18 साल बाद तलाक, 2 करोड़ की एलिमनी… रेप केस में जेल जा चुके आसाराम के बेटे नारायण साईं की कहानी

इंदौर फैमिली कोर्ट ने रेप केस में सजा काट रहे नारायण साईं और जानकी देवी के बीच चल रहे तलाक के मामले में अहम फैसला सुनाया है. साल 2018 में जानकी देवी ने तलाक की अर्जी दायर की थी. उस दौरान कोर्ट ने नारायण साईं को 50 हजार रुपए हर महीने बतौर मेंटेनेंस देने का आदेश दिया था. इसके बावजूद नारायण साईं ने पैसे नहीं दिए.

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नारायण साईं को 3 महीने में देने होंगे 2 करोड़ रुपए. (File Photo: ITG) नारायण साईं को 3 महीने में देने होंगे 2 करोड़ रुपए. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • इंदौर,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

इंदौर की फैमिली कोर्ट के फैसले में नारायण साईं और जानकी देवी के बीच तलाक मंजूर कर लिया है. कोर्ट ने इसी के साथ तीन महीने के भीतर 2 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया है. जानकी देवी के वकील का कहना है कि साल 2018 में तलाक की अर्जी दायर हुई थी, उस समय कोर्ट ने 50 हजार रुपए हर महीने का आदेश नारायण साईं को दिया था, लेकिन नारायण साईं ने 8 साल में एक भी पैसा जानकी देवी को नहीं दिया.

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एजेंसी के अनुसार, साल 2018 में जब जानकी हरपालानी ने अपने पति नारायण साईं के खिलाफ तलाक की अर्जी दायर की, तब कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई के दौरान उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये बतौर मेंटेनेंस देने का आदेश दिया था. यह आदेश इस आधार पर दिया गया था कि जब तक मामला कोर्ट में लंबित है, तब तक पत्नी को आर्थिक सहायता मिलती रहे.

लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद जानकी को पिछले आठ वर्षों में एक भी रुपया नहीं मिला. उनके वकील के अनुसार, बार-बार कानूनी प्रक्रिया के बावजूद नारायण साईं ने कोई पैसा नहीं दिया. बता दें कि नारायण साईं रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहा है. वह गुजरात के सूरत जिले की जेल में बंद है.

जानकी हरपालानी ने अपनी याचिका में मानसिक प्रताड़ना सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे और एकमुश्त 5 करोड़ रुपये की मांग की थी. उन्होंने कोर्ट में अपने दावों के समर्थन में दस्तावेजी सबूत भी पेश किए. दूसरी ओर, नारायण साईं ने इन आरोपों को गलत बताया था, लेकिन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पत्नी के पक्ष को अधिक ठोस माना.

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यह भी पढ़ें: गुजरातः जेल में बंद आसाराम के बेटे नारायण साईं पर एक और केस, सामने आया ये फर्जीवाड़ा

करीब आठ साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद 2 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने न सिर्फ दोनों के बीच तलाक को मंजूरी दी, बल्कि यह भी आदेश दिया कि नारायण साईं तीन महीने के भीतर जानकी को 2 करोड़ रुपये बतौर स्थायी गुजारा भत्ता (परमानेंट एलिमनी) दे.

कोर्ट ने पिछले आठ वर्षों तक मेंटेनेंस न दिए जाने को भी गंभीरता से लिया. सुनवाई के दौरान मार्च 2026 में नारायण साईं को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया और बयान दर्ज किया गया. इसके बाद अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अंतिम फैसला सुनाया. 2008 में शुरू हुआ यह रिश्ता अब 2026 में कानूनी तौर पर खत्म हो चुका है.

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