कम होती रोशनी...मरते हुए ग्रह, वैज्ञानिकों ने देखा दो प्लैनेट्स का एक्सीडेंट

दूर अंतरिक्ष में 11,000 प्रकाश-वर्ष दूर दो ग्रहों की भयंकर टक्कर हुई, जिसे वैज्ञानिकों ने कैद कर लिया. Gaia20ekh तारे की चमक में अचानक गिरावट से पता चला कि टक्कर से निकला 15 करोड़ किमी चौड़ा धूल-मलबे का गुबार तारे की रोशनी रोक रहा था. यह घटना पृथ्वी-चंद्रमा निर्माण जैसी है, ब्रह्मांड में ऐसी टक्करें आम लेकिन दुर्लभ दिखती हैं.

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दो ग्रहों के टकराने का आर्टिस्टिक तस्वीर है. (Photo: Representative/Getty) दो ग्रहों के टकराने का आर्टिस्टिक तस्वीर है. (Photo: Representative/Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

दूर अंतरिक्ष की गहराइयों में दो ग्रह आपस में एक्सीडेंट कर गए हैं. मजेदार बात ये है इस नजारे को वैज्ञानिकों ने कैप्चर कर लिया है. ये घटना धरती से 11,000 प्रकाश-वर्ष दूर हुई है. फोटो तो मिली लेकिन उसने साइंटिस्ट को हैरान कर दिया. वैज्ञानिक कहते हैं कि ये घटना असामान्य थी. ऐसा हमने कभी नहीं देखा.  

यह कहानी तब शुरू हुई जब Gaia20ekh नाम के सूर्य जैसे तारे का व्यवहार अचानक बदलने लगा. यह तारा पुपिस (Pupis) तारामंडल के पास स्थित है. शुरुआत में यह तारा सामान्य रूप से चमक रहा था, लेकिन 2016 के बाद इसकी चमक में अजीब तरह की गिरावट देखने को मिली.

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वैज्ञानिकों ने बताया कि पहले इस तारे की रोशनी स्थिर थी, लेकिन फिर अचानक इसकी चमक में तीन बार गिरावट आई. इसके बाद 2021 के आसपास इसका व्यवहार और भी बेतरतीब हो गया. यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के रिसर्चर त्ज़ानिडाकिस ने कहा कि ऐसे तारे, जो हमारे सूर्य जैसे होते हैं, इस तरह का व्यवहार नहीं करते. जब हमने यह देखा, तो हम हैरान रह गए और सोचा आखिर यहां क्या हो रहा है?

बड़ी मात्रा में उठा धूल-चट्टानों का गुबार

शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि शायद यह बदलाव तारे के भीतर किसी प्रक्रिया के कारण हो रहा है. लेकिन जब उन्होंने और गहराई से स्‍टडी किया, तो पता चला कि समस्या तारे में नहीं, बल्कि उसके आसपास हो रही थी. तारे के सामने बड़ी मात्रा में धूल और चट्टानों का एक बहुत बडा गुबार आ रहा था, जो उसकी रोशनी को अधूरा रूप से ढक रहा था.

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यह धूल और मलबा तारे की चक्कर लगा रहा था. जब भी यह पृथ्वी और तारे के बीच आता, तो तारे की रोशनी कम दिखाई देती. इसी कारण वैज्ञानिकों को तारे की चमक में बार-बार गिरावट नजर आई.

आगे की जांच में यह बिल्कुल साफ हुआ कि यह धूल और चट्टानें अचानक कहीं से नहीं आई थीं, बल्कि ये दो ग्रहों के बीच हुई एक भीषण टक्कर का परिणाम थीं. ये दोनों ग्रह उस तारे की परिक्रमा कर रहे थे. किसी वजह से आपस में टकरा गए. इस टक्कर से भारी मात्रा में मलबा अंतरिक्ष में फैल गया.

त्ज़ानिडाकिस ने कहा, यह अद्भुत है कि विभिन्न दूरबीनों ने इस टक्कर को लगभग असली समय में दर्ज किया. अब तक बहुत कम ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं. यह घटना इसलिए खास है क्योंकि इसमें पृथ्वी और चंद्रमा के निर्माण  एक जैसा होने की स्थिति दिखाई देती हैं.

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ऐसी टक्कर ब्रह्मांड में होती रहती हैं, दिखती नहीं हैं बस

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह की ग्रहों की टक्करें ब्रह्मांड में आम हो सकती हैं, लेकिन उन्हें देख पाना मुश्किल होता है. ऐसा तभी संभव है जब टकराने वाले ग्रहों की कक्षा इस तरह हो कि उनका मलबा पृथ्वी और तारे के बीच आ जाए, जिससे तारे की रोशनी में बदलाव दिखाई दे.

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इस खोज की सबसे खास बात यह है कि यह घटना हमारे अपने सौर मंडल के इतिहास से मिलती-जुलती है. 4.5 अरब साल पहले, पृथ्वी से एक बहुत बडे पिंड की टक्कर हुई थी, जिससे भारी मात्रा में मलबा अंतरिक्ष में फैला. बाद में यही मलबा मिलकर चंद्रमा के निर्माण का कारण बना.

Gaia20ekh के आसपास बना धूल का यह बादल लगभग करीब 15 करोड़ किलोमीटर चौड़ा है, जो लगभग पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी के बराबर है. यह आकार इस बात का संकेत देता है कि टक्कर कितनी शक्तिशाली रही होगी. यह खोज खगोल विज्ञान के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि ग्रह कैसे बनते हैं और उनका विकास कैसे होता है.  

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