राजस्थान के हाड़ौती अंचल में चंबल नदी के किनारे स्थित एक नेचुरल (Natural) कुंड आज भी लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है. करीब 200 से 300 साल पुराने इस प्राचीन कुंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पानी मौसम के विपरीत अपना तापमान बदल लेता है. कड़ाके की सर्दी में इस कुंड से गर्म पानी निकलता है, जबकि भीषण गर्मियों में यही पानी बर्फ जैसा ठंडा महसूस होता है. यही अनोखी विशेषता इसे आम जलस्रोतों से बिल्कुल अलग बनाती है.
स्थानीय निवासी और मंदिर के पुजारी पवन पंचोली बताते हैं कि इस नेचुरल कुंड का निर्माण विशाल चट्टानों को काटकर किया गया था. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें आने वाले पानी का असली स्रोत आज तक रहस्य बना हुआ है. जमीन के नीचे से लगातार बहने वाला यह पानी आखिर कहां से आता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है.
पवन पंचोली के अनुसार उनका परिवार तीन पीढ़ियों से इस कुंड की सेवा करता आ रहा है. सबसे पहले उनके नाना यहां पूजा-पाठ करते थे, फिर उनके पिता ने जिम्मेदारी संभाली और पिछले 25 वर्षों से वे स्वयं यहां नियमित सेवा कर रहे हैं. इस दौरान उन्होंने कभी भी कुंड का पानी सूखते नहीं देखा. इस नेचुरल कुंड का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक भी रहा है. वर्षों पहले जब इलाके में पाइपलाइन और अन्य जलस्रोत उपलब्ध नहीं थे, तब यहां होने वाले धार्मिक आयोजनों और गोठ में भोजन बनाने के लिए इसी कुंड के पानी का इस्तेमाल किया जाता था.
कुंड में नहाने से ठीक हो जाती है कई बीमारियां
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस कुंड के पानी में औषधीय गुण मौजूद हैं. उनका दावा है कि दाद, खाज, खुजली और अन्य चर्म रोगों से पीड़ित लोग यहां स्नान करने आते हैं और उन्हें लाभ मिलता है. इसी विश्वास के चलते दूर-दूर से श्रद्धालु इस कुंड तक पहुंचते हैं. कई लोग इस पानी को बोतलों में भरकर अपने घर भी ले जाते हैं.
मंदिर में स्थापित भगवान का दैनिक अभिषेक और पंचस्नान भी इसी कुंड के पवित्र जल से किया जाता है. यहां से पानी लगातार बहता रहता है और गोमुखी के जरिए सीधे चंबल नदी में जाकर मिल जाता है. श्रद्धालु गोमुखी से गिरती जलधारा के नीचे बैठकर स्नान करते हैं और इसे बेहद पुण्यकारी मानते हैं.
कुंड की स्वच्छता भी इसकी एक बड़ी पहचान है. स्थानीय श्रद्धालु रोज सुबह-शाम यहां पहुंचकर सफाई करते हैं. वहीं पानी का तेज बहाव नीचे जमा होने वाली गंदगी को अपने आप बहाकर चंबल नदी तक पहुंचा देता है. यही वजह है कि सालभर इस नेचुरल कुंड का पानी साफ, पारदर्शी और निर्मल बना रहता है.
चेतन गुर्जर