जानिये, शनिवार को पीपल पर क्यों चढ़ाते हैं कच्‍चा दूध...

पीपल के पेड़ को हिन्‍दू धर्म बहुत ही शुभ माना जाता है. शास्‍त्रों के अनुसार इस पेड़ में भगवान का वास माना गया और शनिवार के दिन इसकी पूजा का महत्‍व भी माना गया है...

Advertisement
पीपल का पूजन पीपल का पूजन

वंदना भारती

  • नई दिल्‍ली,
  • 13 अगस्त 2016,
  • अपडेटेड 11:12 AM IST

जीवन को सुखमय बनाने के लिए भगवान को नियमित रूप से याद करना और उनकी पूजा करना बहुत जरूरी होता है. कई बार ऐसा होता है कि ग्रहों की चाल बदलने से जीवन में कष्‍टमय हो जाता है लेकिन ग्रहों की अनिष्टदायक स्थिति को मंगलमय बनाने के लिए कुछ सरल उपाय करें तो निश्चित ही हमें शुभदायक परिणाम प्राप्‍त होते हैं. जीवन में नए कार्य के प्रति बनाई गई योजनाओं में लाभ भी मिलता है.

Advertisement


आइए जानें, ऐसे ही कुछ आसान और सरल उपाय जीवन को सुखमय बनाने के...

1. प्रत्येक के वृक्ष पर जल, कच्चा दूध थोड़ा चढ़ाकर, सात परिक्रमा करके सूर्य, शंकर, पीपल- इन तीनों की सविधि पूजा करें तथा चढ़े जल को नेत्रों में लगाएं और पितृ देवाय नम: भी 4 बार बोलें तो राहु+केतु, शनि+पितृ दोष का निवारण होता है.

2. प्रात:काल उठते ही माता-पिता, गुरु एवं वृद्धजनों को प्रणाम करें और उनका आत्मिक आशीर्वाद प्राप्त करके दिन को सफल बनाएं. इसके साथ ही 5 सुगंधित अगरबत्ती लगाकर दिन की शुरूआत करें.

3. नित्य प्रति गाय को गुड़-रोटी दें. हो सके तो करके 'आज के दिन यह कामधेनु वांछित कार्य करेगी' ऐसी प्रार्थना मन में करें.

4. नित्य प्रति कुत्तों को रोटी खिलानी चाहिए और पक्षियों को दाना भी डालें तो शुभ है. 5. घर आए मेहमानों की सेवा निष्काम भाव से करनी चाहिए क्‍योंकि अतिथि को भगवान तुल्‍य माना गया है.

Advertisement

6. हमेशा प्रात:काल भोजन बनाते समय माताएं-बहनें एक रोटी अग्निदेव के नाम से बनाकर घी तथा गुड़ से बृहस्पति भगवान को अर्पित करें तो घर में वास्तु पुरुष को भोग लग जाता है. इससे अन्नपूर्णा भी प्रसन्न रहती हैं.

7. प्रात: स्नान करके भगवान शंकर के शिवलिंग पर जल चढ़ाकर 108 बार 'ॐ नम: शिवाय' मंत्र की पूजा से युक्त दंडवत नमस्कार करना चाहिए.


8. स्नान के पश्चात प्रात: सूर्यनारायण भगवान को लाल पुष्प चढ़ाकर बार-बार हाथ जोड़कर नमस्कार करना चाहिए.

9. यथाशक्ति कुछ न कुछ गरीबों को दान देना चाहिए. प्रत्येक प्राणी पर से सहयोग यथायोग्य करना चाहिए. सेवा कर यश प्राप्ति की भावना नहीं रखें.

10. पितृ दोष से मुक्ति के लिए नित्य महागायत्री के महामंत्र की नियमित साधना करें तथा श्री रामेश्वर धाम की यात्रा कर वहां पूजन करें.

Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement