पानी से भरी मार्बल खदान बनी मौत का कुआं, 72 घंटे तक फंसा रहा मजदूर का शव

राजस्थान के मकराना मार्बल खनन क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे ने खनन सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पानी से भरी गहरी खदान में गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि उसका शव 72 घंटे तक बाहर नहीं निकाला जा सका. घटना को लेकर प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली भी निशाने पर है.

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 72 घंटे तक खदान में फंसा रहा मजदूर का शव (Photo: itg) 72 घंटे तक खदान में फंसा रहा मजदूर का शव (Photo: itg)

केशाराम गढ़वार

  • डीडवाना-कुचामन ,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:18 AM IST

राजस्थान मे डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना मार्बल खनन क्षेत्र के माताभर रेंज में पानी से भरी खदान एक मजदूर के लिए मौत का कुआं बन गई. खदान में काम कर रहे मजदूर रामनिवास जाट का पैर फिसलने से वह गहरे पानी में गिर गया. हादसे में उसकी मौत हो गई और शव 72 घंटे तक खदान में फंसा रहा.अंत में रविवार दोपहर कड़ी मशक्कत के बाद शव बाहर निकाला जा सका.

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गुरुवार देर रात्रि माताभर मार्बल खदान में कार्यरत रामनिवास जाट पुत्र हनुमानराम जाट, निवासी जाखली का पैर फिसल गया था और वह पानी से भरी गहरी खदान में जा गिरा. रात का अंधेरा और खदान में अत्यधिक जलभराव होने के कारण तत्काल रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका.

शुक्रवार सुबह से प्रशासन, खनन विभाग और स्थानीय टीमों ने मोटर पंपों के जरिए पानी निकालने का अभियान शुरू किया. लगातार तीन दिनों तक दिन-रात पानी पंप किया गया, लेकिन खदान की गहराई और भारी जलभराव के कारण शव तक पहुंचना बेहद मुश्किल रहा.

रविवार दोपहर करीब 12 बजे पानी का स्तर काफी नीचे आने पर शव दिखाई दिया. इसके बाद क्रेन की मदद से शव को बाहर निकाला गया. मौके पर मौजूद पीएमओ डॉ. रामनिवास आंवला की मेडिकल टीम ने पोस्टमार्टम किया और शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया.

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 नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने घटना पर सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि 72 घंटे तक मजदूर का शव खदान में फंसा रहा, लेकिन कोई उच्च अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. SDRF टीम के पास पर्याप्त क्षमता वाली मोटरें तक उपलब्ध नहीं थीं.

बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधे सवाल किया कि यदि सरकार को आरएलपी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों से फुर्सत मिल जाए तो पीड़ित परिवार की हालत पर भी ध्यान दे. उन्होंने NDRF टीम भेजने और खदानों में आधुनिक रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध कराने की मांग की. स्थानीय लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश व्याप्त है.

 

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