राजस्थान की राजधानी जयपुर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े स्लीपर सेल का भंडाफोड़ हुआ है. राजस्थान पुलिस की एंटी टेररिज्म स्क्वाड ने जैश से जुड़ी एक महिला को गिरफ्तार किया है. वो जयपुर में स्लीपर सेल के तौर पर काम कर रही थी. पाकिस्तान स्थित एक हैंडलर के संपर्क में थी.
मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर ATS ने कार्रवाई की है. गिरफ्तार महिला की पहचान बबीबा धाकड़ के तौर पर हुई है. जांच एजेंसियां अब उसके नेटवर्क और संपर्कों को खंगालने में जुटी हैं. बबीबा धाकड़ ने ऑनलाइन कलमा पढ़ने के बाद इस्लाम धर्म को कबूल कर लिया था.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसने धर्म बदलने के बाद अपना नाम 'खदीजा' रख लिया था. वो सोशल मीडिया के जरिए जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर के संपर्क में थी. एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि उसका संपर्क किस स्तर तक था और क्या वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी.
सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं. महिला के डिजिटल फुटप्रिंट, सोशल मीडिया एक्टिविटी और कथित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है. ATS और इंटेलिजेंस एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि जैश-ए-मोहम्मद ने किस तरह महिला को अपने नेटवर्क से जोड़ा था.
बताते चलें कि इसी साल जनवरी में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर मुंबई से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोसाब आदम उर्फ कलाम कल्याण और मोहम्मद हमद कोल्लारा के तौर पर हुई थी.
दोनों आरोपी दिल्ली में एक घातक आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे. गिरफ्तारी के बाद दोनों को आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने उनके नेटवर्क और संपर्कों को खंगालना शुरू किया. दोनों आरोपी कथित तौर पर बेहद कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे.
उनके तार जैश-ए-मोहम्मद के साथ इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े होने की आशंका थी. वे 'मिशन खिलाफत' और 'सोल्जर्स ऑफ प्रॉफेट' जैसे ऑनलाइन चरमपंथी नेटवर्क के संपर्क में थे. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इनका ब्रेनवॉश किया गया और कट्टरपंथ की ओर धकेला गया.
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, दोनों अबू हुफेजा नाम के एक शख्स के संपर्क में थे. माना जाता है कि अबू हुफेजा जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हुआ है और ऑनलाइन भर्ती नेटवर्क को सक्रिय करने में भूमिका निभाता है. ऑनलाइन माध्यमों से युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लगातार मामले सामने आ रहे हैं
देव अंकुर