'सनातन' और 'भारत' के मुद्दे पर PM मोदी की रणनीति विशेष संसद सत्र में कुछ यूं दिखेगी

भारत बनाम I.N.D.I.A. बहस के बीच सनातन धर्म विवाद एक अलग ही एजेंडे के रूप में सेट हो रहा है. अब बीजेपी अपने वोटर को आसानी से समझा सकती है कि विपक्ष ने गठबंधन INDIA तो बनाया ही है, हिंदू विरोध में जिसका एकमात्र लक्ष्य सनातन का अपमान करना है.

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संसद के विशेष सत्र का एजेंडा तो सेट है, सिर्फ ऐलान बाकी है संसद के विशेष सत्र का एजेंडा तो सेट है, सिर्फ ऐलान बाकी है

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 12:19 PM IST

संसद का विशेष सत्र बुलाये जाने की घोषणा तो कर दी गयी, लेकिन एजेंडा नहीं बताया गया है. संसद सत्र को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख ये सवाल पूछा है. और अपनी तरफ से कांग्रेस नेता ने ये भी बता दिया है कि विशेष सत्र को लेकर विपक्ष की क्या अपेक्षा होगी. विपक्ष के एजेंडे की लिस्ट में महंगाई-बेरोजगारी से लेकर अदाणी के मुद्दे से लेकर जातीय जनगणना तक का जिक्र है. 

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इसी बीच, टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन भी इस मुद्दे को लेकर सोशल साइट X पर एक कोरे कागज की तस्वीर पोस्ट की है और उसके पहले एक कैप्शन भी डाला है - यही एजेंडा है. टीएमसी नेता के कटाक्ष को समझें तो यही कह रहे हैं कि विशेष सत्र का कोई एजेंडा नहीं है. 

अगर सोनिया गांधी और डेरेक ओ'ब्रायन जानबूझकर ये सब कर रहे हैं तो बात अलग है, लेकिन हाल फिलहाल जिस तरह से खबरें आ रही हैं और बीजेपी नेता सक्रिय हैं, विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. ब्लॉक के नेताओं को ये तो समझ आ ही रहा होगा कि सब कुछ सेट हो चुका है, बस घोषणा होना बाकी है. 

I.N.D.I.A. बनाम भारत वाली बहस भी तो एक एजेंडा ही है

I.N.D.I.A. बनाम भारत की जो बहस अभी सड़क पर हो रही है, संसद में भी ये मुद्दा उठना ही है. अब विपक्ष चाहे हंगामा करे या फिर बहिष्कार, सारे अधिकार उसके पास हैं - और ठीक वैसे ही चीजों को अपने हिसाब से करने का मैंडेट सरकार के पास है. धारा 370 से लेकर दिल्ली सर्विसेज बिल प्रत्यक्ष उदाहरण हैं. कृषि कानूनों को वापस कराने का क्रेडिट तो किसानों के पास है, विपक्ष को उससे क्या लेना देना.

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सरकारी कामकाज में इंडिया की जगह भारत का इस्तेमाल तो औपचारिक रूप से होने ही लगा है. प्रेसिडेंट ऑफ भारत, भारत के प्रधानमंत्री और जी20 सम्मेलन में कार्ड पर इंडिया ऑफिशियल की जगह भारत के अधिकारी लिखा हुआ देखा ही जा रहा है - कहीं कोई कसर बाकी होगी तो, मुहर लगाने के लिए देश की संसद है ना!

‘सनातन धर्म है, था और रहेगा’ - ये एजेंडा नहीं तो क्या है?

सनातन धर्म विवाद के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों को अपना मंत्र दे दिया है - और देखा जाये तो ये बोल कर कि ‘सनातन धर्म है, था और रहेगा’, बीजेपी का एजेंडा भी सेट कर दिया है. 

बीजेपी अपने तरीके से इस मुद्दे को काउंटर कर रही है, अब तो मोदी ने भी सनातन पर विपक्ष के एनकाउंटर के लिए मंत्रियों और नेताओं की पीठ ठोक दी है - अब तो बस देखना है आगे आगे होता है क्या?

सनातन मुद्दे पर मंत्र के साथ साथ मिली तो नसीहत भी है, लेकिन लब्बोलुआब यही है कि जंग के मैदान में गोला बारूद के साथ उतर जाना है. 

मंत्रियों की एक मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ तौर पर बोल दिया है, उदयनिधि स्टालिन के बयान पर सही तरीके से जवाब देना चाहिये…ये बयान बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिये…सनातन धर्म है, था और रहेगा.

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मोदी ने मंत्रियों को ये सलाह भी दी है कि इंडिया बनाम भारत विवाद पर वे बयानबाजी न करें, ऐसे मामले में सिर्फ अधिकृत व्यक्ति को ही बोलना चाहिये.

जी20 शिखर सम्मेलन के ऐन पहले केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक विशेष बैठक में कहा, 'इतिहास में न जायें, बल्कि संविधान के अनुसार तथ्यों पर टिके रहें… और हां, मुद्दे की समसामयिक स्थिति के बारे में भी बोलें.'

2019 में बीजेपी ने चुनाव से पहले ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का अपना एजेंडा होल्ड कर दिया था, लेकिन 2024 में वो नये कलेवर में सामने आ सकता है. बीजेपी नेताओं, खास तौर पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से ऐसा इशारे भी किये जा रहे हैं. सबसे पहले तो केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा चुनाव में ही मंदिर मुद्दा उछाल दिया था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लेकर अमित शाह ने बताया था कि साल 2024 के पहले दिन ही राम लला के दर्शन के लिए मंदिर के द्वार खोल दिये जाएंगे.

एक तरफ चाक चौबंद इंतजाम हो रखा है, दूसरी ओर आरजेडी की तरफ से बीजेपी को लेकर अगर हिंदू-मुस्लिम को बांटने की बात हो रही है, या फिर कांग्रेस की तरफ से मोहब्बत की दुकान खोलने की, तो क्या हासिल होने वाला है - देखा जाये तो जो बीजेपी चाह रही है, उसके विरोधी उसे थाली में सजा कर परोसते जा रहे हैं. 

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और इस तरह सनातन धर्म विवाद अलग ही एजेंडे के रूप में सेट हो रहा है. अब बीजेपी अपने वोटर को आसानी से समझा सकती है कि विपक्ष ने गठबंधन I.N.D.I.A. तो बनाया ही है, हिंदू विरोध में जिसका एकमात्र लक्ष्य सनातन का अपमान करना है. राम मंदिर के मुद्दे पर बीजेपी पहले से ही समझाती रही है कि कैसे कांग्रेस ने निर्माण में बाधा डालने की कोशिश की.

बीजेपी ने विपक्ष से निपटने की तरकीब खोज ली है

ये तो साफ है कि बीजेपी ने विपक्ष से निपटने की तरकीब खोज ली है, चाहें तो ऐसे भी समझ सकते हैं कि बीजेपी ने विपक्षी गठबंधन को निपटाने की ही तरकीब ढूंढ ली है. 

ये तो अब हर किसी को समझ मेें आने लगा है कि विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. के नाम का ऐलान होते ही बीजेपी की तरफ से भारत की बात होने लगी थी. तभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत ने भी इंडिया की जगह भारत नाम के इस्तेमाल की सलाह दे दी - फिर क्या था, ये एजेंडा भी सेट हो गया. 

और जिस तरीके से बीजेपी नेतृत्व ने I.N.D.I.A. ब्लॉक की घेरेबंदी की है, धीरे धीरे असर भी महसूस किया जाने लगा है. अब अगर आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा कहते हैं कि विपक्षी दलों की अगली बैठक में नाम बदलने पर विचार किया जा सकता है, और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला भी ऐसी ही राय जाहिर करते हैं तो क्या समझा जाएगा.

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I.N.D.I.A. बनाम भारत की बहस को लेकर उमर अब्दुल्ला का कहना है, ‘अगर इसके पीछे कारण ये है कि विपक्षी गठबंधन ने अपना नाम इंडिया रखा है, तो हम अपना नाम बदल देंगे.’

 

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