Adhik Maas 2026: 2026 में 13 महीने! जानें कब से कब रहेगा अधिकमास और क्या है इसका महत्व?

Adhik Maas 2026: इस साल 13 महीने क्यों होंगे? जानें अधिकमास कब से कब तक रहेगा, इसका महत्व, कारण और इस दौरान किए जाने वाले शुभ-अशुभ कार्य.

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अधिक मास क्यों आता है? (Photo: ITG) अधिक मास क्यों आता है? (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:30 AM IST

Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना 'अधिक मास' कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है.

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कब पड़ेगा अधिकमास 2026?

पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा.

इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी

अधिकमास क्यों आता है?

अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है.

एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है.
वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का.

हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है.

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अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?

अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है.

इस दौरान ना करें ये काम

अधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए.

क्या खास है पुरुषोत्तम मास?

अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.

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