राजस्थान के पाली जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने वर्षों पुरानी परंपराओं के बीच एक नया अध्याय जोड़ दिया. जिस समाज को घूंघट और पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है, उसी समाज में पहली बार एक 12 साल की बालिका को गांव का ठाकुर और उत्तराधिकारी घोषित किया गया. यह ऐतिहासिक रस्म पाली जिले के खैरवा ठिकाने में निभाई गई, जहां ठाकुर हरीशचंद्र जोधा के निधन के बाद उनकी पुत्री तेजस्वी कुमारी जोधा को उत्तराधिकारी बनाया गया.
इस समारोह में 25 से अधिक गांवों के राजपरिवारों और ठाकुर परिवारों के सदस्य मौजूद रहे. सभी की सहमति और उपस्थिति में पूर्व राजवंशों की परंपरा के अनुसार तेजस्वी कुमारी जोधा का राजतिलक किया गया. समारोह के दौरान जोधपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से भेजी गई पारंपरिक पाग तेजस्वी कुमारी जोधा के सिर पर बांधी गई. यह रस्म पूर्व राजपरिवार के प्रतिनिधि ने पूरी की. इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनका पूजन और अभिषेक किया गया.
रक्त से किया गया तिलक
राजतिलक की सबसे खास रस्म रक्त तिलक रही. राजपुरोहित शंकर सिंह ने तलवार से अपने अंगूठे पर हल्का चीरा लगाया और उसी रक्त से तेजस्वी कुमारी जोधा के मस्तक पर तिलक किया. इसके बाद उन्हें खैरवा गढ़ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया. बताया गया कि पूर्व राजवंशों की यह पारंपरिक रस्म करीब 65 साल बाद निभाई गई. इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, राजपरिवारों के सदस्य और दूर-दराज से आए अतिथि मौजूद रहे. पूरा गढ़ पारंपरिक माहौल में नजर आया. समारोह के दौरान चंवर डुलाए गए और चांदी के दंड लिए लोग भी परंपरागत वेशभूषा में मौजूद रहे.
25 से अधिक गांवों की सहमति से हुआ फैसला
तेजस्वी कुमारी जोधा को उत्तराधिकारी बनाए जाने का फैसला केवल परिवार तक सीमित नहीं रहा. इसमें 25 से अधिक गांवों के राजपरिवारों और ठाकुर परिवारों की सहमति भी शामिल रही. इसी सामूहिक सहमति के बाद परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें गांव की नई ठाकुर घोषित किया गया.
राजस्थान में पहली बार बनी बालिका ठाकुर
जानकारी के अनुसार राजस्थान में यह पहला अवसर माना जा रहा है, जब किसी ठिकाने में एक बालिका को इस तरह की पारंपरिक रस्मों के साथ ठाकुर और उत्तराधिकारी घोषित किया गया. इस कारण यह समारोह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया. परंपरा, इतिहास और बदलते समय का यह अनोखा संगम देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. इस आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक राजपूती रीति-रिवाज और पूर्व राजपरिवार की परंपराओं का पालन किया गया. समारोह के दौरान मौजूद लोगों ने इसे ऐतिहासिक पल बताया.
भारत भूषण जोशी