राजस्थान: नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मामले में बड़ा खुलासा, दिल्ली-इंदौर और UP तक हुई सप्लाई

राजस्थान में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन 'टोसिन' के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है, जिसमें इसकी सप्लाई कोटा के अलावा दिल्ली, इंदौर और गोंडा तक होने की बात सामने आई है. सरकार ने कंपनी जैक्सन लेबोरेट्रीज पर कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं. कोटा में 16 हजार इंजेक्शन मंगाए गए थे, जिनमें से बड़ी संख्या अस्पतालों में भेजी गई. पांच महिलाओं की मौत के बाद जांच शुरू हुई.

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10 हजार इंजेक्शन कोटा मेडिकल कॉलेज के जेके लोन अस्पताल भेजे गए. (Photo: Representational) 10 हजार इंजेक्शन कोटा मेडिकल कॉलेज के जेके लोन अस्पताल भेजे गए. (Photo: Representational)

शरत कुमार

  • जयपुर,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:15 PM IST

राजस्थान में ऑक्सीटोसिन साल्ट की कथित नकली दवा 'टोसिन' को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. राज्य सरकार की जांच में सामने आया है कि इस इंजेक्शन की सप्लाई केवल कोटा तक सीमित नहीं थी, बल्कि नई दिल्ली, इंदौर और उत्तर प्रदेश के गोंडा तक भी की गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित राज्यों को इसकी सूचना भेज दी गई है.

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राजस्थान सरकार ने टोसिन इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी जैक्सन लेबोरेट्रीज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है. सरकार ने कंपनी पर कोर्ट में मामला दर्ज कराने के आदेश दे दिए हैं. जांच में यह भी सामने आया कि कोटा में इस दवा की सप्लाई राजस्थान मेडिकल हॉल के संचालक महेश मित्तल द्वारा की गई थी.

16 हजार इंजेक्शन मंगाए गए
जानकारी के अनुसार, 23 फरवरी और 3 मार्च को कुल 16 हजार इंजेक्शन मंगाए गए थे. इनमें से 10 हजार इंजेक्शन कोटा मेडिकल कॉलेज के जेके लोन अस्पताल भेजे गए, जबकि 2479 इंजेक्शन न्यू मेडिकल कॉलेज को सप्लाई किए गए थे.

क्या इसी इंजेक्शन से हुई पांच महिलाओं की मौत?
मामला तब गंभीर हुआ जब पांच महिलाओं की मौत के बाद एम्स दिल्ली की टीम जांच के लिए कोटा पहुंची. टीम ने मौतों के कारणों की जांच से पहले इस्तेमाल की गई दवाओं की क्वालिटी जांचने की सलाह दी. इसके बाद इंजेक्शन के नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा गया.

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सहायक औषधि नियंत्रक देवेंद्र गर्ग ने बताया कि ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल प्रसव को आसान बनाने और डिलीवरी के बाद होने वाले ब्लीडिंग को कम करने के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा कि अगर इंजेक्शन असर नहीं दिखा रहा था, तो मरीज की स्थिति के अनुसार वैकल्पिक दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता था.

देवेंद्र गर्ग ने यह भी कहा कि अगर प्रसव के दौरान ब्लीडिंग कम नहीं हो रहा था, तो डॉक्टरों को दवा के प्रभाव का मूल्यांकन करना चाहिए था. हालांकि, पूरे मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या जिम्मेदारी तय करने का फैसला विशेषज्ञ जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही किया जाएगा.

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