सात हजार साल का इतिहास, पुराणों में जिक्र... आज अयोध्या पहुंच रही है श्रीराम की सबसे खास विरासत

अयोध्या में भगवान श्रीराम के लिए निर्मित 286 किलोग्राम वजनी पंचधातु कोदंड 3 जनवरी 2026 को ओडिशा के राउरकेला से रवाना होकर 22 जनवरी को अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचा.

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अयोध्या राम मंदिर में स्थापित होगा श्रीराम का धनुष कोदंड अयोध्या राम मंदिर में स्थापित होगा श्रीराम का धनुष कोदंड

मयंक शुक्ला

  • नई दिल्ली,
  • 22 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:11 AM IST

भगवान श्रीराम के लिए निर्मित पंचधातु का भव्य कोदंड आज अयोध्या लाया जा रहा है. 286 किलोग्राम वजनी यह कोदंड 3 जनवरी 2026 को ओडिशा के राउरकेला से रवाना हुआ था. सनातन जागरण मंच, राउरकेला की ओर से इसके प्रस्थान के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई.

यह शोभायात्रा ओडिशा के सभी 30 जिलों से होकर गुजरी. यात्रा के दौरान 19 जनवरी को कोदंड पुरी पहुंचा, जहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन कराए गए. तय कार्यक्रम के अनुसार 22 जनवरी को यह कोदंड अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर पहुंचेगा. पंचधातु से निर्मित इस कोदंड में सोना, चांदी, एल्युमिनियम, जस्ता और लोहे का उपयोग किया गया है. इसका निर्माण तमिलनाडु के कांचीपुरम की 48 महिला कारीगरों ने करीब आठ महीने की मेहनत से किया है.

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विशेष बात यह है कि कोदंड पर कारगिल युद्ध सहित भारतीय सेना की वीरता और पराक्रम की गाथाएं भी अंकित की गई हैं, जो इसे सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में और भी खास बनाती हैं.

क्या है कोदंड?
भगवान श्रीराम के धनुष का नाम कोदंड है. रामायण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में कोदंड का जिक्र धर्म, मर्यादा और न्याय के प्रतीक के रूप में किया गया है. भगवान श्रीराम को कोदंडधारी कहा गया है, क्योंकि उनके हाथों में हमेशा ही कोदंड सुशोभित रहता था. यह केवल युद्ध का हथियार नहीं, बल्कि अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना का संकेतक भी माना जाता है.

कोदंड का उल्लेख वाल्मीकि रामायण, तुलसीदास की रामचरितमानस और कई पुराणों में मिलता है, जहां इसे श्रीराम के दिव्य स्वरूप से जोड़ा गया है.

संत तुलसी अपने एक छंद में कोदंड का जिक्र श्रीराम के धनुष के रूप में करते हैं 

कोदंड कठिन चढ़ाइ सिर जट जूट बाँधत सोह क्यों।
मरकत सयल पर लरत दामिनि कोटि सों जुग भुजग ज्यों॥
कटि कसि निषंग बिसाल भुज गहि चाप बिसिख सुधारि कै।
चितवत मनहुँ मृगराज प्रभु गजराज घटा निहारि कै॥

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कोदंड को लेकर क्या है धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक मान्यता के अनुसार कोदंड शक्ति के साथ संयम का भी प्रतीक है. भगवान श्रीराम ने कोदंड का प्रयोग तभी किया जब धर्म की रक्षा की जरूरत पड़ी. उन्होंने समुद्र को साधने के लिए कोदंड उठाया था. रामेश्वरम, धनुषकोडी (तमिलनाडु) के पास कोदंड रामस्वामी मंदिर भी है, जो समुद्र के किनारे स्थित है और 1964 के चक्रवात से बचा था. यही वह स्थान माना जाता है, जहां समुद्र ने श्रीराम से क्षमा मांगी थी. 

रावण का वध भी उन्होंने इसी कोदंह से किया था. इसलिए कोदंड को अहंकार या आक्रामकता नहीं, बल्कि मर्यादा, त्याग और न्यायपूर्ण संघर्ष का प्रतीक माना जाता है. भारतीय संस्कृति में कोदंड यह संदेश देता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव सत्य और धर्म के पक्ष में ही होना चाहिए. इसी कारण कोदंड आज भी श्रद्धा, आस्था और राष्ट्रधर्म के प्रतीक के रूप में विशेष महत्व रखता है.

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