कांग्रेस-लेफ्ट ने ममता को अकेला छोड़ा, बंगाल में बदलाव के साथ ‘बदला’

ममता बनर्जी की बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की अपील बंगाल के विपक्षी दलों ने सीधे सीधे ठुकरा दी है. ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर कांग्रेस और लेफ्ट की बिल्कुल एक जैसी ही प्रतिक्रिया आई है. कांग्रेस का तो कहना है कि ममता बनर्जी ने जैसा किया, वैसा ही पा रही हैं.

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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (Photo: PTI) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल चुनाव में 'एकला चलो रे' का रास्ता अख्तियार किया था, लेकिन अब यह मजबूरी बन गई है. भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा को छोड़कर ममता बनर्जी किसी भी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन के लिए तैयार नहीं हुईं. ममता बनर्जी का लेफ्ट दलों से दूरी बनाना तो स्वाभाविक था, लेकिन कांग्रेस से भी वैसी ही दूरी बना ली थीं. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पहले ममता बनर्जी कांग्रेस को दो सीटें देने को तैयार लग रही थीं, लेकिन बाद में उससे भी मुकर गईं.

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ममता बनर्जी के व्यवहार से खफा कांग्रेस नेतृत्व ने बंगाल कांग्रेस यूनिट को अपने स्तर पर सारे फैसले लेने की छूट दे दी. चुनाव कैंपेन में राहुल गांधी ने हिस्सा जरूर लिया, लेकिन रस्मअदायगी जैसा ही. बंगाल में राहुल गांधी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा ही बताया, और सवाल उठाया कि ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी वैसा एक्शन क्यों नहीं लेती, जैसा कांग्रेस नेता के साथ होता है. 

अब जबकि ममता बनर्जी सबका साथ चाहती हैं, कोई भी हाथ मिलाने को तैयार नहीं है. बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली बुरी शिकस्त के बाद ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर मोर्चा बनाने की अपील की थी - लेकिन, कांग्रेस और लेफ्ट दोनों ने ऐसी किसी भी कवायद में शामिल होने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है. 

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संकट में ममता बनर्जी की अपील

ममता बनर्जी के खिलाफ जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर से ही आवाज उठने लगी है, तो बाहर से मदद की क्या उम्मीद होनी चाहिए. तृणमूल कांग्रेस नेताओं को गुस्सा खास तौर पर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से है. एक तो उनका व्यवहार टीएमसी नेताओं को बर्दाश्त नहीं हो रहा है, और दूसरा चुनाव कैंपेन के लिए I-PAC को हायर किया जाना. 

ममता बनर्जी ने जैसे-तैसे सीनियर, समझदार, अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं को मोर्चे पर तैनात कर टीएमसी को बदले हालात में प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश भी की है. चौतरफा चुनौतियों से जूझ रहीं ममता बनर्जी के लिए उनकी सरकार में मंत्री रहे सुजीत बोस की गिरफ्तारी नया झटका है. सुजीत बोस को प्रवर्तन निदेशालय ने नगर निगम भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया है. सुजीत बोस पर बिहार के नेता लालू यादव जैसा ही ही आरोप लगा है, नौकरी के बदले पैसे और फ्लैट लेने का आरोप है. सुजीत बोस को बंगाल में पंडाल किंग के रूप में भी जाना जाता है. कोलकाता के लेक टाउन में श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब की दुर्गा पूजा के सुजीत बोस मुख्य आयोजक हैं. 

शुभेंदु अधिकारी के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी किया था. 9 मई को वीडियो मैसेज में तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी  ने कहा, राज्य में हर जगह चुनाव के बाद हिंसा की गूंज सुनाई दे रही है. मैं सभी BJP विरोधी ताकतों, सभी छात्र और युवा संगठनों, और सभी गैर-सरकारी संगठनों से एकजुट होने का आह्वान करती हूं. हम बीजेपी के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाना चाहते हैं.

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लगे हाथ ममता बनर्जी ने अपनी तरफ से यह भी साफ कर दिया है कि बीजेपी के खिलाफ प्रस्तावित संयुक्त मोर्चा में उनकी कभी कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रही CPI(M) के नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट भी स्वागत योग्य है.

ममता बनर्जी के वीडियो मैसेज पर अपनी प्रतिक्रिया में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, वह राजनीति में अप्रासंगिक हो चुकी हैं.

भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ साझा मंच खड़ा करने की ममता बनर्जी के प्रस्ताव को कांग्रेस, वाम मोर्चा और सीपीआई-एमएल (लिबरेशन) ने सीधे तौर पर ठुकरा दिया है. साथ ही, सभी राजनीतिक दलों ने ममता बनर्जी पर वे सभी आरोप लगाए हैं, जो बीजेपी के इल्जामात हैं. 

ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम कहते हैं, 'बिल्कुल नहीं. हम किसी ऐसे व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेंगे जिसकी पहचान अपराधी, उगाही करने वाले, भ्रष्ट और सांप्रदायिक ताकत के रूप में हो... हम लोगों के साथ खड़े रहेंगे, हाशिए पर रहने वाली आबादी के साथ.'

ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर सीपीआई के राज्य सचिव स्वपन बनर्जी की प्रतिक्रिया है, ममता बनर्जी के साथ हाथ मिलाने का सवाल ही नहीं उठता... उनके शासन के दौरान लोकतंत्र खतरे में था.

कांग्रेस भी ममता पर हमलावर

बंगाल कांग्रेस प्रवक्ता सौम्या आइच रॉय का कहना है, हमें अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा... आपने (ममता बनर्जी) राष्ट्रीय पार्टियों को आमंत्रित किया, कांग्रेस, वामपंथी और अति-वामपंथी दलों की ओर इशारा किया... अति-वामपंथी से आपका क्या मतलब है? क्या आपका मतलब माओवादियों से है, जिन्होंने 25 मई, 2013 को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के 18 नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की थी?

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सौम्या आइच रॉय कहती हैं, राष्ट्रीय पार्टियों के साथ-साथ मैं वामपंथियों और अति-वामपंथियों से भी अपील करती हूं कि वे बंगाल और दिल्ली में एकजुट हों. अगर कोई राजनीतिक पार्टी मुझसे बात करना चाहती है, तो मैं उपलब्ध हूं. यह याद रखना चाहिए कि हमारा पहला दुश्मन बीजेपी है.

ममता बनर्जी के प्रस्ताव पर कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी हमला बोला है, बहुत जल्दी समझ आया उन्हें... बंगाल में बीजेपी तो थी ही नहीं... उन्हें कोलकाता ले जाने का काम आपने किया... आप ही ने कहा था कि ये हमारे नैसर्गिक मित्र हैं... जब सब कुछ हाथ से चला गया, तब आप जाग रही हैं.

ममता बनर्जी के कट्टर विरोधी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी तो जैसे ऐसे मौके का इंतजार ही कर रहे थे. अधीर रंजन चौधरी का कहना है, ममता बनर्जी के जमाने में बंगाल पर जितने अत्याचार हुए उसका नतीजा उन्हें भुगतना ही पड़ेगा... सोच समझ कर कांग्रेस को बंगाल में तबाह करने की सबसे ज्यादा कोशिश ममता बनर्जी ने की... अब वो खुद सजा भुगत रही हैं... सबको बुलाने की कोशिश कर रही हैं... सहारा मांग रही हैं.

हालांकि, अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को मुसीबत से उबरने की सशर्त सलाह भी दी है. कहते हैं, अगर बचना है तो राहुल गांधी को INDIA गठबंधन का नेता मानते हुए दरख्वास्त करें, उसके बाद सोचा जाएगा.

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ममता बनर्जी ने 15 साल पहले लेफ्ट फ्रंट को तो सत्ता से बेदखल किया ही था. लेकिन, लंबी लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देने वाली कांग्रेस को भी धीरे धीरे बंगाल में खत्म कर दिया. लेफ्ट पार्टियों के बाद देखा जाए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की राजनीति से सबसे ज्यादा नुकसान तो कांग्रेस का ही हुआ है. अधीर रंजन को बोलने का हक तो बनता है, क्योंकि बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ अकेले मोर्चे पर डटे रहे.  

चुनाव से पहले 'एकला चलो रे' की नीति अपनाना, और चुनाव हार जाने के बाद 'हम साथ साथ हैं' का नारा देना - ममता बनर्जी की यह फितरत भला किसी को भी कैसे बर्दाश्त हो.

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