बिहार चुनाव के सबक यूपी में आजमाएंगे राहुल गांधी? रायबरेली दौरे में दिखे बदले तेवर

राहुल गांधी के रायबरेली दौरे में पिछली बार की तुलना में तेवर काफी नरम दिखे. मनरेगा चौपाल में राहुल गांधी ने लोगों से बातचीत की, केंद्र सरकार पर हमला भी बोला, लेकिन लहजा थोड़ा बदला हुआ था. समाजवादी कार्यकर्ताओं से मुलाकात और इलाके में लगे पोस्टर बता रहे हैं कि राहुल गांधी गठबंधन को भी खास तवज्जो दे रहे हैं.

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रायबरेली में मनरेगा चौपाल के दौरान लोगों से मिलते राहुल गांधी. (Photo: PTI) रायबरेली में मनरेगा चौपाल के दौरान लोगों से मिलते राहुल गांधी. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST

केरल के बाद राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे पर थे. लेकिन जो तेवर और तल्खी केरल में दिखी, रायबरेली में राहुल गांधी के हमले कम आक्रामक महसूस किए गए. केरल में कुछ ही दिन बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में अगले साल. 2027 में.

केरल में राहुल गांधी का कहना था, केरल के लोग चुप नहीं रह सकते और चुनावों के माध्यम से अपनी आवाज उठाएंगे. राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस पर लोगों को बोलने से रोकने का आरोप लगाया. केंद्र की बीजेपी सरकार का विरोध तो राहुल गांधी रायबरेली में भी कर रहे थे, लेकिन बड़े ही धैर्य के साथ. यहां तक कि सितंबर के अपने पिछले रायबरेली दौरे से भी थोड़े अलग अंदाज में.

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राहुल गांधी रायबरेली दौरे में ‘मनरेगा बचाओ चौपाल’ में भी शामिल हुए. मनरेगा को बदल देने के लिए निशाने पर तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे, और राहुल गांधी की जुबान पर अंबानी-अदाणी का भी नाम आया, लेकिन लहजा पहले जैसा नहीं था. राहुल गांधी सीधा, सटीक और सहज तरीके से लोगों से संवाद कर रहे थे. 

राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बात की, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी मिले. और, ये बिहार चुनाव के मुकाबले यूपी में राहुल गांधी के गठबंधन पर ज्यादा जोर की तरफ इशारा कर रहा है - रायबरेली में राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव के लगे पोस्टर भी उसी बात को आगे बढ़ा रहे हैं. 

मनरेगा को मुद्दा बनाने की कोशिश

19 जनवरी, 2026 से पहले राहुल गांधी 10 सितंबर, 2025 को रायबरेली गए थे. 21 जनवरी को सुबह लौटना था, लेकिन एक दिन पहले ही शाम को दिल्ली पहुंच गए. पिछली बार जब राहुल गांधी रायबरेली में एक कार्यक्रम में जा रहे थे, तभी पत्रकारों से सामना हुआ तो बोले, हमारा मुख्य नारा 'वोट चोर, गद्दी छोड़' है. 

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ये नारा राहुल गांधी ने तब गढ़ा था जब बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की तरफ से एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही थी. तब राहुल गांधी ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली थी, और जब भी मीडिया का माइक पास आता एक ही नारा बोलते, वोट चोर गद्दी छोड़. तब तो राहुल गांधी का कहना था कि वो नारा पूरे देश में प्रभावी साबित हुआ है, और ‘आने वाले समय में हम इसे बार-बार और भी प्रभावशाली तरीकों से साबित करेंगे.’

निशाने पर तो इस बार भी केंद्र की बीजेपी सरकार ही थी, क्योंकि यूपी कांग्रेस के मनरेगा विरोध चौपाल में भी हिस्सा लेना था. राहुल गांधी ने चौपाल में हिस्सा लिया और मनरेगा मजदूरों से बात की. और, आरोप लगाया कि मनरेगा का गला घोंटा जा रहा है. 

राहुल गांधी का कहना था, नरेंद्र मोदी चाहते हैं... मनरेगा योजना खत्म हो जाए, ताकि जो पैसा बहनों और मजदूरों को जाता है, वो सीधे अंबानी, अडानी और बड़े-बड़े उद्योगपतियों के पास चला जाए... सामने से तो ये नहीं कर सकते, इसलिए धीरे-धीरे मनरेगा का गला घोंटा जा रहा है.

कांग्रेस नेता ने मनरेगा मजदूरों को भरोसा दिलाते हुए सपोर्ट भी मांगा, और समझाया कि मौजूदा सरकार चाहती क्या है? बोले, आपके सारे हक छीन लिए जाएं... सारी योजनाएं खत्म कर दी जाएं... योजनाओं का पैसा अंबानी और अडानी जैसे उद्योगपतियों को दिया जाए... आपकी जमीन अंबानी और अडानी के हवाले कर दी जाए, और आप सब भुखमरी की ओर चले जाएं... ये इनका मकसद है... हमें एक साथ खड़ा होना है.

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यूपी में गठबंधन को अहमियत देने का संकेत

2025 के बिहार चुनाव में कांग्रेस को कुल जमा 6 सीटें ही मिल पाई्ं. वो भी तब जब राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा में बहुत मेहनत की, और कांग्रेस की एक्सटेंडेड कार्यकारिणी की बैठक भी पटना में की गई. राहुल गांधी तो दिल्ली चुनाव के बीच ही समय निकालकर बिहार दौरा शुरू कर चुके थे - और आरजेडी नेतृत्व उनके निशाने पर नजर आता था.   

वोटर अधिकार यात्रा में भी राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव को आगे नहीं आने दिया, और न ही उनको महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद का चेहरा ही मंजूर किया. जबकि तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी को विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार भी बताया था. बाद में वाइल्ड कार्ड प्रक्रिया की तरह दिल्ली से कांग्रेस नेता अशोक गहलोत को भेज कर तेजस्वी यादव को सीएम चेहरा, और मुकेश कुमार सहनी को डिप्टी सीएम का उम्मीदवार घोषित किया गया - बाकी सीट बंटवारे से लेकर फ्रेंडली मैच तक जो कुछ भी हुआ, नतीजे गवाह हैं. 

यूपी को लेकर राहुल गांधी अभी से अलर्ट लगते हैं. कोशिश तो बिहार में भी और डैमेज होने से बचाने की भी है. बिहार के सभी कांग्रेस विधायकों को दिल्ली बुलाया गया है. विधायकों को लेकर हड़कंप तब मचा जब मकर संक्रांति पर कांग्रेस के दही-चूड़ा भोज में एक भी विधायक नहीं पहुंचा - और आशंका जताई जाने लगी कि वे कांग्रेस छोड़कर नीतीश कुमार की जेडीयू में जा सकते हैं. विधायकों के साथ दिल्ली में 23 जनवरी को राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बात करने वाले हैं.

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राहुल गांधी के रायबरेली दौरे के वक्त एक खास पोस्टर ने भी ध्यान खींचा है. ये पोस्टर कई इलाकों में लगाए गए हैं. पोस्टर में राहुल गांधी और अखिलेश यादव को 2027 और 2029 के लिए INDIA गठबंधन के कप्तान के रूप में पेश किया गया है. पोस्टर में दोनों नेताओं को PDA के रक्षक के रूप में दिखाया गया है. 

 

रायबरेली में लगे ये पोस्टर और राहुल गांधी का समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलना, बिहार से अलग कहानी कह रहा है. ये यूपी में कांग्रेस की हकीकत से राहुल गांधी का अच्छी तरह वाकिफ होना भी बता रहा है. रायबरेली और अमेठी में कांग्रेस की जीत में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है - वैसे भी बिहार के मुकाबले यूपी की राजनीति में बने रहना कांग्रेस के लिए ज्यादा मायने रखता है.

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