मुस्लिम-महिला और कैश स्कीम के बावजूद ममता बनर्जी कहां चूक गईं?

पश्चिम बंगाल में एग्जिट पोल के कारण चुनावी माहौल पहले जैसा ही बना हुआ है. एग्जिट पोल में बीजेपी के सरकार बनने की संभावना जताई गई है, जिसे ममता बनर्जी और उनके साथी पूरी तरह खारिज कर रहे हैं - एग्जिट पोल को कुछ देर के लिए सही मान लें, तो ममता बनर्जी के मिशन में कहां कमी रह गई?

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलाकाता की एक चुनावी रैली में. (Photo: PTI) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलाकाता की एक चुनावी रैली में. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:02 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आएंगे, लेकिन तब तक सारी सियासी बहस एग्जिट पोल के इर्द गिर्द ही घूम रही है. एग्जिट पोल की मानें, तो पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. लेकिन, ममता बनर्जी और उनके साथी तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने एग्जिट पोल को खारिज कर दिया है, और वे सभी अपनी सरकार बनने का दावा कर रहे हैं. 

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टुडेज चाणक्या एग्जिट पोल के सर्वे के मुताबिक, बीजेपी को 192 सीटें मिल सकती हैं. तो वहीं, 294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में TMC गठबंधन को 100 सीटों पर ही सिमट जाने की संभावना जताई गई है. 

सोशल साइट X पर एक वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने कहा है, एग्जिट पोल का इस्तेमाल तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का हौसला तोड़ने के लिए किया जा रहा है. ममता बनर्जी कहती हैं, पिछले चुनावों में भी इसी तरह के ट्रेंड दिखाए गए थे, लेकिन असली नतीजे अलग आए थे.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने टीएमसी कार्यकर्ताओं से कहा है कि 4 मई को वोटों की गिनती के दिन वे पूरी तरह सतर्क रहें, और काउंटिंग सेंटर पर नजर बनाए रखें. ममता बनर्जी  का कहना है, मैं अपने कार्यकर्ताओं से कहूंगी कि काउंटिंग डे पर अलर्ट रहें… अपने उम्मीदवारों की सुरक्षा करें.

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पश्चिम बंगाल में दो चरणों में हुए मतदान में पहली बार 90 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. SIR प्रक्रिया में 90 लाख से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हट गए हैं - लेकिन, सबसे बड़ी बात यह है कि कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई है और न ही किसी की जान गई है.

पक्के बंदोबस्त में कहां कमी रह गई?

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी को रोकने का पहले से ही पूरा बंदोबस्त कर लिया था, लेकिन एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि कोई इंतजाम काम नहीं आया. ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद फिर से तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनाने का दावा किया है. टीएमसी नेता ममता बनर्जी का दावा है कि कि मां-माटी-मानुष की ही सरकार बनेगी. बंगाल की जनता के नाम अपने वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने दावा किया है कि 226 से ज्यादा सीटें लाकर टीएमसी बंगाल में सरकार बनाने जा रही है. 9 मिनट 5 सेकंड के वीडियो संदेश में ममता बनर्जी ने एग्जिट पोल अनुमानों पर भी सवाल उठाते हुए बीजेपी पर तरह तरह के आरोप लगाए हैं.

1. पश्चिम बंगाल चुनाव में M-फैक्टर का खूब बोलबाला रहा. एक एम-फैक्टर तो ममता बनर्जी ही बन गई थीं, विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस नेता की स्ट्रीट फाइटर की छवि. महिला वोटर और मुस्लिम वोट बैंक भी एम-फैक्टर का ही हिस्सा थे, और माछ-भात को भी इसमें शिद्दत से जोड़ दिया गया.  

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2. ममता बनर्जी का M-फैक्टर पहले से ही 'मां, माटी और मानुष' रहा है, बाद में इसमें 'माछ' भी जुड़ गया. कम से कम इस मुद्दे पर ममता बनर्जी ने बीजेपी नेताओं को कैमरे के सामने मछली खाने के लिए मजबूर तो किया ही. बीजेपी उम्मीदवार को हाथ में मछली लेकर चुनाव प्रचार करते भी देखा गया - जाहिर है ये सब बंगाली वोटर के साथ साथ ममता बनर्जी ने मुस्लिम वोटर को अपने साथ बनाए रखने के लिए किया.

3. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए टिकट देने के मामले में भी ममता बनर्जी ने महिला वोटर को संदेश देने की कोशिश की. ममता बनर्जी ने 291 उम्मीदवारों में से 52 महिलाओं को टिकट दिया है. वैसे मौजूदा लोकसभा में भी टीएमसी के 29 सांसदों में से 11 महिलाएं हैं.

4. LGBTQ कम्युनिटी से किसी महिला को राज्यसभा भेजने का क्रेडिट भी ममता बनर्जी ने लिया, और पश्चिम बंगाल में महिला हितों की सबसे बड़ी पैरोकार होने का दावा पेश किया है. सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी LGBTQ कम्युनिटी से संसद पहुंचने वाली पहली महिला बन गई हैं.

5. ममता बनर्जी को लक्ष्मी भंडार योजना से सबसे ज्यादा फायदे की उम्मीद रही होगी. 2026 के बजट में पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि में 500 रुपये हर महीने की बढ़ोतरी की गई है. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने पांच सौ रुपये बढ़ाए थे, और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इसमें और पांच सौ रुपये और जोड़ दिए गए हैं - सामान्य वर्ग की सभी पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये मिलेंगे, सरकार की तरफ से घोषणा की गई थी.

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6. रूपश्री योजना के तहत विवाह के समय 22.02 लाख महिलाओं को 25,000 रुपये की आर्थिक मदद दी गई है. तृणमूल सरकार का दावा है कि रूपश्री योजना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं की नई जिंदगी को सम्मानजनक शुरुआत मिली है. 

7. कन्याश्री योजना ने छात्राओं की शिक्षा में काफी मददगार मानी गई है. करीब 1 करोड़ छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई है, जिस पर 16,554 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं. 

साथ ही, पश्चिम बंगाल सरकार 'मुक्तिर आलो योजना' के तहत सामाजिक रूप से वंचित और पीड़ित महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देती है. 2025 में इस स्कीम पर 1.47 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिसकी बदौलत हजारों महिलाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है - लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो इस बार इन सबका चुनावी फायदा नहीं मिल रहा है.

क्या आई-पैक के खिलाफ एक्शन का भी असर है?

2021 के चुनाव में ममता बनर्जी की जीत में प्रशांत किशोर की बड़ी अहम भूमिका थी. प्रशांत किशोर ने तृणमूल कांग्रेस को सत्ता तो दिलाई ही, बीजेपी के 100 सीटें भी नहीं जीत पाने वाली उनकी भविष्यवाणी भी सही हुई - लेकिन एग्जिट पोल में इस बार ममता बनर्जी को 100 सीटों पर ही सिमटते बताया गया है. 

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प्रशांत किशोर तो अब बिहार में राजनीति कर रहे हैं, लेकिन उनकी ही बनाई संस्था आई-पैक को ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव कैंपेन के लिए हायर किया है. जनवरी में प्रवर्तन निदेशालय ने कोलकाता में आई-पैक के दफ्तर छापेमारी की, तो ममता बनर्जी मौके पर पहुंच गईं. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, और ईडी ने ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया. सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मुख्यमंत्री के ऐसे व्यवहार को गलत बताया था. 

पश्चिम बंगाल में पहले चरण के मतदान (23 अप्रैल) के ठीक पहले आई-पैक के दफ्तर बंद होने की खबर आई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, आई-पैक की तरफ से भेजे ईमेल में कहा गया था, सभी कर्मचारियों और टीम के सदस्यों से अनुरोध है कि वे 20 दिनों की छोटी छुट्टी लें. इस अवधि के खत्म होने पर यानी 11 मई तक, हम फिर से मीटिंग करेंगे, स्थिति की समीक्षा करेंगे और आगे के कदम तय करेंगे. बताया गया कि आईपैक ने अपने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में कथित तौर पर ये भी कहा था कि कंपनी कानूनी मसले फेस कर रही है, और उसकी वजह से कामकाज कुछ समय के लिए रोकने का फैसला किया गया है. 

तृणमूल कांग्रेस की तरफ से इस मुद्दे पर कहा गया, हमें मीडिया की एक रिपोर्ट के बारे में जानकारी है जिसमें दावा किया गया है कि आई-पैक ने पश्चिम बंगाल में अगले 20 दिनों के लिए अपना अभियान रोक दिया है. यह दावा पूरी तरह निराधार है और जमीनी स्तर पर भ्रम पैदा करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास लगता होता है.

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13 अप्रैल को ईडी ने आई-पैक के को-फाउंडर और डायरेक्टर विनेश चंदेल को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था. 14 अप्रैल को कोर्ट ने 10 दिन के लिए रिमांड पर भेज दिया था. 30 अप्रैल को विनेश चंदेल को कोर्ट से जमानत भी मिल गई क्योंकि ईडी ने जमानत का विरोध नहीं किया. लेकिन, विनेश चंदेल अभी रिहा नहीं हो पाए हैं. 

क्या आई-पैक का कानूनी मुश्किलों से जूझना और फिर कामकाज ठप हो जाना भी ममता बनर्जी के चुनावी प्रदर्शन पर भारी पड़ा है - एग्जिट पोल के नतीजे तो ऐसा ही संकेत दे रहे हैं.   

क्या बीजेपी के चुनावी वादे ममता की योजनाओं पर भारी पड़े?

मुस्लिम वोट बैंक के लिए तो नहीं, लेकिन बीजेपी ने ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने के लिए काउंटर रणनीति बनाई. केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने तो डेरा ही डाल लिया था. और, बीजेपी ने अपने मैनिफेस्टो संकल्प पत्र में बाकी राज्यों की तरह बंगाल के लिए भी डायरेक्ट कैश ट्रांसफर की घोषणा कर डाली. 

1. बीजेपी ने संकल्प पत्र के जरिए पश्चिम बंगाल की महिलाओं को 3000 रुपये देने का वादा किया है. यह ममता बनर्जी की 1500 रुपये वाली लक्ष्मी भंडार योजना (Laxmir Bhandar scheme) की काट नहीं तो क्या है. 

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2. चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने जहां मेनका गुरुस्वामी को राज्यसभा भेज कर महिला सशक्तिकरण के प्रति नए सिरे से अपना इरादा जाहिर किया है, बीजेपी ने आर जी कर रेप-मर्डर केस पीड़ित की मां को उम्मीदवार बनाकर तृणमूल कांग्रेस के शासन में महिला सुरक्षा की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. 

3. बीजेपी ने बंगाल में रेप और महिला सुरक्षा के मुद्दे को भुनाने के लिए एक अलग स्कवॉड बनाने का भी वादा किया है. ‘भयमुक्त बंगाल’ बनाने के प्रोजेक्ट के रूप में पेश कर रही बीजेपी का वादा है कि हर मंडल में महिला थाना और महिला डेस्क बनाई जाएगी. साथ ही, सरकार बनने पर बीजेपी ने बंगाल में गर्भवती महिलाओं को 21000 रुपये की आर्थिक मदद देने, और 75 लाख लखपति दीदी बनाने का भी लक्ष्य रखा है.

और अब ध्यान देने वाली बात ये है कि एग्जिट पोल के नतीजों की वैलिडिटी असली रिजल्ट आने तक ही है - और, अगर एग्जिट पोल के नतीजे 4 मई के रिजल्ट से मैच करते हैं, तो वैलिडिटी अपने आप एक्सटेंड हो जाएगी.

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