Desi vs Hybrid Cucumber: खीरा (ककड़ी) की डिमांड हर मौसम में काफी अधिक होती है क्योंकि ये घर हो या होटलस रेस्टोरेंट हो या ढ़ाबा, हर जगह सलाद की प्लेट में इसका अहम स्थान होता है. पानी और पोषण से भरपूर खीरा शरीर को हाइड्रेटेड रखने और पेट को ठंडा रखने का सबसे बेस्ट च्वाइस होता है. लेकिन आजकल मार्केट में देसी खीरे के नाम पर बड़े पैमाने पर हाइब्रिड और केमिकल्स की मदद से उगाए गए खीरे बेचे जा रहे हैं.
आम लोग कई बार जल्दबाजी में देसी खीरा और हाइब्रिड खीरा में अंतर नहीं कर पाते और मार्केट से अक्सर चमकदार और बड़े खीरा को देखकर धोखा खा जाते हैं. इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए एक अनुभवी किसान ने कुछ ऐसे देसी और प्रैक्टिकल तरीके शेयर किए हैं, जिनकी मदद से आप ठेले या दुकान पर खड़े-खड़े ही असली और नकली का फर्क जान सकते हैं.
दिखावट और साइज
देसी और हाइब्रिड खीरे को पहचानने का सबसे पहला तरीका उसकी बनावट और रंग है. किसान के मुताबिक जो हाइब्रिड खीरे होते हैं वे दिखने में बिल्कुल परफेक्ट, सीधे, गहरे हरे रंग के और काफी चमकदार होते हैं.
लेकिन असली देसी खीरा साइज में थोड़ा छोटा, हल्का मुड़ा हुआ होता है और उसका रंग हल्का हरा या कहीं-कहीं पीला होता है. देसी खीरे का छिलका थोड़ा खुरदरा हो सकती है और उस पर छोटे-छोटे दाने या कांटे जैसे उभार दिखते हैं. लेकिन हाइब्रिड खीरा पूरी तरह से स्मूथ और प्लेन होता है.
स्वाद और कड़वाहट
अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि खीरा काटने पर वह कड़वा निकल जाता है. किसान भैया ने बताया कि देसी खीरे में कड़वाहट होने के चांसेस थोड़े ज्यादा होते हैं क्योंकि यह पूरी तरह नेचुरल तरीके से उगता है. इसके ऊपरी हिस्से को रगड़कर झाग निकालने से इसकी कड़वाहट आसानी से दूर हो जाती है.
लेकिन हाइब्रिड खीरे को इस तरह मॉडिफाई किया जाता है कि वह कड़वा न लगे लेकिन इसमें देसी खीरे जैसा ओरिजिनल स्वाद और सोंधापन नहीं रहता. देसी खीरे को खाने पर एक खास तरह की फ्रेशनेस और मिठास महसूस होती है जो हाइब्रिड में नहीं मिलती.
पानी की मात्रा और सेहत
हाइब्रिड खीरे को लंबे समय तक ताजा रखने और वजन बढ़ाने के लिए कई बार पेस्टिसाइड्स और केमिकल का सहारा लिया जाता है. देसी खीरे में नेचुरल पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसके बीज छोटे व सॉफ्ट होते हैं जो आसानी से पच जाते हैं.
हाइब्रिड खीरे के बीज थोड़े सख्त हो सकते हैं. यदि आप अपनी सेहत के साथ समझौता नहीं करना चाहते हैं तो हमेशा लोकल मार्केट से थोड़े कम चमकदार, हल्के रंग वाले और टेढ़े-मेढ़े देसी खीरे को ही प्रिफरेंस दें.
आजतक लाइफस्टाइल डेस्क