ओडिशा में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म हो गया है. मतदान के दौरान कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग की खबर सामने आने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. इस पूरे मामले की जानकारी ओडिशा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने दी है. दास ने कहा, 'तीन विधायकों ने बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला. इनके नाम रमेश जैना, दसरथो गोमागो और सोफिया फिरदौस हैं. उन्होंने कहा, मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के सारी बातें बताई थीं, और फिर सोफिया. मैं सोच रहा था सोफिया बहुत विद्वान हैं और अपने भविष्य को देखेगी, इस बीच उन्होंने बहुत से बयान दिए, जिन्हें मैंने इग्नोर कर दिया था. हमनें उन्हें भी लाइमलाइट से हटा दिया, ताकि उनके भविष्य पर आंच न आए. वे एक सेकुलर पॉलिटिक्स करती आई हैं. माइनॉरिटी कम्युनिटी में उनकी तरह व्यक्तित्व नहीं है. दल के लिए और उनके खुद के लिए एक अच्छा भविष्य है. हम उनके पिता पर कार्रवाई करने के बाद भी उनपर भरोसा कर रहे थे.
'2 बार फोन पर बात हुई'
भक्त चरण दास ने कहा, 'कल भी उन्होंने मुझसे बात की थी. आज सुबह भी हमारी 2 बार फोन पर बात हुई. उन्होंने मुझसे पूछा था कि मैं कहां आऊं. 2 बार बातें हुई थी. मैंने उन्हें अपने कार्यालय आने को कहा था, वह आई और गई भी, लेकिन मुझे जो वोट दिखाया..! हम इसीलिए इन लोगों को बेंगलुरु नहीं लेकर गए, क्योंकि विधान सभा का सत्र जारी था. हमारे वरिष्ठ नेता तारा प्रसाद भी नहीं गए. विधान सभा में बोलने वाले लोग यानी वोकल लोग, सोफिया भी वोकल थी, तारा बाबू भी वरिष्ठ नेता हैं, उनकी तबीयत भी खराब रहती है, उन्हें ले जाकर उनकी तबीयत खराब नहीं करना चाहते थे हम. रमेश जेना ने भी हमें हां कहा था. मेरे घर पर आका खा-पीकर मीडिया के सामने हां कहा था. मुझे जितने लोगों ने कहा कि रमेश जेना ऐसा कर सकते हैं, मैंने उनपर विश्वास नहीं किया था. कांग्रेस पार्टी की जो जमींदारी थी उन्हें पूरी तरह से खत्म कर दिया.'
इस बीच, राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान विधानसभा के कक्ष संख्या 54 में जारी है और लगभग 100 विधायक वोट डाल चुके हैं.
पांच उम्मीदवार मैदान में
राज्य से राज्यसभा की चार सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं. भाजपा ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है. बीजद की ओर से संतृप्त मिश्रा चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय को भाजपा का समर्थन मिला है. दूसरी तरफ डॉ. दत्तेश्वर होता बीजद और कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार हैं, जिन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का भी समर्थन प्राप्त है.
क्या हैं नियम?
चुनाव नियमों के अनुसार, विधायकों को वोट डालने के बाद अपने चिह्नित बैलेट पेपर को अपनी पार्टी के एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है, अन्यथा उनका वोट अमान्य हो सकता है. भाजपा की ओर से उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव और कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन को एजेंट बनाया गया है. बीजद के एजेंट प्रताप केशरी देव हैं, जबकि कांग्रेस के एजेंट की जिम्मेदारी भक्त चरण दास संभाल रहे हैं.
कुल मिलाकर, क्रॉस वोटिंग के आरोप और मतदान के दौरान हुए विवाद ने ओडिशा के राज्यसभा चुनाव को बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण बना दिया है. अब सभी की नजरें चुनाव परिणाम और आगे की राजनीतिक रणनीतियों पर टिकी हुई हैं.
अजय कुमार नाथ