भोपाल में हिंदू लड़कियों के रेप और ब्लैकमेलिंग के पीछे बड़े नेटवर्क और फंडिंग की आशंका, राष्ट्रीय महिला आयोग की रिपोर्ट में खुलासा

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने छात्राओं को महंगे गिफ्ट, कपड़ों और घुमाने का लालच देकर प्रेमजाल में फंसाया. उन्हें नशीले पदार्थ देकर आपत्तिजनक तस्वीरें खींची गईं और ब्लैकमेल किया गया.

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भोपाल में हिंदू युवतियों का रेप और ब्लैकमेलिंग केस. (फोटो: META AI) भोपाल में हिंदू युवतियों का रेप और ब्लैकमेलिंग केस. (फोटो: META AI)

अमित भारद्वाज

  • नई दिल्ली/भोपाल ,
  • 21 मई 2025,
  • अपडेटेड 9:06 AM IST

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक प्राइवेट कॉलेज में हुए रेप और ब्लैकमेलिंग मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने गंभीर तथ्य उजागर किए हैं. आयोग ने इस मामले को संगठित अपराध और संभावित धर्मांतरण नेटवर्क से जोड़ा है. इस संबंध में तैयार की गई जांच रिपोर्ट राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेज दी है. 

दरअसल, भोपाल के एक प्राइवेट कॉलेज में कुछ छात्रों ने छात्राओं के साथ दुष्कर्म किया और इसका वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.

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रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित छात्राओं पर दबाव डाला कि वे अपनी परिचित अन्य लड़कियों को भी उनसे दोस्ती करने के लिए लाएं, अन्यथा वीडियो को वायरल कर दिया जाएगा.

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा विजया रहाटकर ने एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की. इस समिति ने बीती 3 मई से 5 मई तक भोपाल में पीड़ित छात्राओं, उनके परिजनों, पुलिस अधिकारियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर जांच की. समिति ने उन स्थानों का भी दौरा किया जहां पीड़िताओं को नशीली दवाएं देकर उनके साथ अमानवीय कृत्य किए गए.

जांच समिति में निर्मल कौर, आईपीएस (सेवानिवृत्त), पूर्व पुलिस महानिदेशक, झारखंड (अध्यक्ष),   निर्मला नायक, अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, जबलपुर (सदस्य), और  आशुतोष पांडे, अवर सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग (सदस्य) शामिल थे. 

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कमेटी के प्रमुख निष्कर्षों में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने छात्राओं को महंगे गिफ्ट, कपड़ों और घुमाने का लालच देकर प्रेमजाल में फंसाया. उन्हें नशीले पदार्थ देकर आपत्तिजनक तस्वीरें खींची गईं और ब्लैकमेल किया गया. पीड़िताएं मानसिक और सामाजिक दबाव में हैं, फिर भी उन्होंने साहस दिखाकर FIR दर्ज कराई.

आरोपियों की सामान्य पारिवारिक स्थिति के बावजूद उनकी विलासितापूर्ण जीवनशैली ड्रग तस्करी जैसे संगठित अपराध की संभावना को दर्शाती है.

कमेटी ने पाया कि आरोपियों ने पीड़िताओं पर धर्मांतरण के लिए दबाव डाला, जो एक साजिशपूर्ण नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है. कमेटी ने सुझाव दिया कि इसकी राज्यव्यापी जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या आरोपियों को किसी संगठन से वित्तीय सहायता मिल रही थी. 

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