राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले बड़ा बदलाव किया गया है. राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए लागू 'दो से अधिक संतान' संबंधी अयोग्यता को समाप्त कर दिया है. अब इस आधार पर किसी भी व्यक्ति को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जाएगा.
25 मार्च 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, राजस्थान पंचायती राज कानून में संशोधन किया गया है. इसके बाद दो से अधिक संतान होने की वजह से उम्मीदवार को अयोग्य घोषित करने का प्रावधान खत्म हो गया है.
इस बदलाव के बाद अब पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की पात्रता तय करते समय उनकी संतानों की संख्या को आधार नहीं बनाया जाएगा. माना जा रहा है कि आगामी पंचायत चुनाव में इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि पहले कई संभावित उम्मीदवार केवल इस नियम के कारण चुनाव नहीं लड़ पाते थे.
सितंबर से नवंबर के बीच हो सकते हैं पंचायत चुनाव
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव सितंबर से नवंबर 2026 के बीच कराए जा सकते हैं. इसके संकेत राज्य सरकार की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में दायर याचिका से मिले हैं. सरकार ने अदालत से 31 जुलाई तक चुनाव कराने की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है.
सरकार ने अपनी याचिका में बताया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग से राजनीतिक आरक्षण पर रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है. राज्य की करीब 50 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग की है. ऐसे में आरक्षण तय किए बिना चुनाव कराना उचित नहीं होगा. इसलिए चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए.
सरकार ने राज्य निर्वाचन आयोग के पत्र का भी हवाला दिया है. आयोग के अनुसार, सरकार से आरक्षण संबंधी जानकारी मिलने के बाद चुनाव प्रक्रिया पूरी करने में लगभग 90 दिन लगेंगे. आयोग ने नगर निकाय चुनाव दो चरणों में कराने के लिए 40 दिन और पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव चार चरणों में कराने के लिए 50 दिन का समय मांगा है.
सरकार के जवाब से संकेत मिलता है कि यदि 31 अगस्त तक आरक्षण संबंधी जानकारी निर्वाचन आयोग को मिल जाती है, तो पंचायत और निकाय चुनाव सितंबर से नवंबर के बीच कराए जा सकते हैं.
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को 31 जुलाई तक हर हाल में चुनाव कराने का निर्देश दिया था. साथ ही ओबीसी आयोग को 20 जून तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए भी कहा गया था.
शरत कुमार