'भाईसाब साल बर्बाद हो जाएगा', गिड़गिड़ाता रहा पिता, 2 मिनट की देरी से छूटा बेटी का RE-NEET

विदिशा में नीट री-एग्जाम के दौरान एक छात्रा को मात्र 2 मिनट की देरी से पहुंचने पर परीक्षा केंद्र में एंट्री नहीं मिली. छात्रा रागनी विश्वकर्मा अपने पिता उमेश विश्वकर्मा के साथ 70 किलोमीटर दूर गांव से परीक्षा देने आई थी. पिता केंद्र के बाहर रोते और गुहार लगाते रहे, लेकिन नियमों के कारण छात्रा परीक्षा नहीं दे सकी.

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 विदिशा में बेटी के लिए फूट-फूट कर रोता रहा पिता. (Photo: ITG) विदिशा में बेटी के लिए फूट-फूट कर रोता रहा पिता. (Photo: ITG)

विवेक सिंह ठाकुर

  • विदिशा,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:32 PM IST

मध्य प्रदेश के विदिशा में NEET री-एग्जाम के दौरान एक ऐसी घटना सामने आई जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया. एक पिता अपनी बेटी का भविष्य बचाने के लिए परीक्षा केंद्र के बाहर रोता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन सख्त नियमों के कारण उसकी बेटी को परीक्षा में एंट्री नहीं मिल पाई. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

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जानकारी के अनुसार कुरवाई तहसील के ग्राम कुल्हा की रहने वाली रागनी विश्वकर्मा अपने पिता उमेश विश्वकर्मा के साथ नीट री-एग्जाम देने विदिशा पहुंची थी. दोनों करीब 70 किलोमीटर दूर से परीक्षा केंद्र के लिए निकले थे. परिवार का कहना है कि रास्ते में तेज बारिश हुई और उनकी बाइक भी पंचर हो गई, जिसके कारण वो समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सके. जब वे केंद्र पहुंचे तो निर्धारित समय निकल चुका था और गेट बंद हो चुका था. बताया जा रहा है कि वे करीब 2 मिनट की देरी से पहुंचे थे.

परीक्षा केंद्र के बाहर का दृश्य बेहद भावुक करने वाला था. छात्रा और उसके पिता दोनों रो पड़े. पिता उमेश विश्वकर्मा बार-बार अधिकारियों से अनुरोध करते रहे कि उनकी बेटी को परीक्षा देने दिया जाए. उन्होंने बताया कि बेटी ने पूरे साल मेहनत करके नीट की तैयारी की थी और डॉक्टर बनने का सपना देखा था. लेकिन कुछ मिनट की देरी ने उसकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया.

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70 किलोमीटर दूर से पहुंचे थे परीक्षा देने

घटना के दौरान पिता इतने दुखी हो गए कि उन्होंने विरोध जताते हुए परीक्षा केंद्र के गेट पर सिर मार दिया. वहां मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की. बेटी रागनी भी लगातार रोती रही. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पिता की बेबसी और बेटी के टूटे सपने को देखकर लोग भावुक हो रहे हैं.

उमेश विश्वकर्मा ने अपनी बाइट में कहा कि वो समय से निकल गए थे, लेकिन रास्ते की परेशानी के कारण देरी हो गई. साथ ही उन्होंने कहा कि बेटी ने साल भर मेहनत की, लेकिन सिर्फ 2 मिनट की वजह से उसे परीक्षा नहीं देने दी गई. उनका कहना था कि उन्होंने अधिकारियों से बहुत विनती की, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी.

दूसरी तरफ परीक्षा अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार तय समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जा सकता. अधिकारियों के अनुसार परीक्षा की सुरक्षा, गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है. इसलिए समय सीमा पार होने के बाद किसी छात्र को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

विदिशा में हुई यह घटना अब चर्चा का विषय बनी हुई है. एक तरफ परीक्षा व्यवस्था के सख्त नियम हैं, जिनका पालन सभी के लिए समान रूप से किया जाता है. दूसरी तरफ एक छात्रा और उसके परिवार की मेहनत, उम्मीदें और भावनाएं हैं, जो कुछ मिनट की देरी के कारण परीक्षा से वंचित रह गईं.

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सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कई लोग छात्रा और उसके पिता के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं, जबकि कुछ लोग परीक्षा नियमों के पालन को जरूरी बता रहे हैं. फिलहाल विदिशा की यह घटना नीट परीक्षा के सख्त नियमों और छात्रों की भावनाओं के बीच चल रही बहस का बड़ा उदाहरण बन गई है.

विदिशा में नीट री-एग्जाम के दौरान सामने आई यह तस्वीर एक पिता की उस बेबसी को दिखाती है, जो अपनी बेटी के सपनों को टूटते हुए देख रहा था. कुछ मिनट की देरी ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया और यह घटना अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है.
 

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