Jagannath Mandir Secrets: जगन्नाथ मंदिर की तीसरी सीढ़ी का रहस्य जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. मान्यता है कि इस सीढ़ी का प्रभाव इतना गहरा है कि भगवान जगन्नाथ के बड़े से बड़े भक्त भी इस पर पैर रखने से बचते हैं. अगर गलती से कोई इस पर कदम रख दे, तो वह तुरंत हाथ जोड़कर क्षमा मांगता है, पछताता है और मन ही मन डर जाता है. कहा जाता है कि इस गलती पर एक देवता मुस्कुराते हैं, वे हैं मृत्यु के देवता यमराज.
आपने अक्सर जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कई चमत्कारों के बारे में सुना होगा जैसे मंदिर के शिखर पर लगा ध्वज हवा के विपरीत दिशा में लहराता है या मंदिर के ऊपर पक्षी नहीं उड़ते. महाप्रसाद का रहस्य भी काफी प्रसिद्ध है. लेकिन इन सबके बीच मंदिर की 22 सीढ़ियों में से तीसरी सीढ़ी सबसे ज्यादा रहस्यमयी मानी जाती है.
क्या है तीसरी सीढ़ी का रहस्य?
पुरी में रहने वाले स्थानीय लोग भी इस तीसरी सीढ़ी पर पैर रखने से बचते हैं. इसे यमशिला कहा जाता है. मान्यता है कि मंदिर में प्रवेश करते समय या बाहर निकलते समय अगर कोई भक्त इस सीढ़ी पर पैर रखता है, तो उसे अपने किए गए पुण्यों का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
तीसरी सीढ़ी की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार, जब कलयुग में लोग भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से पापमुक्त होने लगे, तो यमराज चिंतित हो गए. वे भगवान जगन्नाथ के पास पहुंचे और बोले कि इससे कर्म और फल का संतुलन बिगड़ रहा है. तब भगवान जगन्नाथ ने उन्हें समाधान देते हुए कहा कि वे मंदिर की तीसरी सीढ़ी पर स्थान ग्रहण करें. तभी से इस सीढ़ी को यमशिला कहा जाने लगा। मान्यता है कि दर्शन के बाद इस पर पैर रखने से पुण्य कम हो जाते हैं.
जगन्नाथ मंदिर की इन 22 सीढ़ियों को बैसी पहाचा कहा जाता है. हर सीढ़ी का अपना एक अलग आध्यात्मिक अर्थ है. कहा जाता है कि ये सीढ़ियां जीवन के विभिन्न भावों काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि, का प्रतीक हैं, जिन्हें पार करके ही इंसान ईश्वर तक पहुंचता है. कुछ मान्यताओं के अनुसार, ये 22 सीढ़ियां पंचमहाभूत, इंद्रियां, प्राण और आत्मा के विभिन्न स्तरों को भी दर्शाती हैं. यानी हर सीढ़ी आत्मिक उन्नति का एक पड़ाव मानी जाती है.
इसलिए अगर आप कभी जगन्नाथ मंदिर जाएं, तो इन सीढ़ियों के महत्व को समझें और विशेष रूप से तीसरी सीढ़ी से सावधान रहें. यह आस्था और परंपरा से जुड़ा विषय है, जिसे श्रद्धा के साथ ही देखा जाता है.
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