सफलतापूर्वक 10+ मिशन कर चुकी है. नासा की ब्यूरोक्रेसी और बोइंग की कॉरपोरेट कल्चर से वे फंस गए, जबकि मस्क रिस्क लेते हैं.
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नासा अब स्पेसएक्स पर निर्भर है, लेकिन भविष्य में बैकअप जरूरी है. बोइंग स्टारलाइनर को ठीक करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन देरी से अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम प्रभावित हो रहा है.
भविष्य की तैयारी
मस्क स्टारशिप बना रहे हैं, जो चंद्रमा और मंगल पर मिशन के लिए है. यह बड़े रेस्क्यू के लिए इस्तेमाल होगा. स्पेसएक्स स्टारलिंक से आपदा क्षेत्रों में इंटरनेट देता है, जैसे हरिकेन हेलेन में. न्यूरालिंक से दिमागी बीमारियां ठीक कर रहा है. मस्क की कंपनियां भविष्य के संकटों के लिए तैयार हैं.
ऋचीक मिश्रा