Vastu Tips: कमल-गुलाब नहीं, इस दिशा में रखे आर्टिफिशियल फूल जिंदगी करेंगे गुलजार

आपने अक्सर लोगों को यह कहते सुना होगा कि घर में हमेशा असली सुगंधित फूल ही रखने चाहिए. कुछ लोग ऐसा भी मानते हैं कि आर्टिफिशियल फूल घर में नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता का कारण बन जाते हैं. जबकि आर्टिफिशियल फूलों को अगर घर की उचित दिशा में रखा जाए तो यह भी बहुत लाभ दे सकते हैं.

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यदि आर्टिफिशियल फूलों का चयन रंग, दिशा और पंचमहाभूत (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश) के संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाए तो लाभ मिल सकता है. (Photo: ITG) यदि आर्टिफिशियल फूलों का चयन रंग, दिशा और पंचमहाभूत (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश) के संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाए तो लाभ मिल सकता है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:41 PM IST

घरों की सजावट में आर्टिफिशियल (कृत्रिम) फूलों का चलन तेजी से बढ़ा है. ये लंबे समय तक सुंदर बने रहते हैं. देखभाल के लिए समय कम मांगते हैं और हर मौसम में घर को आकर्षक बनाते हैं. वास्तु के अनुसार यदि कृत्रिम फूलों का चयन रंग, दिशा और पंचमहाभूत यानी जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी (भूमि) और आकाश के संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाए तो इनके जरिए भी घर का वातावरण अधिक सकारात्मक और संतुलित महसूस हो सकता है.

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उत्तर-पूर्व और जल तत्व: नीले व सफेद फूल
वास्तु के अनुसार, उत्तर-पूर्व दिशा जल तत्व का प्रतिनिधित्व करती है. इस दिशा में हल्के नीले, सफेद या क्रीम कलर के आर्टिफिशियल फूल लगाए जा सकते हैं. ये रंग शांति, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक होते हैं. यदि इस दिशा में फूलों के साथ छोटा सा सजावटी फव्वारा या जल का प्रतीकात्मक चित्र भी हो तो सजावट अधिक संतुलित मानी जाती है. अत्यधिक गहरे या काले रंगों का प्रयोग इस दिशा में कम करना चाहिए. हरे रंग के पत्तीदार पौधों का प्रयोग भी किया जा सकता है. 

पूर्व और वायु तत्व: हरे रंग का संतुलन
पूर्व दिशा वायु तत्व से जुड़ी मानी जाती है. यहां हरे रंग की पत्तियों वाले आर्टिफिशियल पौधे या हल्के गुलाबी फूल उपयुक्त माने जाते हैं. यह क्षेत्र नई ऊर्जा, स्वास्थ्य और विकास का प्रतीक माना जाता है. ड्रॉइंग रूम या बालकनी के पूर्वी हिस्से में हल्के रंगों के फूल घर को ताजगी का एहसास देते हैं. ध्यान रखें कि धूल से ढके कृत्रिम फूल सकारात्मक प्रभाव के बजाए उपेक्षा का संकेत दे सकते हैं, इसलिए उनकी नियमित सफाई आवश्यक है.

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दक्षिण और अग्नि तत्व: लाल, नारंगी और गुलाबी रंग
दक्षिण दिशा अग्नि तत्व का क्षेत्र मानी जाती है. यहां लाल, नारंगी, गहरे गुलाबी या सुनहरे रंग के आर्टिफिशियल फूल लगाए जा सकते हैं. ये रंग उत्साह, आत्मविश्वास, ऊर्जा और सफलता का प्रतीक हैं. बहुत अधिक चमकीले रंगों का अत्यधिक प्रयोग कमरे को भारी या चुभने वाला बना सकता है. संतुलित सजावट ही बेहतर है.

दक्षिण-पश्चिम और पृथ्वी तत्व: पीले व मिट्टी के रंग
दक्षिण-पश्चिम दिशा पृथ्वी या भूमि तत्व का प्रतिनिधित्व करती है. इस दिशा में पीले, हल्के भूरे, क्रीम या मिट्टी जैसे रंगों के फूल व प्राकृतिक बनावट वाले फूलदान उपयुक्त माने जाते हैं. यह दिशा परिवार में स्थिरता, विश्वास और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है. यदि कृत्रिम फूल बहुत पुराने, टूटे हुए या फीके पड़ जाएं तो उन्हें बदल देना चाहिए, क्योंकि खराब सजावटी वस्तुएं घर की सुंदरता के साथ ऊर्जा को भी प्रभावित करती हैं.

पश्चिम से उत्तर दिशा का स्थान और आकाश तत्व
पश्चिम से उत्तर दिशा की ओर का स्थान आकाश तत्व का स्थान माना जाता है. यहां बहुत अधिक सजावटी सामान रखने के बजाय खुलापन बनाए रखना बेहतर माना जाता है. यदि फूल लगाने हों तो हल्के रंगों के छोटे और सादगीपूर्ण कृत्रिम फूल पर्याप्त हैं. यहां सफेद व पीले, सुनहरे फूल लगाए जा सकते हैं.

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नुकसान भी समझें
कृत्रिम फूलों की नियमित सफाई न होने पर उन पर धूल जम जाती है, जिससे घर की स्वच्छता और सौंदर्य दोनों प्रभावित होते हैं. बहुत अधिक कृत्रिम सजावट घर को बनावटी रूप दे सकती है. वहीं पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक आधारित कृत्रिम फूल जैविक रूप से आसानी से नष्ट नहीं होते. इसलिए यदि संभव हो तो कपड़े, कागज या पुनर्चक्रित सामग्री से बने विकल्प चुनना बेहतर माना जाता है. बेहतर है कि असली यानी प्राकृतिक पुष्प और पौधों से ही अपने घर की सुन्दरता को बढ़ाएं.

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