Durga Ashtami 2026 Shubh Muhurt: दुर्गा अष्टमी आज, सुबह इतने बजे शुरू हो जाएगा कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त

26 मार्च यानी आज चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाएगा. अष्टमी पर कन्या पूजन के लिए इस बार तीन शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. इस बार अष्टमी तिथि पर सर्वार्थसिद्धि और रवि योग का निर्माण भी होने वाला है.

Advertisement
अष्टमी पर छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप समझकर पूजा जाता है और उन्हें घर बुलाकर भोजन करवाया जाता है. (Photo: ITG) अष्टमी पर छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप समझकर पूजा जाता है और उन्हें घर बुलाकर भोजन करवाया जाता है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:02 AM IST

Durga Ashtami 2026: 26 मार्च यानी आज चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि है. अष्टमी पर कन्या पूजन करने की परंपरा है. इसे दुर्गा अष्टमी भी कहते हैं. अष्टमी पर छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप समझकर पूजा जाता है और उन्हें घर बुलाकर भोजन करवाया जाता है. इस दिन देवी के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा भी होती है. इस बार देशभर में कन्या पूजन को लेकर बड़ा उत्साह देखा जा रहा है. लोग आज यानी सप्तमी तिथि पर ही कन्याओं को अष्टमी पर अपने घर आने का निमंत्रण दे रहे हैं. आइए आपको कन्या पूजन की विस्तृत जानकारी देते हैं.

Advertisement

दुर्गा अष्टमी 2026 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, दुर्गा अष्टमी चैत्र शुक्ल अष्टमी को मनाई जाती है. और चैत्र शुक्ल अष्टमी 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से लेकर 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहने वाली है. उदया तिथि के कारण अष्टमी का कन्या पूजन 26 मार्च दिन गुरुवार को ही किया जाना उचित है.

दुर्गा अष्टमी 2026 पर कन्या पूजन के मुहूर्त
अष्टमी पर कन्या पूजन के लिए इस बार तीन शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. इस बार अष्टमी तिथि पर सर्वार्थसिद्धि और रवि योग का निर्माण भी होने वाला है.

पहला मुहूर्त- सुबह 06:16 बजे से सुबह 07:48 बजे तक
दूसरा मुहूर्त- सुबह 10:56 बजे से दोपहर 02:01 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:02 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक

दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन विधि
अष्टमी तिथि पर नौ छोटी-छोटी कन्याओं को अपने घर आने के लिए आमंत्रित करें. एक बटुक यानी बालक को भी अपने घर आने का न्यौता दें. इसे बटुक भैरव या लंगुरिया के रूप में पूजा जाता है. जब ये कन्याओं और बालक आपके घर आएं तो फूलों की वर्षा कर इनका स्वागत करें. इनके चरण किसी थाल में धुलवाएं और घर में बड़े सत्कार से प्रवेश करवाएं. देवी के जयकारे लगाते हुए इन्हें घर के अग्नि कोण में बैठाएं. यह आपके घर की साउथ-ईस्ट, साउथ-साउथ-ईस्ट और साउथ दिशा होती है. यदि आपके घर का मंदिर ईशान कोण में है तो आप इस स्थान पर भी कन्याओं को बैठा सकते हैं.

Advertisement

सही दिशा में बैठाने के बाद कन्याओं को लाल रंग की चुनरी ओढ़ाएं. बटुक के माथे पर भी एक लाल रंग की पट्टी या चुनरी बांध दें. फिर इनके माथे पर रोली-कुमकुम का तिलक लगाएं और हाथ पर कलावा बांधें. इसके बाद इनकी थाली में खाने की सामग्री परोसें. अष्टमी के कन्या पूजन में हलवा-पूरी, काले चने, मौसमी फल और नारियल का प्रसाद थाली में परोसा जाता है. भोज ग्रहण करने के बाद कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और सामर्थ्य के अनुसार कुछ उपहार जरूर दें. इसके बाद देवी स्वरूप कन्याओं से अगले नवरात्र में पुन: अपने घर आने का आग्रह करें.

दुर्गा अष्टमी पर करें महागौरी की पूजा
चैत्र शुक्ल अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा होती है. इस दिन एक चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और देवी की प्रतिमा स्थापित करें. इसके बाद मां को चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प, रोली और सिंदूर अर्पित करें. मां महागौरी को मिश्री, नारियल, खीर, गाय के शुद्ध घी और सफेद मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद मां महागौरी के बीज मंत्र 'ॐ देवी महागौर्यै नमः' मंत्र का 108 माला जाप करें. आखिर में मां मां महागौरी की आरती उतारें. आपके जीवन की सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी.

मां महागौरी की आरती

जय महागौरी जगत की माया।
जया उमा भवानी जय महामाया।।

Advertisement

हरिद्वार कनखल के पासा।
महागौरी तेरा वहां निवासा।।

चंद्रकली और ममता अंबे।
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।

भीमा देवी विमला माता।
कौशिकी देवी जग विख्याता।।

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।

सती 'सत' हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।

तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।

अष्टमी पर इन दिव्य मंत्रों का करें जाप

बीज मंत्र: ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं वरदायै नमः
महागौरी मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः
ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement