दो सीजफायर की दास्तान... ट्रंप और मुनीर ने कैसे खुजलाई एक-दूसरे की पीठ

ईरान युद्ध में कोई ओर छोर न मिलने पर हताश डोनाल्ड ट्रंप ने जिस शातिराना ढंग से आसिम मुनीर को आगे करके सीजफायर करवा लिया है. वैसे ही भारत के साथ हुई जंग में मुंह की खा रहे आसिम मुनीर ने सीजफायर के लिए अमेरिका की शरण ली थी. दिलचस्प ये है कि जंग के मैदान में चोट खाए ये दोनों ‘दोस्त’ सीजफायर के बाद अपनी विजय पताका फहराने से नहीं चूके.

Advertisement
डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर... मुसीबत में, और मुसीबत के साथी. (फोटो- ITG/AI generated) डोनाल्ड ट्रंप और आसिम मुनीर... मुसीबत में, और मुसीबत के साथी. (फोटो- ITG/AI generated)

धीरेंद्र राय

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:03 AM IST

इंटरनेशनल पॉलिटिक्स अब कॉमेडी सर्कस लगने लगी है. हीरो दो हैं – एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप, जो खुद को ‘डीलमेकर ऑफ द सेंचुरी’ बताते नहीं थकते, दूसरी तरफ पाकिस्तान के आसिम मुनीर. अपने मुंह मियां फील्ड मार्शल. जो बकौल ट्रंप हाल ही में ‘ईरान के सबसे बड़ा जानकार’ बन गए हैं. दोनों एक-दूसरे की पीठ खुजला रहे हैं. या कहें कि एक-दूसरे की शर्मिंदगी छुपा रहे हैं. और दोनों ही खुद को ‘विजेता’ बता रहे हैं. ये ऐसा फ्रेंडली मैच है, जिसमें ‘तुम मेरी हार छुपाओ, मैं तुम्हारी छुपाता हूं’ वाला खेल चल रहा है. मई 2025 में जब पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर में बुरी तरह फंस गया, तो मुनीर साहब ट्रंप की शरण में दौड़ पड़े. फिर अप्रैल 2026 में जब ट्रंप ईरान युद्ध में फंस गए और कोई रास्ता न सूझा, तो उन्होंने मुनीर को आगे कर दिया. इस तरह सीजफायर लेने के श्रेय में दोनों का स्कोर 1-1 हो गया है. हालांकि, इसी से एक विसंगति भी जन्म ले रही है कि कहीं दोनों नोबेल शांति पुरस्कार के दावेदार न बन जाएं. मुनीर ने ट्रंप को तो नोमिनेट कर दिया, क्या ट्रंप भी अपने फेवरेट फील्ड मार्शल को ऐसा कोई रिटर्न गिफ्ट देंगे?

Advertisement

चलिए, कहानी शुरू करते हैं. मई 2025. पहलगाम हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया. पाकिस्तानी फौज के ठिकाने धूल में मिल गए, एयरफोर्स हिल गई, बचाव का कोई रास्ता न बचा. चार दिन बाद पाकिस्तान की हालत ऐसी हो गई कि मुनीर साहब को ट्रंप का नंबर मिलाना पड़ा. ‘सर, थोड़ी मदद कर दो, वरना बहुत बुरा हो जाएगा.’ ट्रंप ने तुरंत ‘पीस मेकर’ का रोल प्ले किया. कुछ फोन कॉल्स, कुछ प्रेशर, और 10 मई को सीजफायर. पाकिस्तान ने दुनिया को बताया – ‘देखा, भारत घुटनों पर आ गया, हमारी कूटनीति ने काम किया!’ मुनीर ने राहत की सांस ली और ट्रंप को ‘लाइफ सेवर’ बताया. ट्रंप ने मुनीर को ‘फेवरेट फील्ड मार्शल’ का तमगा दे दिया और खुद को ‘दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने वाला महान नेता’ घोषित कर दिया. कमाल है ना? पाकिस्तान की फौज की इज्जत बच गई, ट्रंप की ‘डीलमेकर’ इमेज चमक गई.

Advertisement

अब घड़ी घूमती है और अप्रैल 2026 आ जाता है. अमेरिका-इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ ‘एपिक फ्यूरी’ नाम का ऑपरेशन शुरू किया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद, तेल 110-120 डॉलर प्रति बैरल, पूरी दुनिया ट्रंप की तरफ देख रही थी. लेकिन छह हफ्ते बाद ट्रंप साहब फंस गए. ईरान नहीं झुका, घरेलू दबाव बढ़ा, बाजार हिले. कोई ठोस प्लान न सूझा तो ट्रंप ने मुनीर को याद किया – ‘यार, वो वाला काम फिर कर दो.’ मुनीर एक पैर पर तैयार थे. पाकिस्तान ने 10-पॉइंट प्लान बनाया, इस्लामाबाद में मीटिंग करवाई और 7 अप्रैल को दो हफ्ते का सीजफायर. ट्रंप ने तुरंत ट्वीट किया – ‘मेरे फेवरेट फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कमाल कर दिया. ईरान को वो सबसे अच्छा जानता है.’

पहले मुनीर ट्रंप की शरण में, अब ट्रंप मुनीर की शरण में. शर्मिंदगी बचाने का बिल्कुल परफेक्ट सिस्टम. सीजफायर होते ही दोनों ने ‘विजय’ का ढोल पीटना शुरू कर दिया. पाकिस्तान ने क्रेडिट लिया – ‘हमने ईरान को मनाया, अमेरिका को एग्जिट रैंप दिया, हमारी कूटनीति विश्व स्तर पर चमकी.’ ट्रंप ने कहा – ‘ईरान ने सीजफायर मांगा, हमने दे दिया. हमने मिलिट्री ऑब्जेक्टिव पूरा कर लिया, बिना फुल वॉर के.’ बिल्कुल वैसा ही जैसा पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद कहा था – ‘भारत सीजफायर के लिए तैयार हो गया, हम मजबूत रहे.’ दोनों तरफ एक ही स्क्रिप्ट, बस किरदार बदल गए. हार को जीत में बदलने का ये जादू सचमुच देखने लायक है!

Advertisement

ट्रंप मुनीर को ‘फेवरेट फील्ड मार्शल’ कह रहे हैं, मुनीर ट्रंप को ‘विश्व शांति का रक्षक’. मुनीर तो ट्रंप को नोबेल के लिए नामांकित कर भी चुके हैं. पाकिस्तानी मीडिया मुनीर को ‘हीरो ऑफ द ईयर’ बता रहा है, अमेरिकी मीडिया ट्रंप को ‘डील ऑफ द सेंचुरी’ का क्रेडिट दे रहा है. दुनिया पूछ रही है कि असली शांति कहां है? ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाक तनाव तो कम नहीं हुआ, बस थोड़ा टाल दिया गया. ईरान सीजफायर के बाद भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव बरकरार है, प्रॉक्सी हमले जारी हैं. लेकिन दोनों ‘विजेता’ बनकर घूम रहे हैं. ट्रंप की पॉलिटिकल इमेज चमकी, मुनीर की घरेलू पावर बढ़ गई. पाकिस्तान को शायद फिर कुछ अमेरिकी मदद मिल जाए, ट्रंप को ‘स्ट्रॉन्ग लीडर’ का सर्टिफिकेट.

असली मुसीबत तो नोबेल पीस प्राइस देने वाली कमेटी की होने वाली है. एक तरफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान के आसिम मुनीर ईरान युद्ध को लेकर अमन के अगुवा बने हुए हैं. दूसरी ओर, ट्रंप हैं जो 2026 की शुरुआत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से उठवा कर करते हैं. और फिर ईरान पर बेतहाशा बमबारी करवाने के बाद सीजफायर की मुद्रा में चले जाते हैं. MAGA की दुनिया में ट्रंप गॉड ऑफ पीस हैं, तो मुनीर हैं मैसेंजर ऑफ गॉड. ऐसे में कौन बनेगा 2026 का सबसे बड़ा ‘शांति दूत’? ट्रंप या मुनीर? या फिर दोनों साथ में?

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement