Earthquake: हिमाचल से नेपाल तक जमीन बनी कटोरा, यहां स्टोर Energy से दोगुने हुए भूकंप

पिछले साल भारत की जमीन 124 बार कांपी. 2020 से 2022 की तुलना में दोगुने भूकंप आए. नए साल की शुरूआत में पहला तगड़ा भूकंप पुंछ में आया. इसकी वजह हिमाचल से नेपाल तक जमीन में स्टोरी ऊर्जा और नेपाल में मौजूद अल्मोड़ा फॉल्ट की सक्रियता बताई जा रही है. नई रिपोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा...

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हिमालयन बेल्ट के आसपास भूकंपों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है. हिमालयन बेल्ट के आसपास भूकंपों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है.

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:00 PM IST

पहले अफगानिस्तान फिर पुंछ में 6.1 और 6.2 तीव्रता के भूकंप आए. उत्तर भारत के बड़े इलाके में झटके महसूस किए गए. पिछली साल भारत में 124 बार भूकंप के तगड़े झटके महसूस हुए. जिसकी वजह पश्चिम नेपाल की अल्मोड़ा फॉल्ट का एक्टिव होना बताया जा रहा है. 

कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक. हिमालय का 2500 km से लंबा इलाका. चौड़ाई 150 से 350 km तक. सिंधु घाटी के नंगा पर्वत से उत्तर-पूरिव के नामचा बरवा तक. आप हिमालय को ऊपर से देखें तो आपको दिखेगा कि यह पूरी बेल्ट भारत की तरफ लटकी हुई है. यानी कटोरे जैसा ढांचा.  

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ये वही हिमालय है जहां पर 8 km से ऊंची दुनिया की 14 चोटियों में से 10 मौजूद हैं. साथ ही दुनिया के सबसे ऊंचे इलाकों वाला हिमालय तब बना था, जब भारतीय प्लेट की टक्कर यूरेशियन प्लेट से हुई. पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत यानी क्रस्ट के सिकुड़ने से हिमालय के पहाड़ बने. विभिन्न स्थानों पर इनकी मोटाई अलग-अलग है. 

जमीन के अंदर बन चुका है कटोरा, यहीं स्टोर हो रही है ऊर्जा

अगर हिमालय के उत्तर-पश्चिम की तरफ देखें तो हिंदूकुश, पामीर और नंगा पर्वत इलाके में क्रस्ट की मोटाई 75 km है. जबकि जम्मू और कश्मीर में 60 km है. हिमाचल प्रदेश में मात्र 51 km है. जबकि ऊंचे हिमालय और तिब्बत की तरफ क्रस्ट वापस 75 km गहरा है. यानी हिमाचल के बाद से नेपाल तक क्रस्ट के अंदर कटोरे जैसी आकृति बनी है, जहां ऊर्जा स्टोर हो रही है. 

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ल्मोड़ा फॉल्ट की वजह से आए 3 बड़े भूकंप, देश कांपता रहा

इस फॉल्ट में तीन बड़े झटके आए. पहला 5.8 तीव्रता का भूकंप 24 जनवरी 2023 को, दूसरा 6.2 तीव्रता का भूकंप 3 अक्टूबर 2023 को और तीसरा 6.4 तीव्रता का भूकंप 3 नवंबर 2023 को. इन भूकंपों के बाद आए छोटे झटकों से भारत, पाकिस्तान, नेपाल, अफगानिस्तान की धरती कांपती रही हैं. 

इन्हीं तीन मुख्य भूकंपों से पूरे साल भारत समेत आसपास के पड़ोसी देशों में कंपकंपी महसूस होती रही. उत्तरी भारत और नेपाल में भूकंपों का आना सामान्य घटना है. क्योंकि यह पूरा इलाका हिमालय के नजदीक है. हिमालय के आसपास कई सक्रिय फॉल्ट्स हैं. इनके नीचे की टेक्टोनिक प्लेटों की आपसी टक्कर से भूकंप आते रहते हैं. भारतीय टेक्टोनिक प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट को नीचे की तरफ से धक्का दे रही है. 

कितनी तीव्रता के भूकंप कब आए

साल 2023... 3.0 से 3.9 तीव्रता के 97 भूकंप आए. 4.0 से 4.9 तीव्रता के 21 भूकंप. 5.0 से 5.9 तीव्रता के 4 भूकंप और 6.0 से 6.9 तीव्रता के दो भूकंप आए. 
साल 2022... 3.0 से 3.9 तीव्रता के 41 भूकंप आए. 4.0 से 4.9 तीव्रता के 20 भूकंप. 5.0 से 5.9 तीव्रता के 3 भूकंप और 6.0 से 6.9 तीव्रता का एक भूकंप आया.
साल 2021... 3.0 से 3.9 तीव्रता के 41 भूकंप आए. 4.0 से 4.9 तीव्रता के 18 भूकंप. 5.0 से 5.9 तीव्रता का एक भूकंप.
साल 2020... 3.0 से 3.9 तीव्रता के 42 भूकंप आए. 4.0 से 4.9 तीव्रता के 18 भूकंप. 5.0 से 5.9 तीव्रता का एक भूकंप.

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कब आए कितने भूकंप

2023 में 124 भूकंप
2022 में 65 भूकंप
2021 में 60 भूकंप
2020 में 61 भूकंप

हिमालय दुनिया का सबसे युवा पहाड़ी इलाका

हिमालय दुनिया का सबसे युवा पहाड़ी इलाका है. यह एक अर्धचंद्राकार आकृति में दिखता है. नंगा पर्वत के पास ऊंचाई 8114 मीटर है. जबकि नामचा बरवा के पास 7755 मीटर है. ऊपर चीन, तिब्बत है. नीचे गंगा के मैदानी इलाके हैं. असल में इंडियन टेक्टोनिक प्लेट हर साल 15 से 20 mm की गति से तिब्बतन प्लेट की तरफ बढ़ रहा है. 

जब जमीन का इतना बड़ा टुकड़ा किसी अपने से बड़े टुकड़े को धकेलेगा, तो कहीं न कहीं तो ऊर्जा स्टोर होगी. तिब्बत की प्लेट खिसक नहीं पा रही हैं. इसलिए दोनों प्लेटों के नीचे मौजूद ऊर्जा निकलती है. ये ऊर्जा छोटे-छोटे भूकंपों के रूप में निकलती है, तो उससे घबराने की जरूरत नहीं है. लेकिन यही ऊर्जा तेजी से निकलती है, तो आधे भारत, पूरे नेपाल, पाकिस्तान, चीन, म्यांमार तक असर देखने को मिल सकता है. 

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