सीबीएसई 12वीं परीक्षा का ‘पेपर चेकिंग फ्रॉड’ दिन-ब-दिन गहरा और काला होता जा रहा है. इस परीक्षा में मिले नंबर्स को लेकर छात्रों में तो असंतोष था ही, 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' सिस्टम (OSM) के टेंडर में घोटाले के आरोपों ने इसे और गंभीर बना दिया है. विपक्ष जहां शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा था, सरकार ने सीबीएसई चेयरमैन और सचिव को ट्रांसफर करके खानापूर्ति कर ली है. इससे यह विवाद थमने के बजाय और भड़कता जा रहा है.
सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह को उनके पद से हटाकर कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में बतौर एडिशन सेक्रेटरी भेज दिया गया है. उनकी जगह पर गृह मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी रहे लोखंडे प्रशांत सीताराम को भेज दिया गया है. वहीं, सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटाकर गृह मंत्रालय के उनके मूल काडर में भेज दिया गया है. उनकी जगह वरुण भारद्वाज सीबीएसई के नए सचिव होंगे.
सीबीएसई के इन वरिष्ठ अफसरों को ‘हटाए’ जाने को सरकार की तरफ से एक सख्त कार्रवाई के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों, विपक्षी नेताओं और खुद छात्रों का मानना है कि यह सिर्फ जनता के गुस्से को शांत करने के लिए की गई एक 'खानापूर्ति' है. सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ ट्रांसफर कर देने से उस बड़े घोटाले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी, जिसने देश के लाखों छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है?
क्या है पूरा मामला और क्यों लगे धांधली के आरोप?
इस पूरे विवाद की जड़ में है 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली का एक टेंडर. दरअसल, बोर्ड ने परीक्षाओं के बाद कॉपियों की डिजिटल जांच यानी कंप्यूटर स्क्रीन पर चेकिंग के लिए एक नया टेंडर जारी किया था. आरोप है कि इस टेंडर को जारी करने और इसे किसी खास कंपनी को सौंपने की प्रक्रिया में भारी अनियमितता यानी गड़बड़ी की गई. नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई, जिसमें करोड़ों रुपये के हेरफेर की आशंका जताई जा रही है.
जब यह मामला सामने आया, तो देश भर के छात्रों और अभिभावकों में हड़कंप मच गया. कॉपियों की चेकिंग में अगर इस तरह की लापरवाही या धांधली होगी, तो छात्रों की मेहनत पर पानी फिरना तय है. मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार ने आनन-फानन में सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव को उनके पदों से हटाकर दूसरे विभागों में भेज दिया.
संसदीय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह उठा रहे हैं मंत्री प्रधान पर गंभीर सवाल
कांग्रेस सांसद और शिक्षा विभाग की संसदीय समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने सीबीएसई के OSM टेंडर पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि शुरू में RFP (Request for Proposal) में रोबोटिक स्कैनर का जिक्र था, जो बेहतर और ऑटोमेटेड स्कैनिंग के लिए इस्तेमाल होता है. लेकिन बाद में इसे बदलकर साधारण स्कैनर कर दिया गया. दिग्विजय सिंह ने पूछा कि ऐसा क्यों किया गया? क्या किसी खास कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए? इस बदलाव की जानकारी सिर्फ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ही दे सकते हैं.
इतिहास गवाह है: ट्रांसफर सजा नहीं, बल्कि 'सुरक्षित रास्ता' है
प्रशासनिक गलियारों में यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी बड़े विवाद के बाद अफसरों का तबादला कर दिया गया हो. इतिहास गवाह है कि ब्यूरोक्रेसी में ऐसे ट्रांसफर को 'सजा' के तौर पर नहीं, बल्कि कुछ समय के लिए विवादों से दूर रहने के सेफ पैसेज के रूप में देखा जाता है. जब तक मामला मीडिया की सुर्खियों में रहता है, तब तक इन अफसरों को लूप-लाइन यानी कम महत्व वाले विभागों में डाल दिया जाता है, और जैसे ही मामला ठंडा पड़ता है, इन्हें फिर से किसी बड़े और मलाईदार पद पर तैनात कर दिया जाता है.
विनीत जोशी का मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. पूर्व सीबीएसई चेयरमैन विनीत जोशी के कार्यकाल में भी पेपर लीक और अन्य प्रशासनिक कमियों को लेकर भारी विवाद हुआ था. उस समय भी उन्हें पद से हटाने के नाम पर मणिपुर का मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) जैसी बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी पोस्टिंग दे दी गई. बाद में उन्हें उसी उच्च शिक्षा विभाग का सेक्रेटरी बना दिया गया. ऐसे में मौजूदा चेयरमैन और सचिव के ट्रांसफर को कार्रवाई मानना खुद को धोखा देने जैसा है.
छात्रों के अलावा विपक्ष की भी तीखी प्रतिक्रिया: 'यह सिर्फ दाग छुपाने की कोशिश है'
इस पूरे मामले को उजागर करने और इसे सामने लाने में छात्रों और कुछ जागरूक अभिभावकों की बड़ी भूमिका रही है. सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को उठाने वाले एक छात्र प्रतिनिधि अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. छात्रों का साफ कहना है कि जब तक इस टेंडर की सीबीआई (CBI) जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं होती और दोषियों को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक वे इस कार्रवाई को अधूरा ही मानेंगे.
सीबीएसई जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में हुई इस धांधली को लेकर अब राजनीति भी गरमा गई है. विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे युवाओं के भविष्य के साथ किया गया एक और बड़ा धोखा करार दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कहते हैं कि ‘सीबीएसई चेयरमैन और सचिव का ट्रांसफर सिर्फ छलावा है. इस्तीफा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का होना चाहिए, जिन पर सरकार आंच नहीं आने दे रही है. बिग ब्रेकिंग अफसरों का ट्रांसफर नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का अपनी कुर्सी पर बने रहना है.’
विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि सरकार हर बार परीक्षा प्रणालियों और शिक्षा बोर्डों में होने वाली कमियों को दबाने के लिए छोटे-मोटे प्रशासनिक फेरबदल करके पल्ला झाड़ लेती है, जिससे असली मास्टरमाइंड कभी पकड़े ही नहीं जाते.
सीबीएसई का OSM टेंडर विवाद सिर्फ दो अफसरों के ट्रांसफर का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भरोसे का सवाल है. जरूरत इस बात की है कि मामले की तह तक जाकर सच को सामने लाया जाए और जवाबदेही तय की जाए. वरना, एक हेडलाइन के नीचे जैसे पिछली हेडलाइन दब जाती है, कहीं ऐसा न हो कि जैसे सीबीएसई का मामला भड़क जाने से NEET पेपर लीक कांड पर चर्चा कम हो गई है, सीबीएसई और उसके हुक्मरान मंत्री भी किसी और अगले कांड के बाद अपने को दबाव-मुक्त महसूस करें.
धीरेंद्र राय