लोहे से ही लोहे को काटा जा सकता है. बंगाल में बीजेपी को भी बिल्कुल ऐसा ही लग रहा है. बीजेपी की 'पोरिबोर्तन यात्रा' का मकसद भी यही है. 'पोरिबोर्तन' के नारे के साथ ही ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई थीं.
2011 से पहले जो बातें ममता बनर्जी वाम मोर्चा शासन के खिलाफ लोगों को समझा रही थीं, अब बीजेपी वही बातें तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ समझा रही है. 1 मार्च को शुरू हुई ये यात्रा पश्चिम बंगाल के सभी विधानसभा क्षेत्रों से गुजरने वाली है - और बंगाल बीजेपी की यात्रा का समापन 15 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बीजेपी की रैली के साथ होगा.
पश्चिम बंगाल पर बीजेपी की नजर तो 2014 में केंद्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद से ही लगी हुई है, लेकिन हौसला बढ़ा 2019 के आम चुनाव में लोकसभा की 18 सीटें मिल जाने के बाद. भले ही बीजेपी वो वह कामयाबी न तो 2021 के विधानसभा चुनाव में दोहरा पाई, न ही 2024 के आम चुनाव में. लेकिन, नए जोश के साथ उसी मिशन में लगी हुई है - और ममता बनर्जी के लिए अब यही सबसे बड़ी चुनौती है.
बीजेपी की 'पोरिबोर्तन यात्रा'
परिवर्तन यात्रा का आरंभ बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने किया है, और समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता रैली के साथ करेंगे. परिवर्तन यात्रा की शुरुआत 9 जगहों से की जा रही है, और यह यात्रा पश्चिम बंगाल विधानसभा के 294 क्षेत्रों को कवर करने जा रही है. शुरुआती दो दिनों के बाद 3 और 4 मार्च को डोल यात्रा और 4 मार्च को होली के कारण यात्रा में कोई रैली नहीं होगी.
बीजेपी अध्यक्ष के बाद अमित शाह और राजनाथ सिंह ने तो मोर्चा संभाल ही लिया है, आगे की यात्रा में कई केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के और भी दिग्गज नेता दिखाई देंगे, ऐसा बताया गया है. पूर्व बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, नितिन गडकरी, धर्मेंद्र प्रधान, स्मृति ईरानी और देवेंद्र फडणवीस ऐसी ही सूची में शामिल हैं.
परिवर्तन यात्रा के शुरू में ही बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन राजनीतिक इरादा जाहिर कर दिया. बोले, दीदी, आपने भ्रष्टाचार, भतीजे की दादागिरी और पुलिस के दुरुपयोग की जो इंडस्ट्री खड़ी की है, उसे पश्चिम बंगाल की जनता जल्द ही समाप्त करेगी - और अपने हिसाब से कुछ ऐसी बातें कही, जो बताती हैं कि बीजेपी किन चीजों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है.
1. बीजेपी तय कर चुकी है कि घुसपैठियों के मुद्दे पर ममता बनर्जी को हर हाल में कठघरे में खड़ा करना है. बीजेपी नेता अमित शाह के हालिया बिहार-बंगाल दौरे से ही ये चीज साफ हो गई थी, नितिन नवीन पक्का कर दिया है. परिवर्तन रैली में नितिन नवीन कहते हैं, आज 50 लाख घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए... ये लोग पश्चिम बंगाल की जनता का हक मार रहे थे, और उनकी सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे.
2. नितिन नवीन ने लगे हाथ बंगाल में भी बीजेपी के हिंदुत्व का एजेंडा भी आगे बढ़ा दिया है. कहते हैं, मां काली की पूजा करने के लिए कोर्ट से परमिशन लेना पड़ता है, और नमाज अदा करने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है. ठीक वैसे ही जैसे 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री श्मशान और कब्रिस्तान का नाम लेकर बीजेपी समर्थकों को अपनी बात समझा रहे थे.
जो चैलेंज तब समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने फेस किया था, उसी तरह की चुनौती ममता बनर्जी के लिए भी खड़ी होने जा रही है. तब भी जबकि ममता बनर्जी दीघा में भगवान जगन्नाथ का मंदिर बनवाकर अपने हिसाब से बीजेपी के हमलों को काउंटर करने की कोशिश करती रही हैं.
3. बीजेपी अध्यक्ष का कहना है, ममता दीदी ने सत्ता में आने से पहले 'मां, माटी, मानुष' का नारा दिया था, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि आज पश्चिम बंगाल की बहन–बेटियां असुरक्षित हैं, और माटी घुसपैठियों के हवाले कर दी गई है.
'पोरिबोर्तन' के साथ साथ 'मां, माटी और मानुष' भी ममता बनर्जी का बड़ा ही कारगर सियासी हथियार रहा है, जिस पर बीजेपी ने सीधा हमला बोल देने का फैसला किया है - और अब ममता बनर्जी को भी माकूल जवाब देने के लिए नए सिरे से जवाब देना होगा.
TMC कार्यकर्ताओं को अभिषेक बनर्जी का 'वेलकम नोट'
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले बीजेपी ने परिवर्तन यात्रा के तहत 5 हजार किलोमीटर की दूरी तय करने का ऐलान किया है. और, टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने तरीके से बीजेपी की यात्रा में शामिल नेताओं का स्वागत करने को कहा है. बिहार में मांस-मछली की दुकानों के खिलाफ सरकारी आदेश पर पहले कड़ा विरोध जता चुकीं ममता बनर्जी के भतीजे ने बीजेपी के विरोध का तरीका भी बताया है.
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी के परिवर्तन यात्रा में शामिल लोगों को 'अतिथि देवो भवः' की तर्ज पर मछली, अंडा और चाय से वेलकम करने को कहा है.
अभिषेक बनर्जी का लहजा तो तंज भरा है ही, यह समझना भी मुश्किल नहीं है कि वो टीएमसी समर्थकों को इशारों इशारों में ही क्या टास्क दे रहे हैं.
मृगांक शेखर