Shani Vakri: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता और कर्म फल दाता माना गया है. शनि की चाल में बदलाव का असर पूरे ब्रह्मांड और मानव जीवन पर पड़ता है. 27 जुलाई 2026 को शनि मीन राशि में वक्री (Retrograde) हो रहे हैं. शनि की यह उल्टी चाल सामान्य नहीं है, क्योंकि जब कोई ग्रह वक्री होता है, तो वह अपनी सामान्य ऊर्जा से अधिक तीव्रता से अपना प्रभाव दिखाता है. यह समय उन लोगों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है जिनकी कुंडली में शनि की स्थिति कमजोर है.
क्या होता है शनि का वक्री होना?
जब शनि अपनी सीधी चाल छोड़कर पीछे की ओर चलते दिखाई देते हैं, तो इसे वक्री होना कहते हैं. शनि की वक्री अवस्था के दौरान कार्यों में विलंब, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां और आर्थिक उलझनें बढ़ने की संभावना रहती है. इस अवधि में जातक को अपने पिछले किए गए कर्मों का फल अधिक तेजी से प्राप्त होता है.
इन 5 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क
शनि के वक्री होने से मीन राशि के साथ-साथ अन्य राशियों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा. विशेष रूप से 5 राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है:
मीन राशि: शनि आपकी ही राशि में वक्री हो रहे हैं, इसलिए आपको स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता को लेकर सजग रहना होगा.
कुंभ राशि: आपको कार्यक्षेत्र में अतिरिक्त मेहनत की आवश्यकता होगी. बनते हुए कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं.
मकर राशि: आर्थिक मामलों में जोखिम उठाने से बचें, क्योंकि शनि की वक्री चाल धन हानि के योग बना सकती है.
कर्क राशि: करियर और पारिवारिक मामलों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है, धैर्य बनाए रखें.
वृश्चिक राशि: इस दौरान वाद-विवाद से दूर रहें . अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें.
शनि दोष से बचने के उपाय
शनि की वक्री अवधि में घबराने के बजाय अनुशासित जीवन जीना ही सबसे बड़ा उपाय है.
शनि मंत्र का जप: ॐ शं शनैश्चराय नमः का नियमित जप करें.
परोपकार: शनिवार के दिन जरूरतमंदों को काला तिल, उड़द की दाल या सरसों का तेल दान करें.
ईमानदारी: अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी बरतें, क्योंकि शनि कर्म के अनुसार ही फल देते हैं.
हनुमान उपासना: हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ शनि के दुष्प्रभावों को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है.
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