'गाय को मिले राष्ट्रीय पशु का दर्जा', कांग्रेस के मुस्लिम विधायक का MP विधानसभा में चौंकाने वाला प्रस्ताव, मच गया शोर

इन दिनों मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है. जाहिर है अलग-अलग मुद्दों को लेकर सदन के भीतर और बाहर जमकर हंगामा और प्रदर्शन भी हो रहा है लेकिन इसी हंगामे के बीच पेश हुए एक अशासकीय संकल्प ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

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भोपाल उत्तर से कांग्रेस MLA हैं आतिफ अकील.(Photo:ITG) भोपाल उत्तर से कांग्रेस MLA हैं आतिफ अकील.(Photo:ITG)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल ,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में गाय को लेकर सियासत तेज हो गई. कांग्रेस के मुस्लिम विधायक आतिफ अकील ने अशासकीय संकल्प के जरिए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है, लेकिन बीजेपी ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया है.

दरअसल, भोपाल उत्तर से कांग्रेस के मुस्लिम विधायक आतिफ अकील ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग के साथ सदन में अशासकीय संकल्प पेश किया है.

आतिफ अकील का कहना है कि गाय भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम आधार है, इसलिए उसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलना चाहिए.

उन्होंने यह भी मांग की कि गाय की मृत्यु होने पर उसका विधिवत और सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुनिश्चित किया जाए. साथ ही गोकशी की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधान किए जाने की बात भी कही.
 
बता दें कि आतिफ से पहले उनके पिता आरिफ अकील ने भी बतौर विधायक साल 2013 में इसी तरह का अशासकीय संकल्प पेश किया था लेकिन तब वो पारित नहीं हुआ था. आतिफ इस बार उम्मीद कर रहे है कि सदन इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करेगा और इसे पारित करेगा.

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बीजेपी का पलटवार

कांग्रेस विधायक की इस मांग पर बीजेपी की ओर से प्रतिक्रिया भी सामने आई. बीजेपी ने इसे 'पब्लिसिटी स्टंट' बताया है. बीजेपी विधायक और प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा कि ऐसे मुद्दों को सियासी मंच के बजाय समाज के व्यापक समर्थन के साथ उठाया जाना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार गौ संरक्षण और सम्मान के लिए पहले से प्रतिबद्ध है और इस दिशा में काम कर रही है. वहीं, बीजेपी विधायक उषा ठाकुर ने कहा है कि समय से आतिफ को 'सद्बुद्धि' आ गई यह अच्छी बात है
 
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में वैचारिक और धार्मिक विमर्श को केंद्र में ला दिया है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सदन इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह मांग सियासी बहस से आगे बढ़कर ठोस निर्णय में बदल पाती है.

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