पेशे से डेंटिस्ट, चल नहीं सकती, फिर दुनिया क्यों कहती है सुपरमॉडल

इस सुपरमॉडल को देखकर आपको यही लग रहा होगा कि यह सिर्फ पोज देने के लिए वीलचेयर पर बैठी है. लेकिन सच्चाई कुछ और है...

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राजलक्ष्मी राजलक्ष्मी

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 11:42 AM IST

क्या बिना पंखों के उड़ान भरी जा सकती है? क्या बिना पैरों के मॉडलिंग की जा सकती है? आपका उत्तर संभवत: नहीं होगा. पर आपका ये उत्तर गलत है. क्योंकि हौसला हो तो बिना पंखों के भी उड़ान भरी जा सकती है और पैर ना होने के बावजूद मॉडलिंग संभव है.

इसकी मिसाल पेश की बेंगलुरु की राजलक्ष्मी ने. राजलक्ष्मी पेशे से डॉक्टर हैं और 7 अक्टूबर को पोलैंड में होने वाले मिस वीलचेयर वर्ल्ड में भारत को रिप्रजेंट करने वाली हैं.

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राजलक्ष्मी दरअसल, चल नहीं सकतीं. दस साल पहले वर्ष 2007 में हुए एक हादसे ने राजलक्ष्मी से उनके चलने की ताकत छीन ली.

साल 2007 में राजलक्ष्मी को चेन्नई में चल रही एक नेशनल कॉन्फरेंस के लिए कुछ पेपर प्रेजेंट करने के लिए बुलाया गया था

उस वक्त उन्होंने अपनी बीडीएस की परीक्षा दी ही थी. रास्ते में उनकी गाड़ी का एक्सिडेंट हो गया जिसमें राजलक्ष्मी को स्पाइनल इंजरी हो गई.

हालांकि, इसके बाद भी राजलक्ष्मी ने हार नहीं मानी और अपनी आगे की पढ़ाई की.

राजलक्ष्मी को साइकोलॉजी और फैशन पसंद है, इसलिए उन्होंने इसमें आगे बढ़ने का फैसला किया.

इसी दौरान राजलक्ष्मी को मिस वीलचेयर इंडिया के बारे में पता चला और उन्होंने इसके लिए एप्लाई किया, जिसके बाद उन्होंने इसमें हिस्सा भी लिया. साल 2014 में वो इसकी विनर बनीं.

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अब राजलक्ष्मी इस साल 7 अक्टूबर को पोलैंड में होने वाले मिस वीलचेयर वर्ल्ड में हिस्सा लेने वाली हैं. इस प्रतियोगिता में वो भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली हैं.

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