Israel Attack Iran: 1400 साल पहले हुई थी जंग-ए-बद्र, रमजान में इजरायल-US को रोक पाएगा ईरान?

Israel Attack Iran: रमजान के पवित्र महीने में इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया है. ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है. जंग-ए-बद्र का ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान इस टकराव में टिक पाएगा.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:39 PM IST

मध्य पूर्व में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है. तेहरान, इस्फहान और कराज समेत कई शहरों में एक के बाद एक धमाके हो रहे हैं, जिससे ईरान में हलचल मच गई. यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब मुस्लिम दुनिया में पवित्र रमजान का महीना चल रहा है, जिससे ईरान में इस टकराव को धार्मिक और राजनीतिक दोनों संदर्भों में देखा जा रहा है.

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इजरायल का कहना है कि उसे खुफिया जानकारी मिली थी कि ईरान किसी बड़े परमाणु परीक्षण या सीधे हमले की तैयारी में था. इसी खतरे को रोकने के लिए "प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक" यानी एहतियाती हमला किया गया. इजरायल का दावा है कि उसका लक्ष्य ईरान के मिसाइल निर्माण केंद्रों, ड्रोन लॉन्च पैड और रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना है. साथ ही बताया जा रहा है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य के साथ यह हमला किया गया है.

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दूसरी ओर, ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले का दावा किया है. ईरानी नेतृत्व इस संघर्ष को "अस्तित्व की लड़ाई" के तौर पर पेश कर रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता अक्सर 1400 साल पहले रमजान में लड़ी गई 'जंग-ए-बद्र' का उदाहरण देते रहे हैं.

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क्या है जंग-ए-बद्र?

जंग-ए-बद्र 17 रमजान, 2 हिजरी (लगभग 624 ईस्वी) में लड़ी गई थी. यह लड़ाई मदीना के मुसलमानों और मक्का के कुरैश के बीच हुई थी. संख्या में कम होने के बावजूद मुसलमानों ने यह युद्ध जीता था. ईरान इसी ऐतिहासिक संदर्भ को सामने रखकर यह संदेश देता रहा है कि कम संसाधनों के बावजूद 'सत्य' की जीत होती है.

रमजान का महीना और मुस्लिम देशों में तनाव

इससे पहले भी रमजान के दौरान बड़े सैन्य अभियान देखे गए हैं. 1982 में ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरान की तरफ से 'ऑपरेशन रमजान' चलाया गया था. वहीं अप्रैल 2024 में ईरान ने इजरायल पर 300 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया था, हालांकि वह रमजान के खत्म होने के बाद हुआ था.

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रमजान के दौरान इजरायल-फिलिस्तीन तनाव का इतिहास भी पुराना रहा है, खासकर पूर्वी यरूशलेम स्थित अल-अक्सा मस्जिद को लेकर. अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के पीछे भी अल-अक्सा परिसर में बढ़ते तनाव को एक कारण बताया गया था. मौजूदा इजरायल-ईरान टकराव से फिलिस्तीनी इलाकों में भी स्थिति और भड़क सकती है.

हूती-हिज्बुल्लाह की तरफ से भी हमला

अब सवाल यह है कि क्या ईरान रमजान के इस पवित्र महीने में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त ताकत का सामना कर पाएगा? ईरान समर्थित गुट जैसे यमन के हूती और लेबनान के हिजबुल्लाह की भूमिका भी अहम हो सकती है, जहां ईरान के प्रॉक्सी में शामिल इन दोनों ही ने रेड सी में मिसाइलें दागीं हैं. वहीं कई अरब देश इस संघर्ष में सीधे पक्ष लेने से बचते दिख रहे हैं.

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स्पष्ट है कि यह टकराव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है. आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संघर्ष सीमित रहता है या एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेता है.

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