Quote of the Day by Socrates: बदलाव और सफलता का रहस्य अपनी पूरी ऊर्जा को पुरानी चीज़ों से लड़ने या भविष्य के डर में लगाने के बजाय, कुछ नया बनाने में लगाना है- सुकरात
महान यूनानी दार्शनिक सुकरात का यह विचार केवल एक दार्शनिक पंक्ति नहीं, बल्कि मानसिक अशांति से उबरने और जीवन में उत्पादकता (Productivity) बढ़ाने का एक अचूक मंत्र है. आज के समय में हमारी सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि हम अपनी मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का एक बहुत बड़ा हिस्सा उन चीज़ों पर बर्बाद कर देते हैं, जिन्हें हम बदल नहीं सकते—जैसे बीता हुआ कल, पुरानी गलतियां, या फिर भविष्य की अनिश्चितता का डर. सुकरात हमें याद दिलाते हैं कि हमारी ऊर्जा असीमित नहीं है, इसलिए इसका निवेश बहुत सोच-समझकर किया जाना चाहिए.
अतीत और भविष्य के जाल से मुक्ति
जब हम अतीत की असफलताओं से लड़ते रहते हैं या भविष्य के डर में जीने लगते हैं, तो हम अनजाने में अपने वर्तमान को पंगु बना देते हैं. पुरानी बातों को याद करके अफ़सोस करना या आने वाले कल को लेकर चिंतित होना ठीक वैसा ही है जैसे कार को न्यूट्रल गियर में डालकर एक्सीलेटर दबाना; इसमें ईंधन तो पूरा जलता है, लेकिन गाड़ी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ती. वास्तविक मानसिक स्वतंत्रता और सफलता तब मिलती है, जब हम यह स्वीकार कर लेते हैं कि जो बीत गया उसे बदला नहीं जा सकता और जो आने वाला है उसे केवल आज के कर्मों से ही सुधारा जा सकता है.
नए निर्माण और कर्म की शक्ति
सफलता का असली रहस्य 'क्रिएशन' यानी कुछ नया रचने में छिपा है. जब हम अपनी पूरी ऊर्जा को चिंताओं से खींचकर वर्तमान क्षण में किसी रचनात्मक कार्य, नए विचार या अपने कर्तव्य को पूरा करने में लगा देते हैं, तो जादुई बदलाव होने लगता है. यही वो क्षण है जहाँ डर, कर्म में बदल जाता है. जब आप कुछ नया बनाने या सीखने में व्यस्त होते हैं, तो दिमाग में फालतू विचारों के लिए जगह ही नहीं बचती. इसलिए, अपनी ऊर्जा को नष्ट करने के बजाय उसे नए संकल्पों और कर्मों की नींव बनाने में लगाएं; क्योंकि वर्तमान का सही निर्माण ही एक शानदार भविष्य की गारंटी है.
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