How to Make Sea Buckthorn Chutney: भारत के प्रदेशों में अलग-अलग तरह का खाना बनता है, जो न सिर्फ टेस्टी होता है, बल्कि हेल्थ के लिए भी किसी जादू से कम नहीं होता है. खासतौर पर पहाड़ी इलाकों में बनने वाला ट्रेडिशनल फूड लोगों को बहुत पसंद आता है और उनके अपने अलग फायदे भी होते हैं. उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख में खास चटनी बनाती है, जिसे वहां के लोग बड़े चाव से खाते हैं.
वैसे तो आपने अभी तक धनिया, पुदीना, खीरा, आडू, लौकी और आम की चटनी खाई होंगी, लेकिन आज हम आपको एक पहाड़ी फल की चटनी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो खासतौर पर लद्दाख में खाई जाती है. वैसे तो उत्तराखंड में भी लोग इस फल की चटनी खूब खाते हैं.
हम लद्दाख की मशहूर सी बकथॉर्न चटनी की बात कर रहे हैं, जिसे घर पर बनाना भी काफी आसान है. सी बकथॉर्न एक चमकीले नारंगी रंग का फल है, जो लद्दाख के बेहद ठंडे और शुष्क वातावरण में उगता है. विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और ओमेगा फैटी एसिड्स से भरपूर होने के कारण इसे ऑरेंज गोल्ड और वंडर बेरी भी कहा जाता है. सी बकथॉर्न दिखने में भी बेरी जैसा ही दिखाई देता है, बस इसका कलर ऑरेंज होता है.
सी बकथॉर्न से बनी यह चटनी शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ स्वाद भी बढ़ाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पानी का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है, जिससे यह लंबे समय तक सुरक्षित रहती है.
सी बकथॉर्न चटनी बनाने के लिए जरूरी चीजें
इस चटनी को बनाने की आसान तरीका
क्यों डालते हैं खुबानी?
खुबानी का इस्तेमाल सी बकथॉर्न के तीखे खट्टे फ्लेवर को बैलेंस करता है और चटनी में नेचुरल मिठास भी शामिल करता है. यही वजह है कि यह चटनी स्वाद में खट्टी, तीखी और हल्की मीठी लगती है.
कैसे करें सर्व?
इस पहाड़ी चटनी को पराठे, रोटी, सत्तू, दाल-चावल या सूप के साथ परोसा जा सकता है. लद्दाख में इसे खासतौर पर थुकपा और अन्य पारंपरिक सूप के साथ खाया जाता है.
स्टोर करने का सही तरीका
चटनी को साफ और सूखे कांच के जार में भरकर रखें. कम नमी और प्राकृतिक एसिड्स की वजह से यह लंबे समय तक खराब नहीं होती. फ्रिज में रखने पर इसे कई हफ्तों तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क