Premanand Maharaj: 'सैनिकों के शहीद होने पर मुझे भी होता है दुख...' प्रेमानंद महाराज ने बताया शहीदों का महत्व

Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में शहीद सैनिकों के बलिदान को महान बताते हुए कहा कि जो मातृभूमि के लिए प्राण न्यौछावर करते हैं, उन्हें सर्वोच्च गति प्राप्त होती है. उन्होंने सैनिकों को मानसिक रूप से मजबूत रहने और नामजप को जीवन में अपनाने की भी सलाह दी.

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प्रेमानंद महाराज (Photo: Screengrab_YT/bhajanmarg) प्रेमानंद महाराज (Photo: Screengrab_YT/bhajanmarg)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST

Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज के मन में जितनी श्रद्धा राधा रानी के लिए है, उतनी ही श्रद्धा उनके मन में देशभक्ति और मातृभूमि के लिए भी है. उन्होंने अपने प्रवचनों में कई बार देशभक्त के लेकर प्रेरणादायक बातें कही हैं. प्रेमानंद महाराज के मुताबिक, 'जो मातृभूमि के लिए शहीद होता है, वो लोग सीधा स्वर्ग जाते हैं.' 

इसी तरह का प्रश्न लेकर एक भक्त प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा. उसने कहा कि, 'श्री जी की कृपा से मुझे जम्मू-कश्मीर में उन सैनिकों को प्रशिक्षण देने का सौभाग्य मिला है, जो देश की रक्षा करते हुए आतंकवादियों का सामना करते हैं. जब इनमें से कोई जवान शहीद हो जाता है, तो स्वाभाविक रूप से मन व्यथित हो जाता है क्योंकि उनसे एक आत्मीय जुड़ाव बन जाता है.'

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मृत्यु निश्चित है

इस पर प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'ऐसी स्थिति में हमें अपने मन को सही दिशा में रखना जरूरी है. सबसे पहले यह समझना चाहिए कि इस संसार में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति एक दिन अवश्य जाता है. मृत्यु अटल है, लेकिन यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम कहां और किस उद्देश्य के लिए जीवन त्यागते हैं.'

'जो सैनिक देशभक्ति और राष्ट्र रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करते हैं, उनका बलिदान साधारण नहीं होता है. एक आतंकवादी सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान के लिए खतरा बन सकता है, पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है. ऐसे में जो सैनिक अपने प्राण देकर उस खतरे को समाप्त करता है, वह न केवल देश की रक्षा करता है बल्कि मानवता का भी उपकार करता है. इसलिए हमें यह भावना रखनी चाहिए कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया, बल्कि अत्यंत महान और पुण्यकारी है. उनका जीवन धन्य है और उनकी गति श्रेष्ठ होती है. यदि वे भक्ति से जुड़े हों तो और भी उच्च स्थिति प्राप्त करते हैं.'

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देशभक्ति के लिए बलिदान

आगे प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'जब किसी शहीद की खबर मुझे भी मिलती है, तो मेरा मन भी उदास हो जाता है. पूरा देश शोक में डूब जाता है और हम सब उनके परिवार के लिए प्रार्थना करते हैं कि भगवान उन्हें धैर्य और शांति प्रदान करें. लेकिन हमें इस शोक को अपनी कमजोरी नहीं बनने देना है.'

'यदि हम भावनाओं में बहकर कमजोर पड़ेंगे, तो हमारे प्रशिक्षण और कर्तव्य में कमी आ सकती है. इसके बजाय हमें अपने मन को और अधिक मजबूत बनाना होगा. हमें यह सोचना चाहिए कि जिस सैनिक को हमने प्रशिक्षित किया, उसने देश सेवा में अपने जीवन का सर्वोच्च उपयोग किया. यह हमारे प्रशिक्षण की सफलता है. सैनिकों के लिए आवश्यक है कि वे अपने मन को दृढ़ रखें, प्रशिक्षण में पूरी तरह एकाग्रता रखें और मानसिक रूप से अटूट बनें. युद्ध की स्थिति में उन्हें अत्यंत साहस, कठोरता और सतर्कता की आवश्यकता रखनी चाहिए. दुश्मन किसी भी रूप में आ सकता है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में ढील नहीं देनी चाहिए.'

नाम जप करें

फिर प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि, 'यदि संभव हो तो नामजप और भक्ति को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाएं. इससे मन स्थिर रहता है, भय कम होता है और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है. अंत में यही कहना है कि सैनिक का जीवन केवल उसका अपना नहीं होता है, वह पूरे राष्ट्र का होता है. यह एक महान और वंदनीय कार्य है. इसलिए, कभी निराश या हताश न हों, बल्कि गर्व और प्रसन्नता के साथ अपने कर्तव्य में तत्पर रहें.'

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