Yogini Ekadashi 2026: आज इतने बजे होगा योगिनी एकादशी का पारण, नोट कर लें शुभ मुहूर्त और विधि

Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी के व्रत का पारण आज किया जा रहा है. सही समय और विधि से व्रत खोलना बेहद जरूरी माना जाता है, वरना व्रत का पूरा फल नहीं मिलता. जानिए पारण का शुभ मुहूर्त, सही विधि और किन गलतियों से बचना चाहिए.

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योगिनी एकादशी पारण (Photo: Getty Images) योगिनी एकादशी पारण (Photo: Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:00 AM IST

Yogini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में योगिनी एकादशी का व्रत बेहद कल्याणकारी और पापों का नाश करने वाला माना गया है. आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का व्रत रखने के बाद, सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है इसका पारण' यानी व्रत खोलना. मान्यता है कि अगर एकादशी व्रत का पारण सही समय और विधि से न किया जाए, तो व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता. आज, यानी 11 जुलाई 2026 को योगिनी एकादशी व्रत का पारण किया जा रहा है. आइए जानते हैं कि आज व्रत खोलने का सबसे उत्तम समय क्या है और किस विधि से आपको अपना व्रत पूरा करना चाहिए.

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योगिनी एकादशी पारण का शुभ मुहूर्त (Yogini Ekadashi 2026 Paran Timing)

द्रिक पंचांग के अनुसार, आज दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से लेकर शाम 4 बजकर 36 मिनट तक पारण का शुभ समय है. ध्यान रहे कि हरि वासर की अवधि समाप्त होने के बाद ही पारण किया जाता है.

पारण की सही विधि

- पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं.

- इसके बाद भगवान श्री हरि विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं. उन्हें पीले फूल, तुलसी दल और फल अर्पित करें.

- व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को सात्विक भोजन कराएं या सीधे अनाज, तिल और वस्त्र का दान निकाल कर रख दें.

- एकादशी व्रत के पारण में तुलसी जी का विशेष महत्व है. भगवान विष्णु के प्रसाद में तुलसी का पत्ता डालकर, सबसे पहले उसे ग्रहण करके ही व्रत खोलना बेहद शुभ माना जाता है.

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- पारण के भोजन में लहसुन, प्याज या भारी भोजन का उपयोग न करें. पूरी तरह सात्विक और सुपाच्य भोजन से ही व्रत संपन्न करें.

पारण के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां

हरि वासर का रखें ध्यान 
सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि का जो शुरुआती एक-चौथाई हिस्सा होता है, उसे 'हरि वासर' कहते हैं. इस दौरान व्रत नहीं खोलना चाहिए.

चावल का नियम 
एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित होता है, लेकिन द्वादशी को पूजा के बाद चावल खाना शुभ माना जाता है.

क्रोध और विवाद से बचें 
पारण के दिन भी मन को शांत रखें और घर में किसी भी तरह के कलह से बचें.

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