'10 दिन के अंदर नेम प्लेट टांग लें बागेश्वर धाम के सभी दुकानदार...', धीरेंद्र शास्त्री का अल्टीमेटम, बोले- ताकि राम और रहमान वालों की पहचान हो सके

Dhirendra Shastri News: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बयान के बीच कहा, हमें न राम से दिक्कत है और न रहमान से दिक्कत है, हमें कालनेमियों से दिक्कत है. इसलिए अपनी दुकान के बाहर नेम प्लेट टांग दो, जिससे आने वाले श्रद्धालुओं का धर्म और पवित्रता भ्रष्ट न हो.

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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री. बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री.

लोकेश चौरसिया

  • छतरपुर ,
  • 22 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 10:54 AM IST

Name Plate Controversy: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह बागेश्वर धाम में लगी दुकानों पर नेम प्लेट लगाने को कहा है. कथावाचक ने कहा कि धाम की सभी दुकानों और होटलों के बाहर मालिक का नाम लगेाना जरूरी है और यह अच्छा अच्छा काम है. हमें अपने बाप का नाम लिखने में क्या तकलीफ है. इस कार्य की तो सराहना होनी चाहिए.  

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दरअसल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाने-पीने के सामान का व्यवसाय करने वाले होटल, रेस्तरां, ढाबा, रेहड़ी-ठेली वालों को साइनबोर्ड लगाकर मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखने का आदेश दिया है.

इसी की देखादेखी अब मध्य प्रदेश में भी इस तह के नियम बनाने की मांग की जा रही है. हालांकि, बागेश्वर धाम में भी यह नियम लागू किया जा रहा है. धाम की समिति की बैठक में पीठाधीश्वर इस आदेश पर मुहर लगाएंगे. 

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बयान के बीच कहा, हमें न राम से दिक्कत है और न रहमान से दिक्कत है, हमें कालनेमियों से दिक्कत है. इसलिए अपनी दुकान के बाहर नेम प्लेट टांग दो, जिससे आने वाले श्रद्धालुओं का धर्म और पवित्रता भ्रष्ट न हो. उन्होंने कहा कि ये हमारी आज्ञा है कि बागेश्वर धाम के सभी दुकानदार 10 दिन के अंदर नेम प्लेट टंगवा लें, नहीं तो ध्यान समिति की ओर से कानून को साथ में लेकर विधिक कार्रवाई की जाएगी. देखें Video:-

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पता हो कि यूपी की मुजफ्फरनगर पुलिस ने कावंड़ यात्रा मार्ग पर सभी खाने-पीने की दुकानों पर मालिकों का नाम लिखे जाने का आदेश जारी किया था. इस विवादास्पद आदेश को कुछ दिन बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में लागू कर दिया. विपक्ष के कई नेताओं ने इस आदेश पर आपत्ति जताई और इसे भेदभावपूर्ण करार दिया. कांग्रेस ने इस आदेश को 'शरारत' और 'पक्षपात' करार दिया था.

राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी खाने-पीने की दुकानों पर मालिकों का नाम लिखे जाने के राज्य सरकार के आदेश को  'विभाजनकारी एजेंडा' करार दिया.

उधर, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. मोइत्रा ने अपनी याचिका में दोनों राज्य सरकारों की ओर से जारी आदेश पर रोक लगाए जाने का आग्रह करते हुए कहा कि ऐसे निर्देश समुदायों के बीच विवाद को बढ़ावा देते हैं. 

वहीं, योग गुरु रामदेव ने कांवड़ मार्ग पर स्थित होटल, रेस्तरां और ढाबा के बाहर मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखने संबंधी आदेश को रविवार को सही ठहराते हुए कहा कि किसी को अपना परिचय देने में परेशानी नहीं होनी चाहिए. 

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हरिद्वार में रामदेव ने कहा कि अपने नाम पर तो सबको गर्व होता है और उसे छिपाने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने सवाल किया, जब रामदेव को अपनी पहचान बताने में कोई दिक्कत नहीं है, तो रहमान को क्यों दिक्कत होनी चाहिए.

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