रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, छेड़छाड़ हुई तो होगी कार्रवाई... इंदौर मामले में MP हाई कोर्ट का सख्त आदेश; मुख्य सचिव 27 जनवरी को फिर होंगे पेश

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा जल त्रासदी मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न होने देने की चेतावनी दी है. कोर्ट ने पाइपलाइन टेंडर से लेकर प्रदूषण बोर्ड की जांच रिपोर्ट तक सभी मूल दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है.

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पाइपलाइन टेंडर और प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट सुरक्षित रखने का आदेश.(FILE PHOTO:PTI) पाइपलाइन टेंडर और प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट सुरक्षित रखने का आदेश.(FILE PHOTO:PTI)

aajtak.in

  • इंदौर ,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:59 PM IST

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रशासन को इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पीने के पानी के संकट से जुड़े ओरिजिनल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है. इसमें पाइपलाइन का टेंडर और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की जांच रिपोर्ट शामिल है,

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.

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हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, " कलेक्टर, इंदौर, और कमिश्नर, नगर निगम यह सुनिश्चित करेंगे कि याचिका के विषय से संबंधित जरूरी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं."

यह आदेश याचिकाकर्ताओं के वकीलों द्वारा इस आशंका जताए जाने के बाद आया कि ओरिजिनल दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 6 जनवरी के अपने अंतरिम आदेशों का पालन जारी रखने और एक और प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया.

कोर्ट ने प्रशासन को भागीरथपुरा में डायरिया से पीड़ित लोगों को मुफ्त मेडिकल सुविधा देने, लोगों को सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराने, दूषित पानी के स्रोतों के इस्तेमाल को रोकने, पीने के पानी की टेस्टिंग और कीटाणुशोधन को मजबूत करने, पानी की सप्लाई के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने और एक लॉन्ग-टर्म वॉटर सिक्योरिटी प्लान लागू करने का आदेश दिया था.

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हाई कोर्ट अगली बार 27 जनवरी को याचिकाओं पर सुनवाई करेगा. इसने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन को भी उस तारीख को ऑनलाइन पेश होने का निर्देश दिया. जैन ने मंगलवार की सुनवाई और पिछली दो सुनवाई में वीडियो लिंक के जरिए हिस्सा लिया था.

सरकारी वकीलों ने हाई कोर्ट को बताया कि पीने के पानी में प्रदूषण के कारणों की जांच करने, जवाबदेही तय करने और ऐसी घटनाओं की दोबारा होने से रोकने के उपायों का सुझाव देने के लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है.

लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि यह कमेटी सिर्फ दिखावा है, जिसका मकसद इस स्थिति के लिए जिम्मेदार बड़े अधिकारियों को बचाना है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम हाई कोर्ट के अंतरिम निर्देशों का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं. राज्य सरकार ने इस आरोप से इनकार किया.

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों से एक प्रस्तावित मॉनिटरिंग कमेटी के लिए स्वतंत्र सदस्यों के नाम सुझाने को कहा, जिसकी अध्यक्षता डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट करेंगे, ताकि अंतरिम निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके. वकीलों ने इसके लिए समय मांगा.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, दिसंबर से दूषित पानी से उल्टी और दस्त के कारण मरने वालों की संख्या 25 है, वहीं 15 जनवरी को HC में राज्य सरकार द्वारा सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 7 लोगों की मौत हुई है.

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सरकारी महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की एक कमेटी की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि भागीरथपुरा में 15 मौतें इस समस्या से जुड़ी हो सकती हैं.

अधिकारियों के अनुसार, भागीरथपुरा में 51 ट्यूबवेल में दूषित पानी पाया गया और टेस्ट रिपोर्ट में ई कोलाई बैक्टीरिया होने का पता चला. यह प्रदूषण एक शौचालय के सीवेज के पाइप वाले पीने के पानी में मिलने से हुआ था.

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