उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर आजकल सियासी सपने देख रहे हैं. राजनीति में होने के नाते ऐसे सपने देखना स्वाभाविक है. खास बात यह है कि ओमप्रकाश राजभर सपना देखने के बाद सोशल मीडिया पर शेयर भी कर रहे हैं. अपनी हर पोस्ट में अखिलेश यादव को ओमप्रकाश राजभर राजनीतिक तौर पर आगाह करने की कोशिश करते हैं, और आने वाले विधानसभा चुनाव की चुनौतियों के बारे में बताते हैं.
मुद्दे की बात यह है कि ओमप्रकाश राजभर को सपने में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव दिखाई दे रहे हैं. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर ने यह बात सोशल मीडिया के जरिए बताई है. सपने तो और भी देखते होंगे, लेकिन बताया सिर्फ अखिलेश यादव वाला ही है. जो भी नेता विधानसभा या लोकसभा पहुंचता है, सबसे पहले उसकी नजर तो क्रमशः मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर ही पड़ती है. संभव है ये सब सपने में भी दिखाई देते हों, लेकिन जरूरी तो नहीं कि हर सपना शेयर किया ही जाए. निजता भी तो कोई चीज होती है.
अपना सपना शेयर करने के साथ ही, ओमप्रकाश राजभर सोशल साइट X के जरिए अखिलेश यादव को लगातार सलाह भी दे रहे हैं. अखिलेश यादव को ओमप्रकाश राजभर कभी 'मित्र' तो कभी 'राजा बाबू' कहकर संबोधित कर रहे हैं. 'राजा बाबू' कहने को लेकर ओमप्रकाश राजभर का तर्क है, अखिलेश जी की यह हरकतें देखकर मुझे गोविंदा जी की फिल्म 'राजा बाबू' याद आ रही है, जिसमें गोविंदा जी का किरदार कभी वकील, कभी डॉक्टर, कभी पुलिस अधिकारी और कभी नेता बनता है. सही मायने में कहा जाए तो अखिलेश जी भारतीय राजनीति के 'राजा बाबू' ही हैं.
ओमप्रकाश राजभर के चुनाव कैंपेन का यह नया तरीका लग रहा है. 1 जुलाई को अखिलेश यादव के जन्मदिन पर ओमप्रकाश राजभर ने तोहफे में भी सलाह ही दी थी - और 10 जुलाई की लेटेस्ट पोस्ट में तो ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के करीबी सहयोगियों पर अपने नेता से मुलाकात के लिए पैसे लेने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं.
जब राजभर ने अखिलेश यादव को सपने में देखा
6 जुलाई को सुबह 7:46 की अपनी X पोस्ट में ओमप्रकाश राजभर ने लिखा है, गुड मॉर्निंग अखिलेश जी. उठ जाइए, सुबह हो चुकी है. कितना सोएंगे महाराज? अच्छा सुनिए. आज मैंने सपने में देखा कि आप चुनाव तक आराम की मुद्रा में ही रहने वाले हैं. यानी ऐसे ही सोए रहेंगे.
ओमप्रकाश राजभर का कहना है, सपने से याद आया कि दादरी की फ्लॉप रैली के बाद आपको समझ आ गया कि आपकी जमीन अब खोखली हो चुकी है. इसीलिए कोई रैली नहीं कर रहे हैं. आपके ही 'खासमखास' लोग बता रहे हैं कि उस रैली का हश्र देखकर आप अब कोई दूसरी रैली करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. आप निराश और हताश हो चुके हैं.
फिर अखिलेश यादव को सलाह देते हैं, उठ जाइए महाराज. हम तो आपके मित्र हैं. मित्रता की वजह से आपकी चिंता रहती है मुझे. सिर्फ यादव और मियां भाई के वोट से काम नहीं बनेगा मित्र. ना ट्विटर, एसी-पीसी काम करेगा. इसलिए उठ जाग मुसाफिर भोर भयो.
2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव ओमप्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़े थे, लेकिन बाद में गठबंधन तोड़ दिया, और बीजेपी के साथ हो गए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री बन गए. ओमप्रकाश राजभर के पास पंचायती राज सहित कई विभाग हैं.
बर्थ डे गिफ्ट में 'बेशकीमती' सलाह
1 जुलाई को ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी ऐसे ही दी थीं. ओमप्रकाश राजभर ने लिखा, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं. ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं.
फिर तंज भरे लहजे में अपनी उलझन साझा करते हुए लिखा, बहुत सोचा कि आपको उपहार में क्या दूं...आप ठहरे बड़े घर के बेटे, पिताजी पूर्व सीएम और रक्षामंत्री रहे, आप खुद पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं, आलिशान बंगलों में जीवन गुजरा है. हम भला क्या दे सकते हैं आपको. मगर उम्र और अनुभव में बड़ा होने के नाते एक बेशकीमती सलाह हम आपको दे सकते हैं. इस सलाह को ही जन्मदिन पर मेरी तरफ से उपहार मानिएगा.
कहते हैं, सलाह यही है कि आप अपनी आलसी और आरामतलबी वाली जिंदगी से जितना जल्दी हो सके बाहर निकलिए... एसी और पीसी वाली राजनीति का जितना जल्दी हो सके त्याग करेंगे उतना आपके लिए अच्छा रहेगा.
अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप
10 जुलाई की अपनी ताजातरीन पोस्ट में ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर बड़ा ही गंभीर आरोप लगाया है. X पर ओमप्रकाश राजभर ने लिखा है, मित्र अखिलेश जी, आपके कुछ कार्यकर्ता अपने किसी काम से हमारे पास आए. जाति से आपके वाले ही हैं. आपसे बहुत प्रभावित भी हैं. कहते हैं, बस भैया की सरकार आ जाए तो ‘आ हा हा, मौज आ जाएगी’. मैंने सोचा आप मित्र हैं तो आपको बता देनी चाहिए.
और फिर बड़ा इल्जाम लगाते हुए कहते हैं, 'आपके यादव कार्यकर्ता मुझसे कहने लगे कि भैया से मिलने जाने पर उनके घेरे के लोग हमसे वसूली करते हैं. कहते हैं कि भैया से फोटो खिंचवाने का ₹5000, हाथ मिलवाने का ₹8000-₹10,000 तक और मिलवाने का तो हिसाब किताब ही नहीं है.'
ओमप्रकाश राजभर का कहना है, गेट पर रेट का काउंटर बंद कीजिए. 20 रुपये चंदा मांग कर कार्यकर्ता को मूर्ख मत बनाइए. बाकी ये सिस्टम चालू रखना या बंद कराना आपका काम है. बंद करा देंगे तो अगले साल हमें अच्छा विपक्ष मिलेगा. यही चलता रहा तो हो सकता है अगले साल नेता प्रतिपक्ष बनाने भर की सीट ना आए.
चुनाव कैंपेन में और भी बहुत कुछ है
1. ओमप्रकाश राजभर 8 जुलाई की अपनी पोस्ट में लिखते हैं, आज सुबह सुबह मैं काम से घर से निकला तो थोड़ी दूर जाते ही जेपीएनआईसी दिखाई दिया. अचानक लोकनायक जय प्रकाश जी का चेहरा मेरी आंखों के सामने आ गया. फिर दिमाग में आपका ख्याल आया. जानते हैं क्यों, सुनिए.
आगे लिखते हैं, मैं सोचने लगा कि लोकनायक जय प्रकाश जी स्वर्ग के जिस कोने में होंगे, वहां बैठे सोच रहे होंगे कि उनके नाम पर राजनीति करने वाले उनके नाम पर इमारत बनाकर करोड़ों, माफ कीजिएगा अरबों डकार गए. मित्र, कम से कम जयप्रकाश नारायण जी के नाम पर बन रही बिल्डिंग में तो घोटाला नहीं करना चाहिए था... यकीन मानिए, जयप्रकाश नारायण जी की पुण्यात्मा का ही श्राप है कि आप नौ साल से सत्ता से बाहर हैं... और आगे भी दोबारा कभी सत्ता में नहीं आएंगे.
2. समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली कामयाबी के बाद PDA फॉर्मूले की राजनीति कर रहे हैं. पीडीए यानी 'पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक', लेकिन बाद के दिनों में अखिलेश यादव पीडीए के 'ए' के कई अलग अलग अर्थ भी बता चुके हैं.
25 जून की अपनी पोस्ट में ओमप्रकाश राजभर ने लिखा है, अखिलेश जी ने आज अपने PDA की नई व्याख्या की. कहा कि PDA में A का मतलब आदिवासी है. A को अल्पसंख्यक और अगड़ा, पहले ही बता चुके हैं. डर ये लग रहा है कि अखिलेश जी किसी दिन कोई सम्मेलन करते हुए यह न कह दें कि A का मतलब आतंकवादी भी होता है.
और फिर कटाक्ष करते हैं, वैसे भी उनकी सरकार अपने कार्यकाल के दौरान वाराणसी सीरियल ब्लास्ट, लखनऊ और फैजाबाद कोर्ट ब्लास्ट के आतंकवादियों के मुकदमे वापस ले चुकी है.
ऐसे ही 4 जुलाई को भी ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को टार्गेट किया है, गांवों में आज भी हम लोगों की मां, बहन, बेटी, बहू और भाई के साथ 'PDA’ यानी ‘पीट देगा अहीर' और हमारे मुंह में आपके स्वजातीय द्वारा आपके ‘चचा का डॉट, डॉट, डॉट' ही तो होता आ रहा है.
3. ओमप्रकाश राजभर 29 जून को लिखते हैं, 'आपके समर्थक यही तो घूम-घूमकर कह रहे हैं कि बस एक मौका मिल जाए, फिर बताते हैं. तो सुन लो, अखिलेश जी! हम बहुजन जातियों के लोग अपने घरों को लुटवाने, जमीनों को कब्जा करवाने, अपनों की हत्या करवाने का मौका आपको कतई नहीं देने वाले. आप सत्रह में हारे, बाईस में पिटे अब सत्ताइस में सपा को सफाचट करेंगे. लिखकर रख लीजिए.'
मृगांक शेखर