शराब घोटाले के फैसले ने केजरीवाल को कई मोर्चे पर दिया बाउंस-बैक का मौका

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब नीति केस में अरविंद केजरीवाल सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत के फैसले को अरविंद केजरीवाल ने सत्य की जीत बताया है - जो उनके लिए निजी तौर पर भी और राजनीतिक रूप से भी बहुत बड़ा संबल है.

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दिल्ली शराब नीति केस में बरी किए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया के सामने फफक कर रो पड़े. जब घर पहुंचे तो पत्नी सुनीता केजरीवाल से गले मिले. (Photo: PTI) दिल्ली शराब नीति केस में बरी किए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल मीडिया के सामने फफक कर रो पड़े. जब घर पहुंचे तो पत्नी सुनीता केजरीवाल से गले मिले. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:24 PM IST

भावुक होने वाला पल तो था ही, लेकिन अरविंद केजरीवाल फफक पड़े. और भावविह्वल मनीष सिसोदिया ने जोर से पकड़कर ढाढ़स बंधाया. यह मौका भारतीय राजनीति के अद्भुत नजारों में से एक था - दोनों का एक साथ इमोशनल होकर खड़ा होना, एक बड़ा मैसेज भी था 

जो बातें अरविंद केजरीवाल रो रोकर कह रहे थे, मनीष सिसोदिया अपने आंसू रोककर कह रहे थे. मीडिया के कैमरे रोते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री कह रहे थे, 'केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है... मैंने केवल अपनी जिंदगी में ईमानदारी कमाई है.'

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करीब साल भर के वनवास के बाद अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में डंके की चोट पर खुद को, और साथियों को 'कट्टर ईमानदार' बोलने का मौका मिला है. असल में, दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने पाया कि बिना सबूत के आरोप साबित नहीं होता है. दिल्ली शराब घोटाला केस में CBI ने कुल 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. लेकिन, अदालत ने सभी को बरी कर दिया है. आबकारी नीति मामले में दिल्ली की अदालत के फैसले पर सीबीआई का कहना है, जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज किया गया या पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया. सीबीआई ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ फौरन दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेगी. 

सत्ता के लिए राजनीतिक जोर आजमाइश अपनी जगह है. लेकिन एक बात तो पक्की है, अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में बाउंस बैक करने का मौका तो मिल ही गया है. और, पंजाब से लेकर गोवा और गुजरात तक, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर नए सिरे से आक्रामक राजनीति का रास्ता खुल गया है. 

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केजरीवाल को कोर्ट से मिला तोहफा

दिल्ली शराब नीति केस में अदालत से बरी किए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'सत्य की जीत हुई... मैं हमेशा कहता था कि भगवान हमारे साथ हैं.' और, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने सोशल साइट X पर लिखा, 'संसार में कोई कितना भी शक्तिशाली हो जाये, शिव शक्ति से ऊपर नहीं हो सकता... सच की हमेशा जीत होती है.'

कोर्ट के फैसले पर पहली प्रतिक्रिया में अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'मोदी जी ने और अमित शाह जी ने मिलके आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा. आम आदमी पार्टी को खत्म करने के लिए, आम आदमी पार्टी के सबसे बड़े पांच नेताओं को जेल में डाल दिया गया. यहां तक कि सीटिंग चीफ मिनिस्टर जो आज तक भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ. सिटिंग चीफ मिनिस्टर को उसके घर से घसीट कर जेल में डाला गया और छह महीने तक जेल में रखा गया. 
हमारे उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जी उनको लगभग दो साल तक जेल में रखा गया. पूरा का पूरा फर्जी केस था. हमारे ऊपर कीचड़ फेंका गया. 24 घंटे टीवी चैनलों के ऊपर डिबेट चलते थे खबरें दिखाई जाती थीं. केजरीवाल भ्रष्ट है.' 

और फूट फूटकर रोते हुए कहा, केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है... मैंने केवल अपनी जिंदगी में ईमानदारी कमाई है. 

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बोले, 'झूठा केस लगाया... और आज ये साबित हो गया... कोर्ट ने कहा है, केजरीवाल कट्टर ईमानदार है. मनीष सिसोदिया कट्टर ईमानदार है. आम आदमी पार्टी कट्टर ईमानदार है. मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि सत्ता के लिए इस तरह से खिलवाड़ मत कीजिए. इस तरह से संविधान से खिलवाड़ मत कीजिए. आपको सत्ता चाहिए. अच्छे काम कीजिए.'

आम आदमी पार्टी का राजनीतिक भविष्य क्या होगा, दिल्ली और बाकी लोगों की अरविंद केजरीवाल के प्रति क्या सोच होगी, ये सब भविष्य की गोद में है. फिलहाल, अरविंद केजरीवाल को बोलने का मौका तो मिल ही गया है. आखिर दिल्ली के कोर्ट से इतना बड़ा तोहफा जो मिला है. 

दिल्ली में वापसी का बड़ा मौका मिला है

2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अरविंद केजरीवाल दिल्ली से काफी दूर हो गए थे. दिल्ली में न तो कहीं वो नजर आ रहे थे, न ही कहीं उनकी आवाज ही सुनाई दे रही थी. सत्ता की राजनीति को दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और संगठन को सौरभ भारद्वाज के हवाले करने के बाद अरविंद केजरीवाल दिल्ली छोड़कर कभी पंजाब, तो कभी गुजरात तो कभी गोवा में देखे जाते थे. 

दिल्ली छोड़ने के बाद अरविंद केजरीवाल के खाते में कम से कम दो उपलब्धियां भी दर्ज हुईं. एक पंजाब की लुधियाना वेस्ट सीट और दूसरी गुजरात की विवासदर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत, जिसके लिए अरविंद केजरीवाल ने पूरी ताकत झोंक दी थी. मनीष सिसोदिया सहित अपनी टीम के सभी मजबूत साथियों के साथ मोर्चे पर डटे हुए थे, और उनको उसका फल भी मिला. 

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जो बातें अरविंद केजरीवाल कोर्ट का फैसला आने के बाद कह रहे थे, वहीं बातें सीबीआई और ईडी के नोटिस पर भी कह रहे थे. वही बातें गिरफ्तार होकर जेल जाने पर भी कह रहे थे, और रिहा होकर आने पर दिल्ली विधानसभा चुनाव कैंपेन में भी. लेकिन, दिल्ली के लोगों ने उनकी एक बात भी नहीं सुनी. न लोकसभा चुनाव में, न ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में - लेकिन, अब इस बात का संतोष होगा कि दिल्ली के चुनावों में फेल हो गए थे, कट्टर ईमानदारी के इम्तिहान में पास हो गए हैं.

अब देखना होगा कि दिल्ली की अदालत के फैसले का अरविंद केजरीवाल को क्या फायदा मिल सकता है? 

1. निजी तौर पर क्या फायदा मिल सकता है? कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में अरविंद केजरीवाल ने मन की बात कह दी है. निश्चित तौर पर अरविंद केजरीवाल की साख पर जो दाग लगा था, साफ तो हुआ ही है. जिस मामले को लेकर जेल जाना पड़ा, ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल को यह बोलने का मौका मिल गया है कि पूरा मामला ही फर्जी था. 

जिस तरह के सवाल अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक विरोधी उठा रहे थे. चाहे बीजेपी नेता हों, चाहे कांग्रेस नेता. चाहे, बरसों तक उनकी साथी रही हों आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल - अब तो अरविंद केजरीवाल और उनके साथी कह ही सकते हैं कि सारे विरोधी मौका देखकर बहती गंगा में हाथ धो रहे थे. 

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2. राजनीतिक रूप से: राजनीति में बने रहने और कामयाब होने के लिए माना जाता है कि इंसान को मोटी चमड़ी का होना पड़ता है. कोर्ट के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल का जो भाव पक्ष दिखा है, लगता तो ऐसा है कि अंदर ही अंदर वो खुद को मुंह दिखाने लायक नहीं मान रहे होंगे. अगर मीडिया के कैमरे पर अरविंद केजरीवाल का रोना राजनीतिक न होकर पूरी तरह पर्सनल है, तब तो बिल्कुल ऐसा ही महसूस होता है. 

बीच में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बीजेपी सरकार के बुलडोजर चलवाने और प्रदूषण पर सवाल जरूर उठाया था, लेकिन लगता था, दबी जबान से रस्मअदायगी निभा रहे हों - लेकिन, जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह का नाम लेकर अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाले के नाम पर फर्जी तरीके से फंसाने का आरोप लगाया है, आगे का इरादा भी साफ हो गया है. 

दिल्ली चुनाव में हार के बाद आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के भविष्य पर सवाल उठने लगे थे. ऐसी चर्चा भी स्वाभाविक ही थी - बड़ा सवाल ये उठ रहा था कि क्या आम आदमी पार्टी खत्म हो गई?

तब सवाल ये भी उठा कि क्या अरविंद केजरीवाल दिल्ली की राजनीति में बाउंस-बैक कर पाएंगे? ऐसे सवाल इसलिए भी उठे क्योंकि सिर्फ आम आदमी पार्टी ने ही सत्ता नहीं गंवाई थी, अरविंद केजरीवाल के साथ साथ मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज जैसे आम आदमी पार्टी के बड़े नेता भी अपनी सीट पर चुनाव हार गये थे.

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अब दिल्ली सहित जहां कहीं भी चुनावी राजनीति के लिए मौके हैं, बाउंस बैक के लिए अरविंद केजरीवाल को ग्रीन कॉरिडोर तो मिल गया है. 

दिल्ली से बाहर भी AAP के विस्तार का अवसर मिला है

कुछ दिन पहले ही मालूम हुआ था कि आम आदमी पार्टी ने अपने लिए तीन राजनीतिक प्राथमिकताएं तय की हैं, जिन पर करीब एक साल से काम चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये प्राथमिकताएं हैं - पंजाब को बनाए रखना, गोवा को जीतना और गुजरात के साथ साथ उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी का विस्तार करना. दरअसल, पंजाब के साथ साथ गुजरात, गोवा और उत्तर प्रदेश में भी 2027 में ही विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं. 

1. पंजाब में आम आदमी पार्टी ने 2022 में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर सरकार बनाई थी. दिल्ली से वनवास जैसी स्थिति में मनीष सिसोदिया और विभव कुमार सहित अरविंद केजरीवाल की टीम पंजाब में भी डेरा डाले हुए हैं. उपचुनाव बीत जाने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ अरविंद केजरीवाल पूरे पंजाब में नशा मुक्ति अभियान चला रहे हैं. 

दिल्ली के बाद अरविंद केजरीवाल के लिए हर हाल में पंजाब की सत्ता में वापसी जरूरी हो गई थी. 2017 के विधानसभा चुनाव में ही अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी को विपक्ष की राजनीति में खड़ा कर दिया था, और 2022 के चुनाव आतंकवादियों से रिश्ता होने का आरोप लगने के बावजूद सरकार बनाने में सफल रहे - अब तो वहां भी 'कट्टर ईमानदार' बोलकर आक्रामक कैंपेन का आधार मिल गया है.

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2. अरविंद केजरीवाल को दिल्ली कोर्ट के फैसले के बाद गोवा से लेकर गुजरात तक बीजेपी के खिलाफ आक्रामक होने का मजबूत बहाना मिल गया है. जो बातें अरविंद केजरीवाल रो रोकर दिल्ली में बोल रहे थे, आने वाले चुनावों में हंस हंसकर जेल के किस्सों से लेकर कोर्ट से बरी होने तक की बातें बताया करेंगे. 

बीते चुनाव कैंपेन में तो अरविंद केजरीवाल को यहां तक कहते सुना गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार से उनको ईमानदारी का सर्टिफिकेट मिल चुका है. दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय पर सीबीआई के छापे की याद दिलाकर अरविंद केजरीवाल कहते थे कि कुछ तो मिला नहीं - और फिर समझाते थे कि ये ईमानदारी का सर्टिफिकेट नहीं तो क्या हुआ. 

3. दिल्ली शराब नीति केस से बरी होने के बाद इंडिया ब्लॉक में भी अरविंद केजरीवाल का दबदबा बढ़ सकता है. अब तो अरविंद केजरीवाल कांग्रेस को भी खरी खोटी सुनाएंगे. राहुल गांधी दिल्ली चुनाव में वही सब बोल रहे थे, जो बीजेपी नेता कह रहे थे. दिल्ली के 'शीशमहल' से लेकर शराब घोटाले तक.

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